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Bidi Cigarette Price Budget 2026: देश के आम बजट ने सिगरेट और बीड़ी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सरकार ने सिगरेट पर GST बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है। वहीं बीड़ी बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले तेंदूपत्ते पर लगने वाला GST 18 प्रतिशत से 5 प्रतिशत कर दिया है। इसका मतलब बीड़ी सस्ती हो जाएगी। अब मुद्दा ये है कि जब बीड़ी और सिगरेट दोनों ही तंबाकू प्रोडक्ट हैं तो सिगरेट महंगी और बीड़ी सस्ती क्यों है ? जबकि बीड़ी सेहत के लिए ज्यादा हानिकारक है।
बीड़ी ज्यादा खतरनाक क्यों ?
बीड़ी ठीक से जलती नहीं है, इसलिए धुआं खींचने के लिए जोर से कश लगाना पड़ता है। इससे धुआं फेफड़ों के अंदर तक गहराई से चला जाता है। बीड़ी में तंबाकू कम दिखता है, लेकिन इसमें निकोटीन, टार, कार्बन मोनोऑक्साइड और सिगरेट के मुकाबले कई बार ज्यादा मात्रा में शरीर में चली जाती है। सिगरेट में फिल्टर होता है। बीड़ी बिना फिल्टर की होती है, इसलिए जहर सीधा शरीर में जाता है।
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बीड़ी पीने वालों में कैंसर का खतरा ज्यादा ?
बीड़ी पीने वालों में मुंह का कैंसर का खतरा लगभग 3.55 गुना बढ़ जाता है। जबकि सिगरेट पीने वालों में ये लगभग 2.50 गुना बढ़ता है। यानी बीड़ी पीने वालों में कैंसर का खतरा सिगरेट के मुकाबले 40 प्रतिशत ज्यादा रहता है। कई लोग सोचते हैं कि बीड़ी देसी है, इसलिए कम नुकसानदेह होगी, लेकिन ये सोच गलत है। बीड़ी सस्ती जरूर है, लेकिन ज्यादा खतरनाक है।
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तेंदूपत्ता संग्राहकों को राहत देना उद्देश्य, लेकिन जान का जोखिम
तेंदूपत्ते पर GST में कटौती के पीछे सरकार का उद्देश्य घरेलू बीड़ी उद्योग और लाखों तेंदूपत्ता संग्राहकों को राहत देना हो सकता है। घरेलू बीड़ी उद्योग में 60 से 70 लाख लोग काम करते हैं। इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। श्रम और रोजगार मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 40 लाख लोग सीधे तौर पर बीड़ी उद्योग से जुड़े हैं।
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क्या कोई दूसरा कारण ?
तेंदूपत्ता संग्राहकों को राहत देना तो ठीक है, लेकिन रिपोर्ट्स किसी और कारण की ओर भी इशारा कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक देश में बीड़ी बनाने वाली बड़ी कंपनियों के मालिक राजनीति में भी दबदबा रखते हैं। कहीं न कहीं ये फैसला इनडायरेक्टली उन्हें फायदा पहुंचा सकता है।
देश के टॉप बीड़ी ब्रांड
502 पटाखा बीड़ी
एक लोकप्रिय ब्रांड जो भारत में बड़े स्तर पर बिकता है। इसे अलग-अलग बीड़ी कंपनियां बनाती हैं। मुख्य रूप से ये पश्चिम बंगाल में बनता है।
गणेश बीड़ी
Mangalore Ganesh Beedi Works नाम की कंपनी प्रमुख ब्रांड है। यह कंपनी भारत में बड़ी मात्रा में बीड़ी बनाती है और इसका नेटवर्क कई राज्यों में है। Ganesh Beedi खासकर कर्नाटक और आसपास के क्षेत्र में फेमस है।
काजा बीड़ी
ये ब्रांड Kajah Beedi Company का है। कंपनी की स्थापना 1948 में Hajee A Abdul Kader Sahib ने की थी। ये ब्रांड थ्रीसर (केरल) के Rajah Group से जुड़ा है।
केरल दिनेश बीड़ी
ये एक वर्कर्स कोऑपरेटिव सोसायटी द्वारा चलाया जाता है। यानी मालिक समूह बीड़ी कारीगर हैं, न कि कोई बड़े कॉर्पोरेट। इसे Kerala Dinesh BWCCS Ltd. कहते हैं और ये मजदूरों के लिए आजीविका का स्रोत है।
मंकी बॉय और नंबर 27 बीड़ी
CeeJay Tobacco महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में बीड़ी उद्योग में काफी बड़ा नाम है। इसके 2 ब्रांड सबसे ज्यादा चलते हैं मंकी बॉय और नंबर 27 बीड़ी। सीजे ग्रुप 8 राज्यों में लगभग 50 हजार लोगों को रोजगार देता है। बीड़ी के बिजनेस में NCP के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल का परिवार पारंपरिक रूप से जुड़ा हुआ है। प्रफुल्ल पटेल के पिता, मनोहरभाई पटेल, एक व्यापारी थे और परिवार का 'सीजे ग्रुप' भारत में प्रमुख बीड़ी उत्पादकों में से एक है। उन्होंने प्रफुल्ल पटेल को 16 साल की उम्र में ही परिवार के बीड़ी व्यवसाय में शामिल कर लिया था। कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि सक्रिय राजनीति में आने के बाद प्रफुल्ल पटेल ने बीड़ी व्यवसाय से कुछ साल पहले खुद को अलग कर लिया था, लेकिन परिवार अभी भी इससे जुड़ा है। प्रफुल्ल पटेल को बीड़ी उद्योग से जुड़े होने की वजह से कई बार 'बैरोन' (Baron) भी कहा जाता है।
देसाई बीड़ी
Desai Brothers Ltd - DBL पुणे की एक प्रमुख तंबाकू और खाद्य उत्पाद निर्माता कंपनी है, जो 'मदर्स रेसिपी' ब्रांड के लिए भी जानी जाती है। इसके मालिक देसाई परिवार के सदस्य हैं जिसमें संजय देसाई, नितिन देसाई और बिमल देसाई शामिल हैं। इस कंपनी की स्थापना 1901 में स्व. हरिभाई देसाई ने की थी।
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बाजार में कई और ब्रांड भी मौजूद
श्याम बीड़ी, हावड़ा बीड़ी, आनंद बीड़ी, किशन बीड़ी, बंदरछाप बीड़ी, गोविंद बीड़ी, लंगर बीड़ी, साधू बीड़ी और नूर बीड़ी।
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