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आज का मुद्दा : इफ्तार..सियासत जोरदार ! क्या इफ्तार पार्टी में कमलनाथ की बातचीत चुनावी मुद्दा बनेगी ?

भोपाल। छिंदवाड़ा में पीसीसी चीफ कमलनाथ इफ्तार पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बातचीत करते हुए ये कह दिया कि देश में दंगे फसाद हो रहे हैं। अब इफ्तार पार्टी में उनका ये कहना प्रदेश की सियासत को गरमाने के लिए काफी था।

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Bansal News
आज का मुद्दा : इफ्तार..सियासत जोरदार ! क्या इफ्तार पार्टी में कमलनाथ की बातचीत चुनावी मुद्दा बनेगी ?

भोपाल। छिंदवाड़ा में पीसीसी चीफ कमलनाथ इफ्तार पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बातचीत करते हुए ये कह दिया कि देश में दंगे फसाद हो रहे हैं। अब इफ्तार पार्टी में उनका ये कहना प्रदेश की सियासत को गरमाने के लिए काफी था। बीजेपी ने फौरन कमलनाथ पर निशाना साधते हुए इसे वोटबैंक की राजनीति से जोड़ दिया। जाहिर सी बात है कि इस साल विधानसभा चुनाव होने है ऐसे में अल्पसंख्यकों को लुभाने की कोशिशें तो शुरू से होती आ रही हैं। हालांकि, कमलनाथ की इस बातचीत के बाद फिर से अल्पसंख्यक केंद्र में आ गए हैं तो चर्चा आज इसी पर।

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इस बात को बीजेपी ने भी लपकने में देरी नहीं

पीसीसी चीफ कमलनाथ की ये बातचीत छिंदवाड़ा में इफ्तार पार्टी में हुई। अब उनके दंगे वाले इस बात को बीजेपी ने भी लपकने में देरी नहीं की। जाहिर है कि चुनावी साल है तो अल्पसंख्यकों को लुभाने की कोशिश कांग्रेस की तरफ से भी हो रही हैं और बीजेपी की ओर से भी। हालांकि अब कमलनाथ के स्टेटमेंट ने कहीं ना कहीं बीजेपी को बैठे बिठाए एक मौका दे दिया है, जिसके जरिए वो उन्हें घेर सकें और कुछ हुआ भी ऐसा ही। सबसे पहले सीएम शिवराज सिंह ने कमलनाथ को निशाने पर लिया और कहा कि कमलनाथ डर दिखाकर वोट पाना चाहते हैं तो गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस वोटों के लिए साम्प्रदायिकता की राजनीति करती हैं।

बीजेपी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही

यूं तो अल्पसंख्यक वोटबैंक कांग्रेस का माना जाता है और इस वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए बीजेपी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही। हालांकि, कांग्रेस भी ये भलीभांति इसे समझ रही है यही वजह है कि कमलनाथ पर साम्प्रदायिकता की राजनीति के आरोपों का भी कांग्रेस ने बीजेपी पर पलटवार किया।

सियासत के मायने निकाले जाने लगे हैं

धर्म और संप्रदाय राजनीति का प्रिय विषय माने जाते हैं। कई बार सियासत भी इन्हीं के चारों तरफ घूमती हुई नजर आती हैं। इफ्तार पार्टी में कमलनाथ के बयान और उसपर हो रही सियासत के मायने निकाले जाने लगे हैं। रजानीतिक पंडित तो इसे चुनावी साल में अल्पसंख्यकों को साधने की कोशिश भी बता रहे हैं। हालांकि, अब दंगे फसाद और अल्पसंख्यकों पर केंद्रित हुई एमपी की सियासत कहां तक जोर पकड़ेगी, ये देखना भी दिलचस्प होगा।

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