गूगल की कहानी, कैसे हुई इसकी शुरुआत, कहां से आया नाम?

गूगल की कहानी, कैसे हुई इसकी शुरुआत, कहां से आया नाम?

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नई दिल्ली। हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका Google आज अपना 23वां जन्मदिन मना रहा है। किसी भी सवाल का जवाब हासिल करने के लिए हम इसका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गूगल की शुरूआत कब और कहां से हुई, इसका नाम किसने दिया? ज्यादातर लोग इस बारे में नहीं जानते होंगे। तो चलिए आज हम आपको गूगल की कहानी बताते हैं।

दो दोस्तों ने शुरू किया

गूगल की कहानी शुरू होती है साल 1995 में स्टैडफोर्ड यूनिवर्सिटी से। जहां दो पीएचडी स्टूडेंट्स लैरी पेज और सर्गे ब्रिन ने इसकी शूरूआती की थी। उन्होंने पहले Google.stanford.edu एड्रेस पर एक इंटनेट सर्च इंजन बनाया था। जिसका नाम BackRub रखा गया था। हालांकि, बाद में इसे बदल कर Google कर दिया गया। गूगल को एक कंपनी के तौर पर सितंबर 1998 में रजिस्टर कराया गया।

गूगल के नाम के पीछे की कहानी

गूगल के नाम के पीछे भी एक कहानी है। जानकारी के मुताबिक, 1920 में गणितज्ञ Edward Kasner ने अपने भांजे Milton Sirotta को एक ऐसी संख्या के लिए नाम चुनने में मदद करने के लिए कहा, जिसमें 100 शून्य मौजूद हों। ऐसे में Sirotta ने उन्हें ‘googo’ का नाम सुझाया। Kasner ने इस शब्द का इस्तेमाल करने का फैसला किया। यह शब्द साल 1940 में शब्दकोश में आ गया। Kasner ने उस साल मैथमेटिक्स एंड द इमेजिनेशन नाम से एक किताब लिखी और उस किताब में उन्होंने 100 जीरो के साथ नंबर के लिए googol शब्द का इस्तेमाल किया।

1998 में जब कंपनी की शुरुआत की गई, तो को-फाउंडर लेरी पेज और Sergei Brin ने ‘गूगल’ नाम तय किया। क्योंकि वे इंजीनियर थे और इस शब्द से अवगत थे। हालांकि, उन्होंने Googol शब्द को जैसे के तैसा नहीं लेते हुए, उसमें कुछ बदलाव करके Google कर दिया। इसके पीछे उनका मकसद दुनिया भर की जानकारी को एक जगह साथ में करना था। इसलिए उन्होंने यह नाम लिया, जो 100 जीरो को दिखाता था।

1998 में शुरू हुई थी कंपनी

गूगल ने सिलिकॉन वैली के निवेशकों का भी ध्यान अपनी तरफ खींचा। अगस्त 1998 में सन के को-फाउंडर Andy Bechtolsheim ने लेरी और सर्जी को 1 लाख अमेरिकी डॉलर का चेक दिया और गूगल इंक की आधिकारिक तौर पर शुरुआत हो गई। इस निवेश के साथ, टीम जो पहले डोर्मेटरी में काम करती थी, वह अपने पहले दफ्तर में शिफ्ट हो गई। कंपनी का पहला दफ्तर कैलिफोर्निया के सबअर्बन मैन्लो पार्क में था, जिसका मालिकाना हक Susan Wojcicki के पास था (जो अब यूट्यूब के सीईओ हैं)।

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