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27 अगस्त को सुनवाई: हिट एंड रन केस के पीड़ितों के लिए कैशलेस ट्रीटमेंट और मुआवजे की राशि के ऑनलाइन ट्रांसफर पर सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार

Hit and Run Case: पांच सालों में हिट एंड रन मामलों में 660 मौतें हुईं और 113 घायल हुए। जिनके लिए 184.60 लाख रुपये का मुआवजा वितरित किया गया।

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Rahul Sharma
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Hit and Run Case: हिट एंड रन केस में पीड़ितों को तुरंत राहत पहुंचाने के लिए कैशलेस ट्रीटमेंट और मुआवजे की राशि के ऑनलाइन ट्रांसफर पर सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा।

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मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस एजी मसीह की डबल बेंच 27 अगस्त को करेगी। हालांकि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 136ए के कार्यान्वयन के मुद्दे पर न्यायालय द्वारा 2 सितंबर को विचार किया जाएगा।

क्यों पड़ी जरुरत

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के एक दस्तावेज के अनुसार पिछले पांच सालों में हिट एंड रन मामलों में 660 मौतें हुईं और 113 घायल हुए। जिनके लिए 184.60 लाख रुपये का मुआवजा वितरित किया गया।

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वर्ष 2022 में 67,387 हिट एंड रन दुर्घटनाएं हुईं, लेकिन वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान हिट एंड रन योजना के तहत सिर्फ 205 ही क्लेम के दावे किये गए, जिनमें से 95 का निपटारा किया गया।

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क्या है हिट एंड रन मुआवजा योजना

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 161 के आदेश के अनुसार, केंद्र सरकार ने हिट एंड रन मोटर दुर्घटना के पीड़ितों के लिए मुआवजा योजना, 2022 तैयार की है, जो 1 अप्रैल, 2022 से लागू है।

इस योजना के अनुसार, यदि अपराधी वाहन की पहचान नहीं हो पाई है तो सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों और चोटों के लिए क्रमशः 2 लाख रुपये और 50,000 रुपये का मुआवजा देय है। हालांकि, इस योजना के तहत मुआवजा पाने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है।

12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने दिये थे जरुरी निर्देश

12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने हिट एंड रन केस के पीड़ितों को मुआवजा देने की निराशाजनक दर पर ध्यान दिया और कई निर्देश जारी किए, जिसमें हिट एंड रन मामले में पुलिस को पीड़ितों को योजना के बारे में सूचित करना शामिल है।

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इसके अलावा, इसने हिट एंड रन मामलों में होने वाली मृत्यु और गंभीर चोटों के लिए मुआवजे की राशि में संशोधन का सुझाव दिया। संबंधित स्थायी समिति को योजना के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने और इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कदम उठाने का भी निर्देश दिया गया।

बेंच ने मामले में ये कहा

जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने आदेश पारित किया, जिसमें कहा गया, "हिट एंड रन मोटर दुर्घटना पीड़ितों के लिए मुआवज़ा योजना, 2022 के साथ संलग्न फॉर्म III के बारे में निर्देश जारी करने होंगे, जिससे भारतीय सामान्य बीमा निगम मुआवजे के हकदार व्यक्तियों के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर सके। दूसरा मुद्दा जिस पर हमें विचार करना है, वह सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए कैशलेस ट्रीटमेंट के बारे में है।"

क्यूरी ने दिये कोर्ट को सुझाव

इस मामले में एमिक्स क्यूरी नियुक्त किए गए सीनियर एडवोकेट गौरव अग्रवाल ने न्यायालय को कुछ सुझाव दिए। अगली तारीख पर इस संबंध में आदेश पारित किया जाएगा।

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सड़क सुरक्षा के बारे में चिंता जताने वाली याचिका में सुप्रीम कोर्ट सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए कैशलेस ट्रीटमेंट के मुद्दे पर विचार करने के साथ-साथ एक सिस्टम तैयार करने के लिए तैयार है, जिससे भारतीय सामान्य बीमा निगम मुआवजे के हकदार व्यक्तियों के खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर कर सके।

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