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Solar Eclipse Fake News: आज 12:30 से 3:30 तक बंद रखें फोन, नेटवर्क ब्लास्ट का खतरा?

Solar Eclipse Fake News: सोशल मीडिया पर फिर से एक पोस्ट वायरल हो रहा है, इसरो ने कई साल पहले ही साफ कर दिया था कि यह खबर फेक है।

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Kalpana Madhu
Solar Eclipse Fake News: आज 12:30 से 3:30 तक बंद रखें फोन, नेटवर्क ब्लास्ट का खतरा?

Solar Eclipse Fake News: सोशल मीडिया पर आज फिर से एक पोस्ट वायरल हो रहा है, जिसमें कहा गया है, “आज रात 12:30 से 3:30 बजे तक कुछ कॉस्मिक किरणें पृथ्वी को पार करेंगी।” पोस्ट में कहा गया है कि लोगों को इस दौरान “अपने फोन को स्विच ऑफ” रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह शरीर के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। इसरो ने कई साल पहले ही साफ कर दिया था कि यह खबर फेक है।

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   सोशल मीडिया पर कई लोगों ने क्या लिखा है?

आज रात 12.30 से 3.30 बजे तक प्रथ्वी के पास से खतरनाक कास्मिक किरणें गुजरेंगी । कृपया आप अपने अपने मोबाइल फ़ोन स्विच ऑफ करके रखे और फ़ोन को अपने पास रखकर बिल्कुल न सोइए। अन्यथा आपको हानि पहुँच सकती हे।कृपया इस सन्देश को नजरअंदाज न करे। यदि आपको विश्वासन होतो आप गूगल पर “नासा बी बी सी न्यूज़”सर्च कर विस्तृत समाचार देख सकते हे। कृपया इस सन्देश को अन्य लोगो तक पहुचाने की कृपा करे। धन्न्यवाद

   कैसे आप भी इन्वेस्टगैट कर सकते हैं इस दावे की सच्चाई

-  वायरल मैसेज में 2 दावे किए जा रहे हैं। पहला 12:30 से 3:30 के बीच मोबाइल फोन स्विच ऑन रहने पर ब्लास्ट हो जाएगा। दूसरा मंगल ग्रह से खतरनाक कॉस्मिक-रे निकलकर पृथ्वी के पास से गुजरेंगी।

- चूंकि दावा नासा के हवाले से किया जा रहा है, इसलिए सच जानने के लिए आप नासा की वेबसाइट पर इससे जुड़ी जानकारी सर्च कर सकते हैं। काफी सर्च करने के बाद भी आपको रात 12:30 से 3:30 बजे के बीच मोबाइल स्विच ऑफ करने से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिलेगी। लेकिन इन्वेस्टिगेशन के दौरान नासा की साइट पर वायरल मैसेज के दूसरे दावे यानी कॉस्मिक-रे से जुड़ी जानकारी जरूर मिल जाएगी।

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- नासा की वेबसाइट के मुताबिक, कॉस्मिक-रे किसी भी ग्रह से नहीं बल्कि आसमान में दिखने वाले तारों से निकलती हैं। मंगल एक प्लेनेट है। ऐसे में इससे कॉस्मिक-रे निकलने का सवाल ही नहीं पैदा होता है।

- वायरल मैसेज का सच जानने के लिए आप मिनिस्ट्री ऑफ साइंस के वेबसाईट को भी आप खंगाल सकते हैं । ये वायरल मैसेज पूरी तरह से फेक है, क्योंकि मंगल से कभी भी कॉस्मिक-रे नहीं निकलती हैं। लिहाजा इससे कोई फोन ब्लास्ट नहीं हो सकता।

- बता दें,  यूनिवर्स से निकलने वाली किरणों को ही कॉस्मिक-रे कहते हैं।

   ऐसें समझ सकते हैं इस झूठे दावे का सच

सबसे पहले कॉस्मिक किरण की साइंस को समझते हैं।  यह कॉस्मिक शब्द निकला है कॉसमोस से जिसका मतलब होता है ब्रह्मांड।  कॉस्मिक मतलब ब्रह्मांड से जुड़ी हुई चीजें।  और कॉस्मिक रेज या कॉस्मिक किरणों का मतलब हो गया ब्रह्मांड के किसी पिण्ड से निकलने वाली किरणें।

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जो ग्रह होते हैं वो कोई एनर्जी सोर्स नहीं होते इसलिए इनसे कोई किरणें पैदा नहीं होती हैं। ये किरणें तारों से पैदा होती हैं। सूरज भी एक तारा ही है। हालांकि यह अपनी एनर्जी खुद ही पैदा पैदा करता है।

ये कॉस्मिक किरणें हाई एनर्जी प्रॉटोन्स होती हैं। यह भी लाइट की स्पीड से ही चलती हैं। ये दो तरीके से पैदा होती हैं। पहला सुपरनोवा की कंडीशन में। सुपरनोवा मतलब होता है तारों का विस्फोट। इस विस्फोट में भयंकर रेडिएशन पैदा होता है।

सूरज पर भी ऐसे धमाके होते रहते हैं। इन रेडिएशन्स को कॉस्मिक रेज कहते हैं। अब ये कॉस्मिक रेज ब्रह्मांड में इधर-उधर घूमना शुरू कर देती हैं।  ब्रह्मांड में पृथ्वी और दूसरे ग्रह हैं।

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जब ये कॉस्मिक किरणें पृथ्वी की तरफ आगे बढ़ती हैं तो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराकर वापस चली जाती हैं या डायवर्ट हो जाती हैं यानी इधर-उधर चली जाती हैं।

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