Soaked Pulses: क्यों और कितनी देर भिगोकर खानी चाहिए दालें, जानें सही समय

Soaked Pulses:  हमारे भोजन में दाल एक अभिन्न अंग है। कुछ लोग इसे सीधे पकाकर खा लेते तो कुछ पहले भिगोते हैं फिर इसका सेवन करते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि दालों को खाने का भी एक तरीका होता है। तो चलिए जानते हैं कि किस दाल को क्यों और कितनी देर भिगोना चाहिए।

Soaked Pulses: क्यों और कितनी देर भिगोकर खानी चाहिए दालें, जानें सही समय

नई दिल्ली। Soaked Pulses:  हमारे भोजन में दाल एक अभिन्न अंग है। life style कुछ लोग इसे सीधे health tips पकाकर खा लेते तो कुछ पहले भिगोते हैं फिर इसका सेवन करते हैं। Health Care पर क्या आप जानते हैं कि दालों को खाने का भी एक तरीका होता है। तो चलिए जानते हैं कि किस दाल को क्यों और कितनी देर भिगोना चाहिए।

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इसलिए भिगोकर खाते हैं दाल — Soaked Pulses:
विशेषज्ञों की मानें तो बीन्स और दालों को यदि सही अवधि के लिए भिगोया जाए तो उनके पोषक तत्वों के साथ—साथ पाचन क्षमता भी बढ़ जाती है। पर ऐसा नहीं है कि हर दाल को एक ही समय अवधि के लिए भिगोया जाए। आपको बता दें हर दाल को भिगोने का समय भी अलग-अलग होता है।

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बढ़ जाता है प्रोटीन — Soaked Pulses:
आपको बता दें जब दाल को भिगोया जाता है तो इससे उसमें मौजूद प्रोटीन कई गुना बढ़ जाता है। इससे न केवल आपके शरीर को मिलने वाले पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद मिलती है बल्कि एंटी-न्यूट्रिएंट फाइटिक एसिड को हटाने में भी काफी मदद करता है। साथ ही ये शरीर में कैल्शियम, आयरन और जिंक को बांधने में मददगार साबित होता है।

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बिना भिगोए दाल खाने से होते हैं ये नुकसान — Soaked Pulses:
आपको बता दें अगर दाल को भिगोकर खाने से फायदा होता है तो बिना भिगोए खाने से नुकसान भी होता है। यदि आप भी ऐसा करते हैं तो इससे शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है। जिससे पाचनशक्ति पर भी असर पड़ता है। इससे होता ये है कि पाचन क्रिया कमजोर होने लगती है।

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सभी का अलग—अलग है समय —Soaked Pulses:
आपको बता दें जानकारों के अनुसार सभी दालें समान अवधि के लिए नहीं भिगोई जाती। सभी के लिए अलग—अलग समय होता है। आइए जानते हैं सबके लिए क्या समय है। क्योंकि कुछ को 3 से 4 घंटे का समय पर्याप्त है तो वहीं कुछ को कम 8 से 10 घंटे तक भीगाना जरूरी होता है।

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दाल को भिगोकर बनाने के फायदे — Soaked Pulses Benefits 

  • यदि दाल को भिगोकर पकाया जाए तो इससे पोषक तत्वों की बढ़ोत्तरी तो होती ही है साथ ही साथ इसे पकाने में समय भी कम लगता है। इस प्रकार पोषक तत्वों के नुकसान से बचा जाता है।
  • भिगोकर खाने से एक फायदा ये भी होता है कि इससे दालों और फलियों को पचाने में आसानी हो जाती है। इससे आपको एसिडीटी में भी राहत होती है।
  • इससे फलियों में पोषक तत्वों के प्रभाव बढ़ जाता है।
  • यदि फलियों और छोलों को भिगोकर खाया जाए तो सूजन और पाचन संबंधी परेशानी की आशंका कम हो जाती है।

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किस दाल को कितनी देर भिगोना है —

दालें Pulsed 
फली, मूंग दाल, चना दाल, उड़द दाल, तुवर दाल आदि को पकाने से तकरीबन 4 से 6 घंटे पहले भिगोना चाहिए।

साबुत फलियां whole beans

साबुत फलियों की बात करें तो लोबिया, हरी मूंग दाल, कुलतीह या मोठ जैसी छोटी फलियाें को करीब 6-8 घंटे के लिए भिगोना सही माना जाता है।

बीन्स और छोले  Beans and Chickpeas

सोयाबीन, किडनी बीन्स यानी राजमा, बंगाल चना, ब्लैक बीन्स, छोले या मटर आदि बड़ी फलियों को कम से कम 8-10 घंटे तक भिगोना चाहिए।
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