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Shani Varki 2025: सावधान! 14 जुलाई से वक्री हो रहे हैं शनि, धनु-कुंभ-सिंह-मीन के लिए चार महीने अच्छे नहीं संकेत

Shani Varki 14 July 2025 Meen: 14 जुलाई से मीन राशि में वक्री हो रहे हैं शनि, धनु-कुंभ-सिंह-मीन के लिए 4 महीने कष्टकारी! shani-varki-14-july-2025-meen-me-shani-ki-vakri-chal-ka-effect-shani-ka-fal-lakshan-dhanu-kumbh-singh-meen-jyotish-upay-astrology-hindi-news-pds

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Preeti Dwivedi
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Shani Varki 14 July 2025 Meen Effect Dhanu Kumbh Singh Meen Astrology Hindi News:  जुलाई का महीना ग्रहों में बड़ा फेरबदल लेकर आने वाला है। इस महीने 7 जुलाई को गुरु उदित हो रहे हैं तो वहीं ग्रहों में सबसे ज्यादा प्रभावशाली शनि इसी महीने वक्री हो रहे हैं। सभी को उनके कर्मों का फल देने वाले शनि जुलाई में वक्री हो रहे हैं। कब तक वक्री रहेंगे, वक्री शनि का प्रभाव किन राशियों के लिए अशुभ रहेगा, वक्री शनि से किसे सतर्क रहना है चलिए जानते हैं।

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जुलाई में शनि कब वक्री हो रहे हैं (2025 me Shani kab Vakri ho Rahe hain) 

14 जुलाई को शनि की वक्री चाल शुरू हो रही है। शनि मीन राशि में वक्री होने वाले हैं जो लंबे समय के लिए जाएंगे। हिन्दू पंचांग के अनुसार शनि 18 नवंबर तक इसी स्थिति में रहेंगे। यानी चार महीने के लिए शनि की वक्र दृष्टि से सभी जातकों को सावधान रहने की जरूरत है।

शनि की ढैया किस पर चल रही है (Shani ki Adhaiya) 

वर्तमान में राशि चक्र में सिंह और धनु दो राशियां ऐसी हैं जिन पर शनि की ढ़ैया चल रही है। शनि के मीन राशि में वक्री होने पर इन राशि के जातकों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।

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शनि साढ़ेसाती किन राशियों पर चल रही है (Shani Sadhe Sati) 

ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती वर्तमान में कुंभ और मीन राशि पर चल रही है। यानी वक्री शनि इन दो राशियों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे। लेकिन चूंकि कुंभ शनि की स्व राशि भी है इसलिए इसे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

वक्री शनि का फल कैसा होता है (vakri shani ka fal)

जब शनि वक्री होते हैं तो इस दौरान वक्री शनि की दृष्टि कुछ जातकों के लिए कष्टकारी होती है। शनि की वक्री चाल होने पर वह राशि में उल्टा चले हैं और इस दौरान और अधिक बलवान हो जाते हैं। इस दौरान उनके असर से उन जातकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिन पर शनि की साढ़े साती अढ़ैया चलती है, या जिनकी राशि में शनि नीच का होता है।

शनि की नीच राशि कौन सी है (Shani ki Neech Rashi) 

ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार शनि एक अंक पर नीच का होता है। यानी राशि चक्र की पहली राशि मेष शनि की नीच राशि होती है। जिन जातकों की राशि मेष है उन्हें शनि के वक्री काल में बेहत सतर्क रहने की जरूरत है।

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शनि की उच्च राशि कौन सी है (Shani ki Uchha Rashi) 

हिन्दू धर्म ज्योतिष के अनुसार राशि चक्र की सांतवी राशि यानी तुला शनि की उच्च राशि कहलाती है। इन्हें शनि वक्री काल के दौरान भी मिलाजुला असर दिखाएंगे। यानी इसके लिए शनि ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेंगे।

शनि की स्वराशि कौन सी है (Shani ki Rashi) 

ज्योतिष के अनुसार मकर और कुंभ शनि की स्वराशियां है। यानी दो राशियां शनि की राशियां हैं। इन दो राशियों के जातकों को शनि ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।

वक्री शनि का मतलब (Vakri Shani ka Matlab) 

ज्योतिषाचार्य के अनुसार जब कोई भी ग्रह किसी राशि में उल्टी चाल शुरू कर देता है तो वो उसकी वक्री चाल कहलाती है। शनि अभी मीन राशि में विद्यमान हैं और इसी राशि में उनकी चाल जब शुरू हो जाएगी तो इसे शनि की वक्री चाल कहा जाता है।

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शनि की ढैया के लक्षण (Shani ke Lkshan) 

जब शनि की ढैया या साढ़े साती चलती है तो जातकों को मानसिक तनाव घेरने लगता है। वाहन आदि से दुर्घटनाओं का भय बना रहता है। व्यक्ति की गलतियां और उसके गलत कृत्य सबसे सामने आने लगते हैं।

शनि के उपाय (Shani ke Upay) 

हनुमान जी की उपासना (Hanuman ji ki Puja) 

शनि से पीड़ित लोगों को हनुमानजी की उपासना करने की सलाह दी जाती है। अगर आप भी शनि से पीड़ित हैं तो आपको शनिवार के दिन किसी हनुमान मंदिर में जाकर उनके दर्शन जरूर करने चाहिए। जहां तक हो सके इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ और सुंदर कांड का पाठ जरूर करें।

पीपल के पेड़ की करें पूजा (Peepal ke Ped ki Puja) 

पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है। चूंकि शनिदेव भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के भक्त हैं इसलिए शनिवार को पीपल के वृक्ष की पूजा जरूर करना चाहिए। शनिवार के दिन सूर्योदय के बाद पीपल की पूजा, जल और तेल का दीये अर्पित करता है शनि देव की कृपा हमेशा मिलती है। पीपल के पेड़ की पूजा से शनिदेव जल्द प्रसन्न होते हैं।

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शनिवार को शनि मंत्रों का जाप (Shani Mantra) 

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि मंत्र का जाप भी किया जाना चाहिए। मंत्र के साथ-साथ जहां तक हो सके शनि चालीसा का पाठ भी जरूर करें। इस दिन ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः और ॐ शं शनिश्चरायै नमः मंत्रों का जाप करने के साथ-साथ शनि मंदिर जाकर शनि चालीसा करने से भी लाभ होता है।

शनि की चीजों का करें दान (Shani ke Daan) 

चूंकि शनि ग्रह का रंग काला होता है इसलिए शनिदोष और भगवान शनि की कृपा पाने के लिए इस दिन काला तिल,काला छाता,सरसों का तेल,काली उड़द और जूते-चप्पल का दान करना शुभ माना जाता है।

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