Shani Vakri 2023: जून 2023 में शनि वक्री कब होंगे?

Shani Vakri 2023: शनि 19 जून को कुंभ राशि में वक्री हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्य के अनुसार शनि की ये वक्रत्व चाल 24 अक्टूबर तक रहेगी। इस दौरान राजनीति के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव आएंगे।

Grah Yog

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नई दिल्ली। Shani Vakri 2023: नवग्रहों में सबसे उग्र माने जाने वाले शनि अगले महीने की 19 जून को कुंभ राशि में वक्री हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्य के अनुसार शनि की ये वक्रत्व चाल 24 अक्टूबर तक रहेगी। इस दौरान राजनीति के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव आएंगे। ये हर क्षेत्र में भारी उथल—पुथल मचाएंगे।

2023 में शनि वक्री कब होंगे?

ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार शनि 19 जून को कुंभ राशि में वक्री हो जाएंगे। जो 24 अक्टूबर तक इसी राशि में वक्री रहेंगे। इस दौरान कुछ राशियां ऐसी हैं जिन्हें विशेष सावधान रहने की जरूरत है।

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किसे रहना होगा सावधान

ज्योतिषाचार्य के अनुसार जिन जातकों की कुंडली में शनि स्वराशि या उच्च राशि में हैं। उन्हें शनि की चाल से बेहद लाभ होगा। इस दौरान उनके सभी काम बनेंगे। शनि मकर और कुंभ राशि में स्वराशि में होते हैं। तो वहीं तुला राशि में उच्च के होते हैं।

इन्हें होगा लाभ

शनि के वक्री होने पर मकर, कुंभ और तुला राशि वालों को लाभ होगा। इस दौरान इन्हें राजनीति, स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों में सफलता मिलेगी।

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शनि वक्री होने से क्या होता है?

शनि के गोचर काल के दौरान राजनीति के क्षेत्र में उत्पाद मचेगा। आपको बता दें इस दौरान चुनावी सरगर्मी तेज हो जाएगी। इसलिए विधानसभा चुनाव के लिए जिन उम्मीद्वारों की कुंडली में शनि स्वराशि में या उच्च के होंगे। उन्हें लाभ के योग बनेंगे। तो वहीं जिन्हें शनि की साढ़ेसाती और अढैया चल रही है वे खास उपाय कर सकते हैं।

इन्हें चल रही साढ़े साती

मकर, कुंभ और मीन

इन पर चल रही अढ़ैया

कर्क और वृश्चिक

इतनी होती है शनि की चाल

शनि जयंती (shani jayanti 2023) पर आपको बता दें शनि की साढ़े साती, शनि की ढ़ैय्या आदि शनि दोष से पीड़ित जातकों के लिये ये दिन महत्व का है। शनि राशि चक्र की दसवीं व ग्यारहवी राशि मकर और कुंभ के अधिपति हैं। आपको बता दें पंडित राम गोविंद शास्त्री के अनुसार एक राशि पर शनि की साढ़े साती 30 महीने की और एक राशि पर अढ़ैया नौ महीने की होती है। शनि न्याय के देवता हैं। जो लोगों को उनके कर्म के अनुसार फल देते है। मान्यता अनुसार सूर्य पुत्र शनिदेव का ज्येष्ठ माह की अमावस्या को सूर्यदेव एवं छाया (सवर्णा) की संतान के रूप में शनि का जन्म हुआ।

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शनि को शुभ बनाने के उपाय

शनि (Shani) मंदिर में सरसों के तेल का दिया जलाएं।
ओम शम शनैश्चराय नमः का सामर्थ्यानुसार एक माला, तीन माला, पांच माला जाप करें।
गरीबों को साबुत उड़द का दान करें।
अपने पितरों के निमित्त दूध और सफ़ेद मिठाई मंदिर में ब्राहृमण को दें।
जरूरतमंद और बुजुर्गों को भोजन सामग्री, वस्त्र आदि दान करें।
श्रीहनुमान चालीसा का पाठ करें।
शनि की शांति के लिए रत्न धारण करें।

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नोट: इस लेख में दी गई जानकारियां सामान्य सूचनाओं पर आधारित हैं। बंसल न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता। अमल में लाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह ले लें।

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