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Shani Sade Sati: धनु, मकर और कुंभ वालों को इस समय मिलेगी शनि साढ़े साती से मुक्ति, कब से चल रही है जानें

Shani Sade Sati: धनु, मकर और कुंभ वालों को इस समय मिलेगी शनि साढ़े साती से मुक्ति, कब से चल रही है जानें shani-sade-sati-the-people-of-sagittarius-capricorn-and-aquarius-will-get-freedom-from-shani-sade-sati-at-this-time-know-how-long-it-is-going-on

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Preeti Dwivedi
Shani Ki Chal (Shani Asta )2022 : कल से अस्त हो रहे हैं शनि, इन राशियों को मिलने लगेगा शुभ फल

भोपाल। वैसे तो ब्रहृाण्ड Shani Sade Sati में मौजूद सभी नौ ग्रह व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालते हैं। लेकिन इन सब में से एक महत्व ग्रह है शनि। जिसका नाम सुनते ही लोग भयभीत हो जाते हैं। इस ग्रह की दो स्थितियां अढैया और साढ़ेसाती हैं जो लोगों के जीवन पर मुख्य रूप से प्रभाव डालती हैं। आइए आज आपको बताने जा रहे हैं किस राशि पर ये चल रही हैं और कब इन्हें इससे निजाद मिलेगी।

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इस तरह चल रहा है शनि का चरण - 
धनु राशि की बात करें तो इन पर शनि की साढ़े साती का आखिरी चरण चल रहा है। मकर राशि के जातकों पर दूसरा चरण है। तो वहीं कुंभ राशि के जातकों पर इनकी शुरुआत है। जो अभी पहला चरण रहेगा। आइए जानते हैं कि इन तीन राशि के जातकों को कब मिलेगी शनि साढ़े साती से मुक्ति।

धनु, मकर और कुंभ वालों पर शनि साढ़े साती  (Shani Sade Sati On Dhanu, Makar And Kumbh)

शनि वर्तमान में मकर राशि में गोचर कर रहे हैं। जबकि धनु, मकर और कुंभ वालों पर शनि साढ़े साती चल रही है। शनि साढ़े साती के तीन चरण होते हैं। हर चरण का अपना असर होता है। धनु राशि वालों पर इस दशा का आखिरी चरण चल रहा है। मकर वाले अभी दूसरे चरण की स्थिति में गुजर रहे हैं।

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धनु राशि —

  • इस समय से शुरू हुई है साढ़े साती —
    धनु राशि की बात करें तो इस पर शनि की साढ़े साती की शुरुआत सात वर्ष पहले 2 नवंबर 2014 में हुई थी। जिसकी अवधि अब समाप्त होने वाली है। अब ऊपर शनि साढ़े साती अब अपने अंतिम चरण में है।
  •  इस समय मिलेगी मुक्ति —
    करीब 5 माह बाद 29 अप्रैल 2022 को शनि के कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। जिसके बाद धनु राशि के जातकों को शनि की दशा से मुक्ति मिल जाएगी। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो शनि जब भी उ​तरती यानि आखिरी स्थिति या चरण में होते हैं तो जातकों को कुछ न कुछ लाभ देकर जाते हैं।

मकर राशि —

  • इस समय से शुरू हुई है साढ़े साती —
    मकर राशि की बात करें तो इन पर शनि की साढ़े साती 26 जनवरी 2017 से शुरु हुई थी। इस राशि पर अभी शनि साढ़े साती का दूसरा चरण चल रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित राम गोविन्द शास्त्री के अनुसार साढ़ेसाती का दूसरा चरण कष्टदायी माना जाता है। ये समय संभलकर चलने का है। इस दौरान हर कार्य में सावधानी रखने की जरूरत है। आपको हर कार्य में संयम के साथ कार्य करने की जरूरत है।
  • इस समय मिलेगी मुक्ति -
  • मकर राशि वालों को शनि साढ़े साती से मुक्ति के लिए अभी करीब साढ़े तीन वर्ष का इंतजार और करना पड़ सकता है। इन्हें 29 मार्च 2025 में मिलेगी। इस समय शनि कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे।

कुंभ राशि —

  • इस समय से शुरू हुई है साढ़े साती —कुंभ राशि के जातकों की बात करें तो इन्हें शनि साढ़े साती की शुरुआत पिछले वर्ष 24 जनवरी 2020 में हुई थी। अभी इस राशि के जातकों पर इसका पहला चरण चल रहा है।
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  • इस समय मिलेगी मुक्ति  -

     आपको शनि के प्रकोप से मुक्ति के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा। 3 जून 2027 में शनि जब कुंभ से मीन में प्रवेश करेंगे तभी इस राशि के जातकों को मुक्ति मिलेगी। शनि साढ़े साती से छुटकारा मिल जाएगा। 2027 तक इस राशि के जातकों को अपने हर काम में बेहद ही सावधानी बरतनी होगी। बेवजह के वाद-विवाद में फंसने से बचें। आपको किसी पर भी आसानी यकीन न करने की सलाह दी जा रही है।

  • शनि के स्थान पर निर्भर करता है इसका प्रभाव —
    ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविन्द शास्त्री के अनुसार शनि अच्छे व बुरे, दोनों प्रकार के प्रभाव डालता है। ये दोनों प्रभाव हमारी कुंडली में बैठे शनि के स्थान पर निर्भर करता है। जब यह 7 अंक यानि तुला राशि पर होता है तो यह उच्च का होता है। उच्च का श​नि होने पर सबसे अच्छा फल देता है। उस समय यह धन, राज्य और यश प्राप्त कराता है। अपनी राशि मकर और कुंभ में होने पर साधारण फल देता है। जब यह 6, 8 ,12 भाव में होता है तो क्रमश: रोग, कष्ट और धन व्यय कराता है। शनि की दशा से सभी को सावधान रहने की जरूरत है। 27 मई को शनि वक्री हो रहा है। ​इसके बाद और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

ऐसे समझें साढ़े साती और अढ़ैया —
शनि की साढ़े साती 7.5 वर्ष की होती है। यह तीन 2.5 के तीन भागों में विभाजित होती है। जिससे कुल मिलाकर 7.5 वर्ष होते हैं। शुरू के 2.5 वर्ष यह सिर पर, उसके बाद 2.5 वर्ष पेट पर और अंतिम 2.5 वर्ष पैर पर होती है। ज्योतिषियों की माने तो उतरती हुई साढ़ेसाती शुभ फल देकर जाती है। इसी तरह अढ़ैया भी 2.5 वर्ष की होती है जो तीन भागों में विभाजित होकर क्रमश सिर, पेट और पैर पर होती है।

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