हाइलाइट्स
- शहडोल में ड्राई फ्रूट और फोटो कॉपी के बाद ईंट घोटाला।
- 2500 ईंटों की खरीद के लिए 1.25 रुपए लाख का भुगतान।
- बिल सोशल मीडिया पर वायरल, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश।
Shahdol Brick Scam 2025: मध्यप्रदेश से भ्रष्टाचार के एक से बढ़कर एक मामले सामने आ रहे हैं, जिन्हें सुनकर माथा घूम जाए। शहडोल में स्कूल पेंट घोटाले, ड्राई फ्रूट घोटाले का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब अब फोटो कॉपी और ईंट घोटाले ने सभी को हैरान कर दिया है। यहां मात्र 2 पेज की फोटोकॉपी के लिए 4 हजार रुपए तो ढाई हजार ईंटों के लिए 1.25 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया। घोटालेबाजों के हौसले इतने बुलंद हैं कि सरकारी बिलों में जमकर हेराफेरी हो रही है। अब ईंट घोटाले से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया है। कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं। अब जिले की पंचायतें अब लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार की वजह से सुर्खियों में हैं।
शहडोल में घोटालों की लगी झड़ी, 2.5 हजार ईंटों की कीमत 1.25 लाख, 2 पन्ने फोटो कॉपी की कीमत 4 हजार#Shahdol #Scams #Corruption #ElectionsFraud #OverchargedGoods #GovernmentScams pic.twitter.com/ycMsqsJoxr
— Bansal News Digital (@BansalNews_) August 30, 2025
जानें क्या है पूरा फर्जीवाड़ा
भ्रष्टाचार के मामलों में सुर्खियां बटोर रहा शहडोल जिला एक बार फिर चर्चा में है। जिले की पंचायतों में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि हर कुछ दिनों में कोई न कोई नया और चौंकाने वाला मामला सामने आ रहा है। इस बार भ्रष्टाचार का नया मामला बुढ़ार जनपद की ग्राम पंचायत भटिया से सामने आया है। जहां ढाई हजार ईंटों के नाम पर एक लाख पच्चीस हजार रुपये का बिल पास कर दिया गया, और अब यह कारनामा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है।
ऐसे किया गया ईंटों की खरीदी में घोटाला
जनपद पंचायत बुढ़ार की ग्राम पंचायत भटिया में हुए ईंटों की खरीदी में घोटाला का बिल सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल भ्रष्टाचार के इस बिल के मुताबिक, महज ढाई हजार ईंटों को खरीदने के नाम पर एक लाख पचीस हजार रुपए का बिल पास कर भुगतान कर दिया गया। बिल में साफ तौर पर लिखा गया है कि चेतन प्रसाद कुशवाहा, ग्राम परिबहरा के नाम से 2500 ईंटों को भाड़ा सहित 5 रुपये प्रति ईंट की दर से खरीदा गया, लेकिन कुल भुगतान 1.25 लाख रुपये दिखाया गया,इस पर भटिया ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव दोनों के हस्ताक्षर और सील लगी हुई है।
अब तक सामने आ चुके हैं ये बड़े घोटाले
यह कोई पहला मौका नहीं है जब शहडोल की पंचायतें और विभाग फर्जी बिल पास कर सरकारी खजाने पर डाका डाल रहे हों। इससे पहले,एक स्कूल में महज 4 लीटर पेंट से पुताई दिखाकर 168 मजदूर और 68 राजमिस्त्रियों का बिल बनाकर 1.07 लाख रुपए निकाले गए थे, जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत एक घंटे की चौपाल में 14 किलो ड्राई फ्रूट, 6 लीटर दूध और 5 किलो शक्कर का बिल पास किया गया था।
हाल ही में ग्राम पंचायत कुदरी से दो पन्नों की फोटोकॉपी का 4000 रुपए का बिल पास होने का मामला भी सामने आया था, और अब पंचायतों का नया कारनामा, महज ढाई हजार ईंटों को एक लाख पचीस हजार रुपए में खरीदने का घोटाला, ये मामले साबित करते हैं कि जिम्मेदारी अधिकारी मिलीभगत कर सरकारी राशि का बंटरबांट कर रहे हैं।
मामले में कलेक्टर ने क्या कहा?
अब मामले में शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा कि “स्थानीय स्तर पर 1000 ईंटें लगभग 6 से 7 हजार रुपये में मिल जाती हैं, यानी बिल में दर्शाया गया ईंट का मूल्य सही प्रतीत होता है। हो सकता है मात्रा लिखते समय कोई तकनीकी त्रुटि हुई हो, संभव है कि एक शून्य अधिक या कम हो गया हो।”
उन्होंने आगे कहा, “हमने एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि वे जनपद सीईओ के साथ मिलकर मामले की गहराई से जांच करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि यह पूरा प्रकरण इतनी जल्दबाजी में क्यों और कैसे निपटाया गया।”
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घोटालों की झड़ी से जनता हैरान
अब जिले में एक के बाद एक सामने आ रहे घोटालों ने जनता को हैरानी में डाल दिया है। मान लिया जाए कि ईंटों के बिल में किसी कारण से एक शून्य ज्यादा जुड़ गया हो, लेकिन फिर यह सवाल उठता है कि ग्राम पंचायत सचिव और सरपंच ने इस बिल को बिना जांचे कैसे पास कर दिया? और अगर यह महज मानवीय गलती थी, तो फिर कलेक्टर को जांच के आदेश क्यों देने पड़े?
इतना ही नहीं, यदि ईंटों के मामले को मानवीय त्रुटि मान भी लिया जाए, तो फिर महज दो पेज की फोटोकॉपी के लिए 4000 रुपये का बिल पास किया जाना कैसे जायज ठहराया जा सकता है? यह दर्शाता है कि मामला केवल एक गलती का नहीं, बल्कि सिस्टम में गहरी गड़बड़ी का संकेत दे रहा है।
इस खबर से जुड़े 5 महत्त्वपूर्ण FAQs
1. ईंट घोटाले में क्या मामला हैं?
उत्तर: शहडोल जिले की भटिया ग्राम पंचायत में सिर्फ 2,500 ईंटों की खरीद पर ₹1.25 लाख रुपये का बिल पास कर भुगतान कर दिया गया। जबकि वास्तविक दर के अनुसार इतनी ईंटों की कीमत 12 से 15 हजार रुपए होनी चाहिए थी।
2. क्या यह पहले भी जिले में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं?
उत्तर: यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले शहडोल में स्कूल पेंट घोटाला, ड्राय फ्रूट चौपाल खर्च, और 2 पेज की फोटोकॉपी पर ₹4000 का बिल जैसे कई फर्जीवाड़े सामने आ चुके हैं।
3. ईंटों के बिल में ‘शून्य अधिक’ जुड़ने की बात कितनी सच्ची है?
उत्तर: कलेक्टर डॉ. केदार सिंह का कहना है कि संभवतः मात्रा लिखते समय एक शून्य गलती से जुड़ गया हो। हालांकि, यह तर्क कमजोर इसलिए लगता है क्योंकि बिल पर सरपंच और सचिव के हस्ताक्षर भी हैं, और इसे जांचे बिना पास कर भुगतान कर दिया गया।
4. मामले में प्रशासन ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
उत्तर: कलेक्टर ने एसडीएम को जांच के आदेश दिए हैं, साथ ही सीईओ जनपद को बैठक कर पूरे प्रकरण की समीक्षा करने को कहा गया है। जांच जारी है, लेकिन अब तक किसी पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई है।
5. क्या इन घोटालों से जुड़े दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद है?
उत्तर: प्रशासन ने जांच की बात कही है, लेकिन पूर्व के घोटालों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए जनता आशंकित है कि कहीं यह जांच भी सिर्फ औपचारिकता बनकर न रह जाए।