अजय सिंह ने बीजापुर पुलिस पर लगाया सनसनीखेज आरोप

युवा आयोग के पूर्व सदस्य अजय सिंह ने बीजापुर पुलिस पर लगाया सनसनीखेज आरोप

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बीजापुर। युवा आयोग के पूर्व सदस्य अजय सिंह ने आज एक प्रेस वार्ता कर बीजापुर पुलिस पर गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाया। अजय सिंह ने अपने आरोपों में रोजनामचे का गलत इस्तेमाल और भैरमगढ़ थाने में व्यापारियों से उगाही करने की बात कही।

अजय सिंह ने कहा, “विधायक के दबाव में आकर एसपी ने मेरे और मेरे अंगरक्षकों के खिलाफ रोजनामचे का गलत इस्तेमाल कर फर्जी और तथ्यहीन रोजनामचा रिपोर्ट तैयार किया है, ताकि मेरी सुरक्षा हटाई जा सके।“

उन्होंने कहा, “विधायक विक्रम मण्डावी के इशारे पर एसपी आंजनेय वार्ष्णेय मेरी सुरक्षा हटाने के लिए षणयंत्र रच रहे हैं।” अजय सिंह ने प्रेस वार्ता में विधायक विक्रम मण्डावी पर आरोप लगाते हुए कहा कि विधायक सत्ता का दुरूपयोग कर रहे हैं और पुलिस अधीक्षक पर दबाव बनाते हुए कलेक्टर और मेरी सुरक्षा को वापस लेने की रणनीति तैयार कर रहे है, ताकि मेरी हत्या की जा सके।

उन्होंने कहा यह भी कहा कि मुझे ये सुरक्षा केंद्र सरकार से सलवा जुडूम के समय नक्सलियों के खिलाफ मुकर होकर आंदोलन चलाने के दौरान मेरी जान के खतरे को देखते हुए सरकार से मिली थी। मैने आज तक उस सुरक्षा का दुरुपयोग नही किया औरे प्रशासन के नियमों को ध्यान रखा।

आगे उन्होंने बताया कि मैंने हमेशा सुरक्षा बलों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा। मेरे द्वारा लगातार बुरजी, गोरना और सिलगेर में धरना पर बैठ प्रदर्शन कर रहे आदिवासी ग्रामीणों के बीच जाने की मांग की गई। हालांकि खतरा बताते हुए मुझे रोका जा रहा है, जबकि विधायक विक्रम पर गंगालूर दौरे के दौरान नक्सली हमले के बावजूद लगातार उन्हें सिलगेर सहित अंदरूनी क्षेत्रो में जाने दिया जा रहा है। आखिर उनको पुलिस प्रशासन कैसे सुरक्षा दे रही है?

भैरमगढ़ थाने में उगाही का आरोप

वही दूसरी ओर अजय सिंह ने भैरमगढ़ एसडीओपी ( Sub Divisional Police Officer) और पूर्व टीआई (Town Inspector) पर व्यापारियों से पैसा उगाही का भी आरोप लगाया है। अजय सिंह का आरोप है कि कुछ दिनों पहले भैरमगढ़ एसडीओपी (Sub Divisional Police Officer) तारेश साहू द्वारा जबरन 6 व्यापारियों को नक्सल के मामले में फंसाने के नाम पर 12 लाख रुपयों की मांग की गयी थी। बाद में एक लाख बीस हजार की वसूली की गयी और उसी दिन एक पंचायत सचिव को भी परेशान कर 50 हजार की वसूली भी की गयी।

उन्होंने बताया कि एक सोसाइटी संचालक को भी परेशान कर 7 लाख की मांग की गई, फिर 2 लाख पर सहमति बनती है और सोसायटी संचालक अपने घर के गहने गिरवी रख एक लाख एसडीओपी देकर पुलिस से पीछा छुड़वाता है।

उन्होंने बताया कि इस तरह से कई व्यापारीयों एंव ग्रामीणों को एसडीओपी द्वारा प्रताड़ित किया गया। एसडीओपी के इस रवैये से भैरमगढ़ के व्यापारी एंव ग्रामीण परेशान है। इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक को भी की गई। उन्होने जांच कर सही पाया पर आज तक कोई कार्यवाही नही की गई।

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