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Russo-Ukraine War In Jyotish: जानें ज्योतिष की नजर से, कब समाप्त होगा रूस-यूक्रेन युद्ध

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Bansal News
Russo-Ukraine War In Jyotish: जानें ज्योतिष की नजर से, कब समाप्त होगा रूस-यूक्रेन युद्ध

नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच Russo-Ukraine War In Jyotish चल रहे युद्ध को लेकर सभी इस सोच Astrology में पड़े है कि युद्ध bansal dharam news कब समाप्त होंगे। भारत में बढ़ रही महंगाई के लिए भी सरकार रूस और यूक्रेन को जिम्मेदार मान रही है। सभी चाहते हैं कि महंगाई कम हो। इसके लिए जरूरी है कि युद्ध भी रुके। एक—एक करके तीन महीने होने को आए हैं, लेकिन युद्ध समाप्त होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल पांडे के अनुसार उनका गणित क्या कहता है। साथ ही जानते हैं कि युद्ध समाप्त कम होगा।

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कब समाप्त होगा युद्ध —
ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल पांडे के अनुसार पहली प्रश्न कुंडली तुला लग्न की है। लग्न में केतु विराजमान है। पांचवे भाव में शनि है। छठे भाव में मंगल और गुरु हैं। सातवें भाव में शुक्र चंद्रमा और राहु है। सातवें भाव में सूर्य और वक्री बुध है। बाकी सभी भाव खाली है।
युद्ध हमेशा दो पक्षों के बीच होता है। अतः लग्न और सप्तम भाव के बारे में विचार करना आवश्यक है। शत्रु का विचार छठे भाव से किया जाता है। अतः छठे भाव के बारे में विचार किया जावेगा। अष्टम भाव से मृत्यु का विचार किया जाता है और युद्ध के दौरान काफी मृत्यु होती है।
अष्टम भाव का भी विचार किया जाना चाहिए। नवम भाव भाग्य का होता है। दशम भाव राज्य का होता है अतः इन दोनों भावों के बारे में भी देखना पड़ेगा। इन सबसे ऊपर तृतीय भाव पराक्रम का होता है। जिस पर भी हमें विचार करना होगा। इस प्रकार हम कह सकते हैं की प्रथम भाव अर्थात लग्न, तृतीय भाव, छठा भाव, सातवें भाव, आठवां भाव, नवा भाव और दशम पर विचार करना होगा।

युद्ध समाप्ति के लिए कौन से कारक हैं जिम्मेदार —
युद्ध की समाप्ति के लिए आवश्यक है दशा अंतर्दशा प्रत्यंतर दशा अच्छे शुभ ग्रहों की के हो। लग्न बहुत मजबूत हो। प्रथम भाव में केतु बैठा हुआ है। जिसकी दृष्ट पांचवें सातवें और नवम भाव पर है। प्रथम भाव के लिए केतु को मजबूत नहीं माना जाता है। परंतु यह बहुत खराब भी नहीं है और एक शुभ ग्रह है। लग्न का स्वामी शुक्र सप्तम भाव में बैठकर उसको देख रहा है। इसके अलावा छठे भाव में बैठा मंगल भी उसको देख रहा है। अतः हम लग्न को बलवान मान सकते हैं।
तृतीय भाव कोई ग्रह नहीं है। उस पर राहु की दृष्टि है। जोकि पराक्रम भाव को कमजोर करेगा। इसका अर्थ यह है कि राहु की दशा और अंतर्दशा आने पर युद्ध की विभीषिका में कमी आएगी। छठे भाव में मंगल और गुरु बैठे हुए हैं। मंगल अपने मित्र के घर में हैं और गुरु अपने स्वयं के घर में। परंतु छठे भाव में बैठे होने के कारण गुरु का फल कोई अच्छा नहीं होगा। सातवें भाव में सम राशि में शुक्र और चंद्रमा तथा राहु विराजमान है। आठवें भाव अर्थात मृत्यु के भाव में सूर्य और वक्री बुध है। दोनों ही कमजोर हैं। इनकी दशा और अंतर्दशा में युद्ध शांत नहीं होगा। नवम भाव में कोई ग्रह नहीं है। इसका स्वामी बुध है जो कि कमजोर है। अतः परिस्थितियां अनुकूल नहीं है। इस पर केतु की दृष्टि है जो थोड़ा असर डाल सकती है। दशम भाव का स्वामी चंद्रमा केंद्र में बैठा हुआ है और अपनी सम राशि में है। अतः युद्ध समाप्त करने के लिए इनका कोई उपयोग नहीं है।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार यह युद्ध तब समाप्त होगा, जब कुछ अच्छे और मजबूत ग्रह एक साथ विंशोत्तरी दशा में आएंगे। षड्बल साधना के अनुसार इस कुंडली में सबसे मजबूत ग्रह शनि है। अतः शनि की अंतर्दशा आने पर युद्ध में परिवर्तन होगा। शनि की अंतर्दशा दशा 13 अक्टूबर 2022 से प्रारंभ हो रही है। जो कि 17 दिसंबर 2022 तक रहेगी।

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क्या कहता है गोचर —
अब हम गोचर पर गौर करते हैं। 7 दिसंबर 2022 के गोचर को देखने से प्रतीत होता है कि इस समय आते आते युद्ध में बहुत ही कमी आ जाएगी अर्थात युद्ध समाप्त तो नहीं होगा परंतु करीब-करीब समाप्त हो जाएगा। अतः हम कह सकते हैं कि 17 अक्टूबर 2022 से युद्ध की विभीषिका में कमी आना प्रारंभ हो जाएगी। जोकि 17 दिसंबर 2022 आते आते बहुत कम हो जाएगा।

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कब समाप्त होगा रूस और यूक्रेन का युद्ध
इसकी भी प्रश्न कुंडली बनाई गई। इसके चतुर्थ भाव में केतु, आठवें भाव में मंगल और शनि नवम भाव में शुक्र और गुरु, दशम भाव में राहु चंद्र और सूर्य है। ग्यारहवें भाव में बुध है। पूर्व में दिए गए गणना के अनुसार तृतीय भाव का मालिक बुध है जो एकादश भाव में मित्र ग्रह की राशि में है। निश्चित रूप से काफी बलवान है। छठे भाव में कोई ग्रह नहीं है और इसका स्वामी गुरु अपनी स्वयं की राशि में नवम भाव में है। सातवें भाव में कोई ग्रह नहीं है। सातवें भाव का स्वामी शनि अष्टम भाव में अपनी स्वयं की राशि में है। अष्टम भाव में मंगल अपनी मित्र राशि में है तो शनि अपनी स्वराशि में है। नवम भाव में उच्च का शुक्र और स्व राशि का गुरु है। दशम भाव में राहु अपने शत्रु की राशि में, चंद्रमा अपनी सम राशि में तथा सूर्य अपनी उच्च की राशि में है।

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सूर्य और राहु में करीब 12 डिग्री का अंतर है। अतः ग्रहण दोष बहुत ज्यादा प्रभावशाली नहीं है। एकादश भाव में अपने मित्र राशि में बुध है। दशम भाव को शनि अपनी नीच दृष्टि से देख रहा है। इस कुंडली में भी शुक्र की महादशा में शनि की अंतर्दशा में शनि का प्रत्यंतर 16 नवंबर 2022 से 18 मई 2023 तक है। इस अवधि में इस बात की पूरी संभावना है कि यूक्रेन को अमेरिका आदि देशों से मदद मिलने में कमी आए। परंतु इस बात की भी संभावना है की भाग्य के कारण यूक्रेन को कोई दूसरी मदद मिले। यह बात निश्चित है 16 नवंबर 2022 से 18 मई 2023 के बीच में इस युद्ध के अंत होने की नहीं बल्कि करीब-करीब शांत होने के आसार हैं।

अगर हम सूक्ष्म दशा की तरफ जाएं तो शुक्र की महादशा में शनि के अंतर में शनि के प्रत्यंतर में शनि की सूक्ष्म दशा 16 नवंबर 2022 से 15 दिसंबर 2022 तक है। उसके उपरांत बुद्ध केतू और शुक्र की सूक्ष्म दशाएं हैं। दोनों प्रश्न कुंडलियों का विचार करने के उपरांत हम कह सकते हैं कि 16 नवंबर 2022 से 20 फरवरी 2023 के बीच या युद्ध लगातार कम होता जाएगा तथा 20 फरवरी 2023 से 1 मार्च 2023 के बीच में युद्ध समाप्त तो नहीं होगा। परंतु इसका असर तकरीबन समाप्त हो जाएगा।

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