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Road Accident Law : रोड एक्सीडेंट में कानून की नजर में कौन सही कौन गलत?

Road Accident Law : रोड ऐक्सिडेंट में कानून की नजर में कौन सही कौन गलत? Road Accident Law Who is right and who is wrong in the eyes of law in road accident vkj

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deepak
Road Accident Law : रोड एक्सीडेंट में कानून की नजर में कौन सही कौन गलत?

Road Accident Law : देश में रोजाना सड़क हादसों (Road Accident Law) की खबरे आती रहती है। सड़क हादसे में हुई मौत के मामले में पुलिस लापरवाही से मौत का मामला दर्ज करती है। लेकिन क्या आपको पता है कि रोड ऐक्सिडेंट में कानून (Road Accident Law) की नजरों में कौन सही होता है और कौन गलत होता है। आज हम आपको इस खबर के माध्यम से यही बताने जा रहे है कि सड़क हादसे में कानून (Road Accident Law) की नजर में कौन होता है अपराधी?

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सड़क हादसे (Road Accident Law) के मामले में सबसे पहले यह देखना जरूरी होता है कि पुलिस कौन सा मामला दर्ज कर रही है। कानूनी जानकारों की माने तो सड़क हादसे के मामले में अगर मौत हो जाए तो पुलिस आईपीसी की धारा-304 ए और लापरवाही से गाड़ी चलाना यानी आईपीसी की धारा-279 के तहत मामला दर्ज करती है। धारा-279 तब लगाई जाती है जब ड्राइवर ने लापरवाही से गाड़ी चलाई हो इस धारा के तहत दोषी पाए जाने वाले को कम से कम 6 महीने की कैद हो सकती है। हालांकि ये धारा जमानती होती है।

वही अगर लापरवाही से गाड़ी चलाने से किसी की मौत हो जाए, तो धारा-304 ए के तहत मामला दर्ज किया जाता है। जिसमें दोषी पाए जाने वाले को अधिकतम दो साल तक की कैद हो सकती है। यह धारा भी जमानती होती है। और अगर कोई हादसे में जख्मी हो जाए, आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा-337 और आईपीसी की धारा-338 के तहत मामला दर्ज किया जाता है। धारा-337 में दोषी पाए जाने वाले को अधिकतम 6 महीने की कैद, जबकि धारा-338 में अधिकतम 2 साल कैद की सजा का प्रावधान है।

सड़के हादसे में ट्रैफिक नियमाें का क्या है रोल

कानूनी जानकार के अनुसार लापरवाही से हुई मौत के मामले में पुलिस उस ड्राइवर के खिलाफ केस दर्ज करती है, जिसकी लापरवाही से मौत हुई हो। अगर किसी सख्श की किसी की गाड़ी की टक्कर से मौत हो जाए, तो पुलिस इस मामले में यह देखती है कि टक्कर मारने वाली गाड़ी के ड्राइवर की कितनी गलती है। ऐसे मामले में धारा-304 ए का केस बनता है। अगर टक्कर मारने वाली गाड़ी ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए चल रही हो, ग्रीन लाइट होने पर चौराहा पार कर रही हो और इस दौरान किसी और गाड़ी सामने आ जाए और हादसा हो जाए यानी रेड लाइट नियम तोड़कर सामने आ जाए तो रेड लाइट जंप करने वाले ड्राइवर की गलती मानी जाएगी। इसके उलट अगर टक्कर मारने वाली गाड़ी के ड्राइवर ने रेड लाइट जंप की और उसकी लापरवाही से दूसरी गाड़ी को टक्कर लगे और उसके ड्राइवर या उसमें सवार शख्स की मौत हो जाए या कोई जख्मी हो जाए, तो टक्कर मारने वाले ड्राइवर की जिम्मेदारी बनेगी। वही ऐसे मामलों में पुलिस चश्मदीद गवाहों से पूछताछ करती है, सीसीटीवी खंगालती है। इसके बाद ही आरोपी ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज किया जाता है।

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