RBI: बैंक ने ऑडिट कंपनी हरिभक्ति एंड कंपनी पर लगाया दो साल का प्रतिबंध, जानिए क्यों?

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में मंगलवार को देश की शीर्ष ऑडिट कंपनियों में से एक हरिभक्ति एंड कंपनी एलएलपी को एक अप्रैल, 2022 से शुरू होने वाली दो साल की अवधि में विनियमित इकाइयों के लिए किसी भी प्रकार का ऑडिट से जुड़ा काम करने से प्रतिबंधित कर दिया। हरिभक्ति एंड कंपनी एलएलपी श्रेई इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड (एसआईएफएल) की ऑडिटर थी जिसके निदेशक मंडल को केंद्रीय बैंक ने हटा दिया है।

कंपनी के खिलाफ पिछले हफ्ते दिवाला प्रक्रिया शुरू की गयी है। श्रेई ने 19 सितंबर, 2020 को आयोजित 35वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के समापन के साथ काम करना बंद कर दिया था। केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि उसने रिजर्व बैंक द्वारा व्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के वैधानिक ऑडिट के संबंध में जारी एक विशिष्ट निर्देश का पालन न करने के लिए कंपनी के खिलाफ यह कार्रवाई की है। यह पहली बार है कि रिजर्व बैंक ने किसी व्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण एनबीएफसी के ऑडिटर के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की है।

बयान के मुताबिक, ‘भारतीय रिजर्व बैंक ने रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45एमएए के तहत निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, 23 सितंबर, 2021 के एक आदेश द्वारा मेसर्स हरिभक्ति एंड कंपनी एलएलपी, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (आईसीएआई कंपनी पंजीकरण संख्या 103523डब्ल्यू/ डब्ल्यू100048) को एक अप्रैल, 2022 से दो साल की अवधि के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा विनियमित किसी भी इकाई में किसी भी प्रकार का ऑडिट संबंधी काम करने से प्रतिबंधित कर दिया है।’ भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के इस प्रावधान के तहत पहली बार इस तरह का प्रतिबंध लगाया गया है।हालांकि यह वित्त वर्ष 2021-22 में केंद्रीय बैंक द्वारा विनियमित संस्थाओं में हरिभक्ति एंड कंपनी एलएलपी के ऑडिट संबंधी काम को प्रभावित नहीं करेगा।

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