राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक किशोरी के गर्भपात के अनुरोध संबंधी अर्जी पर सुनवाई की

जोधपुर, 29 दिंसबर (भाषा) राजस्थान उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक ऐसे व्यक्ति की अर्जी पर सुनवाई की, जो अपनी किशोरवय बेटी का 21 माह का गर्भ गिरवाना चाहता है।

यौन शोषण के एक अन्य मामले में राज्य बाल अधिकार आयोग ने 12 साल की एक लड़की द्वारा यहां सरकारी अस्पताल में एक बच्चे को जन्म देने के संबंध में पुलिस से रिपोर्ट मांगी है।

न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने मंगलवार को शीतकालीन अवकाश के दौरान 17 वर्षीय एक किशोरी की याचिका पर सुनवाई की और एक अस्पताल के मेडिकल बोर्ड को अगली सुनवाई की तारीख 31 दिसंबर को गर्भपात के बारे में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।

इस किशोरी को जनवरी, 2020 में उसका एक रिश्तेदार कथित रूप से फुसलाकर तेलंगाना ले गया, जहां उसने एक मंदिर में उसके साथ ब्याह रचा लिया।

पुलिस ने किशोरी के पिता की शिकायत पर तेलंगाना में लड़की के होने का पता लगाया।

याचिकाकर्ता के वकील एम एम धेरा के अनुसार लेकिन लड़की ने अपने माता-पिता के साथ जाने से इनकार कर दिया, तब उसे एक आश्रय गृह भेजा गया, जहां वह गर्भवती पायी गयी।

धेरा के मुताबिक बाद में वह पिता एवं भाई से मिलने के बाद घर जाने को राजी हुई और उसने यह विचार करते हुए गर्भपात की इच्छा जतायी कि यह उसके बच्चे के लिए एक दाग होगा। उसके बाद उसके पिता उच्च न्यायालय पहुंचे।

ऐसे ही एक अन्य मामले में राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सोमवार रात को यहां एक सरकारी अस्पताल में 12 साल की लड़की द्वारा एक बच्चे को जन्म देने के बाद अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नागरिक अधिकार), पुलिस महानिरीक्षक (जोधपुर रेंज) और पुलिस अधीक्षक (जोधपुर ग्रामीण) से रिपोर्ट मांगी।

इस लड़की का उसके एक पड़ोसी ने ही कथित रूप से यौन शोषण किया था। सोमवार को उसने पेटदर्द की शिकायत की , तब उसकी मां उसे अस्पताल ले गयी जहां उसने एक शिशु को जन्म दिया। लड़की के अनुसार उसका एक साल से यौन शोषण किया जा रहा था।

भाषा

राजकुमार दिलीप

दिलीप

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