Harda Factory Blast Victims: पीड़ितों को देना है 12 करोड़ मुआवजा, फैक्ट्री मालिक की संपत्ति 9 करोड़; कैसे निकलेगा तोड़?

Harda Factory Blast Victims: पीड़ितों को दिये जाने वाले मुआवजा और पटाखा फैक्ट्री मालिक की संपत्ति की वेल्यूवेशन में बहुत बड़ा अंतर है।

Harda Factory Blast Victims: पीड़ितों को देना है 12 करोड़ मुआवजा, फैक्ट्री मालिक की संपत्ति 9 करोड़; कैसे निकलेगा तोड़?

   हाइलाइट्स

  • एमपी के हरदा जिले में बैरागढ़ की पटाखा फैक्ट्री में हुआ था हादसा
  • हादसे में 13 लोगों की मौत और 180 लोग हुए थे घायल
  • 50 से ज्यादा परिवार हादसे की वजह से हो गए हैं बेघर

Harda Factory Blast Victims: मध्य प्रदेश में हरदा जिले के बैरागढ़ स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के जख्म अभी भी गहरे हैं। इस हादसे से कईयों ने अपनो को खो दिया। वहीं कई लोगों का उपचार अभी भी चल रहा है।

घटना से कई लोग बेघर हो गए हैं। पीड़ितों को मदद (Harda Factory Blast Victims) पहुंचाने के लिए प्रशासन पटाखा फैक्ट्री मालिक की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई कर रहा है, लेकिन इसमें एक पेंच फंस गया है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने मुआवजे की जो न्यूनतम राशि निर्धारित की है और पटाखा फैक्ट्री मालिक की संपत्ति की जो वेल्यूवेशन निकलकर सामने आ रही है उसमें बहुत बड़ा अंतर है।

ऐसे में प्रशासन के सामने एनजीटी के आदेश के आधार पर पीड़ितों को मुआवजे की राशि देने में दिक्कतें आएंगी।

   पहले एनजीटी का आदेश जान लीजिए

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हरदा में हुए ब्लास्ट हादसे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल NGT ने आदेश जारी कर कहा कि इस हादसे में न्यूनतम राहत देने की जरूरत है। इसका फैक्ट्री मालिक तत्काल भुगतान कर पीड़ितों को मुआवजे (Harda Factory Blast Victims) के रूप में राशि जमा कराएं।

NGT ने आदेश (Action on Harda Blast) दिए कि मृतकों के परिजनों को 15 लाख रूपए, जलने वाले और गंभीर चोट लगने वाले लोगों को 5 लाख रुपए और सामान्य चोट लगने वाले लोगों पर 3 लाख दिए जाएं।

वहीं, घर जलने पर 5 लाख रुपए प्रति घर के हिसाब से क्षतिपूर्ति की जाए और जिनके घर खाली कराए गए हैं, उन्हें 2 लाख रुपए देने का कहा है।

   हादसे में ये है पीड़ितों की संख्या

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हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई है। वहीं 180 घायल बताए गए हैं। इसके अलावा करीब 50 लोगों के घर या दुकान क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन सभी परिवारों को मुआवजे (Harda Factory Blast Victims) की राशि दिया जाना है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के अनुसार पूरा अमाउंट फैक्ट्री मालिक द्वारा जमा कराया जाना है। यह राशि जिला पर्यावरण मुआवजा निधि के खाते में जमा होगी।

   प्रशासन ने शुरु की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई

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एनजीटी के आदेश के पालन में प्रशासन ने पटाखा फैक्ट्री मालिक राजेश अग्रवाल, सोमेश अग्रवाल के मालिकाना हक वाली संपत्तियां कुर्क करने की कार्रवाई शुरु कर दी है। इसके लिए प्रशासन ने 17 फरवरी से नोटिस लगाने भी शुरू कर दिए थे।

   9 करोड़ की संपत्ति

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हरदा के बैरागढ़, रहटाखुर्द, हंडिया के कुंजरगांव में आरोपितों की फैक्ट्री की जमीन सहित संपत्ति का मूल्य कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार 5.5 करोड़ रुपये आंका गया है। वहीं, खिरकिया विकासखंड के पीपलपानी में 2.5 करोड़ रुपये की संपत्ति मिली है।

इसके करीब आरोपित की जमीन, हरदा के मानपुरा स्थित मकान की कीमत एक करोड़ रुपये आंकी गई है। यानी पटाखा फैक्ट्री संचालकों की कुल संपत्ति 9 करोड़ के आसपास है।

   12 करोड़ तक देना है मुआवजा

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हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट हादसे में 13 लोगों की मौत होने पर पीड़ित परिवारों को 1 करोड़ 95 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना है। वहीं 180 घायलों को करीब 8 करोड़ तक मुआवजा दिया जाना है।

इसके अलावा 50 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इन परिवारों को करीब 2 करोड़ का मुआवजा (Harda Factory Blast Victims) दिया जाना है। यानी घटना के पीड़ितों को करीब 12 करोड़ का मुआवजा दिया जाना है।

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   चार दिन से भूख हड़ताल के कारण तीन की तबीयत बिगड़ी

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हरदा पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट से क्षतिग्रस्त हुए घर को लेकर पीडि़त परिवार 23 फरवरी से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। पीड़ितों (Harda Factory Blast Victims) की हड़ताल का आज चौथा दिन है।

पीड़ितों का कहना है कि उन्हें घर बनाने के लिए महज सवा लाख रुपए मिले हैं, इतने कम पैसे में हम घर कैसे बनाएं। प्रशासन हमारा घर बनाकर दें।

हरदा के घंटाघर चौराहे पर धरना दे रहे पीड़ितों का कहना है कि हम बीते 20 दिनों से आईटीआई कॉलेज में बनाए गए राहत शिविर में राखा गया है। तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी हमारा जीवन पटरी पर नहीं आ सका है।

धरना प्रदर्शन में महिलाएं भी शामिल हैं। भूख हड़ताल की वजह से तीन महिलाओं की तबीयत भी बिगड़ गई, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

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   प्रशासन के पास ये है विकल्प

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प्रशासन भी यह मानता है कि कुर्क होने वाली संपत्ति की राशि और मुआवजे की राशि में अंतर है। ऐसे में प्रशासन अब यह भी देख रहा है कि फैक्ट्री संचालकों की कहीं कोई बेनामी प्रॉपर्टी तो नहीं।

कानून के विशेषज्ञों से सलाह भी ली जा रही है कि ऐसी प्रॉपर्टी को कुर्क करने के क्या कानूनी विकल्प हो सकते हैं।

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