Places of Worship Act: क्या खत्म हो जाएगा ये पुराना 1991 का कानून

Places of Worship Act: क्या खत्म हो जाएगा ये पुराना 1991 का कानून, सुप्रीम कोर्ट में दी जा रही है दलीलें…..

Places of Worship Act: सुप्रीम कोर्ट में जहां पर कई मामलों और मुद्दों पर बहस चल रही है वहीं पर हाल ही में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट (Places of Worship Act) का मामला गर्माया है जहां पर कोर्ट में इस कानून को खत्म करने के लिए याचिकाएं पेश की जा रही है। अब तक इस मामले में एक हफ्ते में चौथी याचिका दाखिल की गई है।

कथावाचक देवकी नंदन ने दायर की याचिका

आपको बताते चलें कि, इस एक्ट को खत्म करने की दलीलों में प्रख्यात कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने भी याचिका पेश की है जिसमें उन्होंने याचिका दाखिल करते हुए कहा कि, ये कानून लोगों को धार्मिक अधिकार से वंचित करता है. इसीलिए इस कानून में बदलाव होना चाहिए, या इसे खत्म किया जाना चाहिए. इस मामले में अब तक कुल 7 याचिकाएं दायर हो चुकी हैं। बताते चलें कि, देश में धार्मिक स्थलों को लेकर चल रही बहस के बीच इस एक्ट को लेकर चर्चा जोरों पर है। बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय की जिस याचिका पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया था, उसमें कहा गया था कि, 1991 में जब प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट बना, तब अयोध्या से जुड़ा मुकदमा पहले से कोर्ट में लंबित था। इस मामले में कोर्ट तक अधिकारों को ले जाना अधिकार है।

जानें क्या है प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991

आपको इस एक्ट के बारे में जानकारी देते चले तो यह एक्ट को लेकर कई चर्चाए सामने आ रही है जहां पर यह एक्ट 1991 में लागू किया गया था। जिसमें कहा गया कि, 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता। यदि कोई इस एक्ट का उल्लंघन करने का प्रयास करता है तो उसे जुर्माना और तीन साल तक की जेल भी हो सकती है। इस एक्ट को मूल रूप से बाबरी मस्जिद और अयोध्या के मुद्दे के दौरान लाया गया था। जहां पर तत्कालीन कांग्रेस प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव सरकार 1991 में इस एक्ट को लागू किया था।

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