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Meta WhatsApp Privacy Policy: सुप्रीम कोर्ट की मेटा-वॉट्सएप को चेतावनी, 'संविधान का पालन नहीं करेंगे तो भारत छोड़ें'

Meta WhatsApp Privacy Policy: सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर मेटा (Meta) को सख्त चेतावनी दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि तकनीकी कंपनियां भारत में रहकर नागरिकों के निजता अधिकार से खिलवाड़ नहीं कर सकती।

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Satya Sharma
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Meta WhatsApp Privacy Policy: सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर मेटा (Meta) को सख्त चेतावनी दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि तकनीकी कंपनियां भारत में रहकर नागरिकों के निजता अधिकार से खिलवाड़ नहीं कर सकती। अदालत ने यहां तक कह दिया कि अगर कंपनियां संविधान का पालन नहीं कर सकतीं, तो उन्हें देश छोड़ देना चाहिए।

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संविधान का पालन करें वरना देश छोड़ें मेटा-वॉट्सएप

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मेटा और वॉट्सएप को उनकी प्राइवेसी पॉलिसी पर कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि हम आपको एक भी जानकारी शेयर करने की इजाजत नहीं देंगे। आप इस देशवासियों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। CJI सूर्यकांत ने कहा कि यदि आप हमारे संविधान का पालन नहीं कर सकते, तो भारत छोड़ दें। हम नागरिकों की प्राइवेसी से समझौता नहीं होने देंगे।

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पांचोली की बेंच मेटा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका वॉट्सएप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ी है, जिसमें कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने नवंबर 2024 में मेटा पर 213.14 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था।

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9 फरवरी को आएगा अंतरिम आदेश 

इसे राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने याचिका में IT मंत्रालय को भी पक्षकार बनाने को कहा है। कोर्ट 9 फरवरी को अंतरिम आदेश देगा। CJI सूर्यकांत ने कहा कि देश में लोगों के प्राइवेसी के अधिकार की कड़ी सुरक्षा की जाती है। कोर्ट ने कहा कि इन एप्स में गोपनीयता से जुड़ी शर्तें इतनी चालाकी से लिखी जाती हैं कि आम आदमी उन्हें समझ ही नहीं पाता। यह लोगों की निजी जानकारी चोरी करने का शालीन तरीका है।

कोर्ट ने कहा कि हम आपको ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे। आपको इस पर साफ-साफ भरोसा दिलाना होगा, नहीं तो कोर्ट को आदेश जारी करना पड़ेगा। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। मेटा की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और व्हाट्सएप की ओर से अखिल सिब्बल पेश हुए। दोनों ने बताया कि जुर्माने की राशि जमा करा दी गई है।

बता दें कि वॉट्सएप ने साल 2021 में प्राइवेसी के नियम बदले और यूजर्स के लिए मेटा से डेटा साझा करना अनिवार्य कर दिया था। इसमें यूजर्स को नई पॉलिसी अस्वीकार करने का विकल्प नहीं दिया गया था। कंपनी ने नई पॉलिसी न मानने पर एप का इस्तेमाल बंद करने का विकल्प दिया था। अब निगाहें 9 फरवरी पर टिकी हैं, जब कोर्ट इस मामले में अपना अंतरिम फैसला सुनाएगा।

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