Spring Season: बसंत आते ही मुस्कुराने लगती है प्रकृति, आखिर क्यों दिन बड़े और रात लगती है छोटी

Spring Season: जब पेड़-पौधों में नई पत्तियां, फूलों का खिलना, चिड़ियों की चहचहाहट, शांत मौसम, और हल्की-हल्की हवा चलने लगे, तो समझ जाइए कि प्रकृति ने अपना रूप बदल लिया है। क्या आपने कभी सोचा है कि कड़कड़ाती ठंड के बाद अचानक मौसम इतना अच्छा कैसे हो जाता है? क्यों दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी? अंतरिक्ष में पृथ्वी का एक बदलाव है, जिसे हम 'बसंत का आगमन' कहते हैं।

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Spring Season: जब पेड़-पौधों में नई पत्तियां, फूलों का खिलना, चिड़ियों की चहचहाहट, शांत मौसम, और हल्की-हल्की हवा चलने लगे, तो समझ जाइए कि प्रकृति ने अपना रूप बदल लिया है। क्या आपने कभी सोचा है कि कड़कड़ाती ठंड के बाद अचानक मौसम इतना अच्छा कैसे हो जाता है? क्यों दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी? अंतरिक्ष में पृथ्वी का एक बदलाव है, जिसे हम 'बसंत का आगमन' कहते हैं।

पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है। बस यही मामूली सा झुकाव पृथ्वी पर जीवन की लय पैदा करता है। जब पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हुए इस स्थिति में आती है कि उसका उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) सूर्य की ओर झुकने लगता है, तब बसंत और गर्मियों की शुरुआत होती है। इस झुकाव की वजह से सूर्य की किरणें हमारे हिस्से में सीधी और ज्यादा समय तक पड़ती हैं जिससे दिन लंबे होने लगते हैं, रातें छोटी हो जाती हैं और सूरज की गर्मी हमें सर्दी की अकड़न से राहत देने लगती है।

बसंत आने के संकेत

बसंत के आने की पहचान केवल कैलेंडर से नहीं बल्कि हमारे आसपास हो रहे बदलावों से होती है, जैसे सूख चुके पेड़ों पर नई पत्तियां आने लगती हैं, रंग-बिरंगे फूल खिलने लगते है, हल्की और गुनगुनी हवाएं चलने लगती हैं। शाम को सूरज काफी दैर से अस्त होता है, जिससे बच्चों को खेलने और घूमने का ज्यादा वक्त मिलता है।

खगोल विज्ञान के अनुसार, 21 मार्च वह जादुई तारीख है जिसे 'बसंत विषुव' (Spring Equinox) कहा जाता है। इस दिन दुनिया भर में दिन और रात लगभग बराबर होते हैं। इसके बाद से उत्तरी गोलार्ध में दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं। यह 21 जून को अपने चरम पर पहुंचता है, जिसे 'ग्रीष्म संक्रांति' कहते हैं यह साल का सबसे लंबा दिन होता है। 

22 दिसंबर वह दिन होता है जब रात सबसे लंबी और दिन सबसे छोटा होता है, जिसे हम 'शीतकालीन संक्रांति' कहते हैं। दिसंबर का शीतकालीन संक्रांति पृथ्वी और ऋतुओं के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह तब होता है जब पृथ्वी का झुकाव उत्तरी गोलार्ध को सूर्य से सबसे दूर कर देता है , जिससे वर्ष का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात बनती है। यह क्षण ठंडे तापमान के बारे में नहीं है, बल्कि सूर्य के प्रकाश के कोण और अवधि के बारे में है। बसंत केवल एक मौसम नहीं, बल्कि नई शुरुआत और उम्मीद का प्रतीक है।

बसंत ऋतु में दिन बड़े और रातें छोटी लगने लगती हैं क्योंकि पृथ्वी की धुरी सूर्य की ओर झुकने लगती है, जिससे सूर्य की किरणें अधिक समय तक पृथ्वी के एक हिस्से पर सीधी पड़ती हैं और उत्तरी गोलार्ध में दिन की अवधि बढ़ने लगती है, जिससे मौसम सुहावना होता है, पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं और प्रकृति का नया श्रृंगार होता है। 

इसके पीछे के मुख्य कारण

पृथ्वी की धुरी का झुकाव: पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.45 डिग्री झुकी हुई है। वसंत ऋतु (विशेषकर उत्तरी गोलार्ध में), जब पृथ्वी की यह धुरी सूर्य की ओर झुकती है, तब सूर्य की किरणें अधिक समय तक सीधे पड़ती हैं, जिससे दिन लंबा होता है।

सूर्य की स्थिति: जैसे-जैसे पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है, उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुकता है, और सूर्य आकाश में ऊपर उठता जाता है, जिससे दिन का प्रकाश लंबे समय तक रहता है और रातें छोटी हो जाती हैं।

मौसम का बदलाव: इस झुकाव के कारण औसत दैनिक तापमान बढ़ने लगता है, सर्दियाँ कम होती हैं और मौसम सुहावना हो जाता है, जो प्रकृति में नए जीवन का संचार करता है। 

प्रकृति में होने वाले अन्य बदलाव

1. पेड़ों में नई कोंपलें और रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं, जैसे सरसों के पीले खेत।

2. पक्षी चहचहाने लगते हैं और वातावरण खुशबू से भर जाता है।

3. पशु शीत निद्रा से जागते हैं और चारों ओर हरियाली छा जाती है।
 
4. यह प्राकृतिक प्रक्रिया पृथ्वी की गति और सूर्य के सापेक्ष उसके झुकाव का परिणाम है, जो वसंत को 'ऋतुराज' (सभी ऋतुओं का राजा) बनाता है। 

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