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Narmada Jayanti 2026: देश में सैकड़ों नदियां बहती हैं. लेकिन कुछ ऐसी नदियां हैं, जिन्हें देवी के समान पूजनीय माना जाता है. इनमें गंगा, यमुना, सरस्वती और नर्मदा नदी हैं, जिनकी विधिवत रूप से पूजा की जाती है. गंगा की तरह ही नर्मदा को भी आस्था का केंद्र माना जाता है.
इस साल 25 जनवरी को नर्मदा जयंती मनाई जाएगी. बता दें कि नर्मदा एक ऐसी नदी है, जो उल्टी दिशा में बहती है. नर्मदा नदी पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित होकर अरब सागर में मिलती है. इसके पीछे एक पौराणिक कारण है.
क्यों उल्टी बहती है नर्मदा
नर्मदा राजा मेकल की पुत्री हैं. जब वे विवाह योग्य हुईं तो राजा ने घोषणा की कि जो व्यक्ति गुलबकावली का फूल लाएगा, वही नर्मदा से शादी कर सकेगा. राजकुमार सोनभद्र ने यह चुनौती पूरी की और फिर नर्मदा जी की शादी राजकुमार सोनभद्र से तय कर दी गई. लेकिन विवाह से पहले नर्मदा ने राजकुमार सोनभद्र से मिलने की इच्छा जताई और अपनी सहेली जोहिला को संदेश लेकर राजकुमार के पास भेज दिया.
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जब राजकुमार सोनभद्र ने जोहिला को देखा तो उन्हें नर्मदा समझकर प्रेम प्रस्ताव रख दिया. जोहिला ने भी बिना कुछ कहे इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और दोनों का प्रेम संबंध बन गया. जब नर्मदा को ये बात पता चली तो वे क्रोधित हो गईं. अपमान और दुख से भरी नर्मदा ने तय किया कि अब वह कभी पीछे मुड़कर नहीं देखेंगी. उन्होंने जीवन भर अविवाहित रहने का और उल्टी दिशा में बहने का संकल्प लिया. इसी कारण नर्मदा ने विपरीत दिशा में बहना शुरू कर दिया और अंत में अरब सागर में जाकर मिल गईं.
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