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Makar Sankranti 2026 Date Tithi Muhura: साल का सबसे पहला और खास त्योहार आने वाली है। इसकी सही तिथि क्या है। 14 या 15 जनवरी मकर संक्रांति कब है, यदि आ भी कुछ इसी तरह के सवालों को लेकर कंफ्यूज हैं तो चलिए जानते हैं ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री से कि बुधवार या गुरुवार मकर संक्रांति कब है। पढ़ें इससे जुड़े सभी सवालों के जबाव हमारे बंसल न्यूज के धर्म-अध्यात्म सेक्शन में।
मकर संक्रांति कब है (Makar Sankranti Kab Hai 2026)
ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार इस साल मकर संक्रांति वैसे तो 14 जनवरी को ही आएगी लेकिन इसकी अर्की का मुहूर्त रात को होने के कारण ये दो दिन मनाई जाएगी।
मकर संक्रांति 2026 अर्की शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti Arki Muhurat)
हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी। इसकी अर्की का समय 14 जनवरी बुधवार की रात 9:57 मिनट पर होगा। यानी जो साधु संत और महात्मा है वे इसी समय पवित्र नदी में स्नान कर डुबकी लगाएंगे।
कब तक मनाई जाएगी मकर संक्रांति
ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार संक्रांति 14 और 15 जनवरी दोनों दिन मनेगी। गुरुवार को सूर्योदय से दोपहर 1:57 मिनट तक की इसका पुण्य काल रहेगा। यानी दोपहर 1:57 तक संक्रांति स्नान होगा।
मकर संक्रांति 2026 – कब तक मनाई जाएगी?
तिथि:
14 जनवरी 2026 (बुधवार)
15 जनवरी 2026 (गुरुवार)
पुण्य काल
15 जनवरी को सूर्योदय से दोपहर 1:57 बजे तक
संक्रांति स्नान
15 जनवरी दोपहर 1:57 बजे तक स्नान-दान मान्य
ज्योतिषीय मान्यता
इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं . साथ ही ये दिन पुण्य, दान और स्नान के लिए विशेष माना जाता है.
क्या होती है मकर संक्रांति (Makar Sankranti Kise Kahte Hain)
ग्रहों के राजा सूर्य देव हर महीने एक राशि बदलते हैं। ऐसे में 12 महीने की 12 राशियां होती हैं और हर राशि के नाम के आधार पर उस संक्रांति का नाम होता है। ऐसे में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे मकर संक्रांति कहते हैं।
मकर संक्रांति से जुड़े महत्व और परंपराएं (Makar Sankranti ki Paramparayen)
मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान करने का महत्व है। लोग इस दिन पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, आदि) में डुबकी लगाते हैं, जिससे पाप धुलते हैं और सूर्य देव की कृपा मिलती है। इस दौरान फसल उत्सव मनाया जाता है। यह नई फसल का स्वागत करने, प्रकृति का आभार व्यक्त करने और सर्दी के कम होने का उत्सव है। इस दिन तिल-गुड़ से बनी मिठाइयाँ (जैसे लड्डू) बनती हैं, जिनका आदान-प्रदान करके "मीठा बोलो" की शुभकामना दी जाती है। इसे प्रेम और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य करना बहुत शुभ माना जाता है। जिससे जीवन में समृद्धि आती है। गुजरात जैसे राज्यों में इसे 'उत्तरायण' भी कहा जाता है। इस दिन बड़े पैमाने पर पतंगें उड़ाने की परंपरा भी है।
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