UGC New Rules: यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में क्यों मचा बवाल? केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया ये बयान

UGC New Rules: सोशल मीडिया पर यूजीसी के नए नियमों को लेकर बवाल मचा हुआ है. इसके विरोध में #UGCRolleback सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है. वहीं, लोग यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए हैं. लोगों को कहना है कि इस नियम से भेदभाव बढ़ेगा.

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UGC New Rules: सोशल मीडिया पर यूजीसी के नए नियमों को लेकर बवाल मचा हुआ है. इसके विरोध में #UGCRolleback सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है. वहीं, लोग यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए हैं. लोगों को कहना है कि इस नियम से भेदभाव बढ़ेगा. इस पूरे मामले की वजह से बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया. आइए जानते हैं कि यूजीसी के किन नियमों का इस समय विरोध चल रहा है. 

दरअसल, यूजीसी ने 13 जनवरी को एक नया नियम लागू किया था, जिसका नाम है 'Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026' इसी को लेकर देश में बवाल मचा हुआ है. सवर्ण समाज इस फैसले से नाराज है. बरेली के मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि इस नए कानून के जरिए यूजीसी ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले सामान्य वर्ग के छात्रों को स्वघोषित अपराधी बना दिया है.

यूजीसी विरोध पर आया केंद्रीय शिक्षा मंत्री का बयान

यूजीसी के नियमों को लेकर उठे विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि इस नियमों के आधार पर किसी को भी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ेगा। किसी के भी ऊपर अत्याचार नहीं होगा। किसी को उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। इसकी ताकत को गलत तरीके से इस्तेमाल नहीं करने दिया जाएगा। 

जानें क्या है यूजीसी का नया नियम

1. यूजीसी के मुताबिक, नए नियम की जरूरत एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकना और उस पर निगरानी रखना है.   

2. नए Equity Rule के तहत सभी यूनिवर्सिटी, कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसर में  24x7 हेल्पलाइन,  Equal Opportunity Centre, Equity Squads और Equity Committee का गठन करना होगा. 

3. अगर कोई भी संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है तो यूजीसी उनकी मान्यता रद्द करने या फंड रोकने जैसी सख्त कार्रवाई कर सकता है. 

नए नियम पर क्यों मचा बवाल

यूजीसी के नए नियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका भी दायर की गई है. इस याचिका में नए नियम को भेदभावपूर्ण और मनमाना बताया गया है. याचिकाकर्ता ने बताया है कि यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी को जिस नए नियम को अधिसूचित किया है उसका 3(C) भेदभाव बढ़ाने वाला है. याचिकाकर्ता ने इस नियम को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है.  

जनहित याचिका में कहा गया है कि यूजीसी के Equity Rule का सेक्शन 3(C) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत आजादी जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. यह नियम यूजीसी अधिनियम 1956 के विरुद्ध है और उच्च शिक्षा में समान अवसर देने के अवसर को खत्म करता है. इसी तरह के साथ याचिका में इन प्रावधानों को हटाने की मांग सुप्रीम कोर्ट से की गई है. 

यूजीसी के अनुसार इस नए नियम की जरूरत उच्च शिक्षण संस्थानों में पिछड़ी और अनुसूचित जाति और जनजातियों के खिलाफ बढ़ते भेदभाव के मामले को रोकने के लिए पड़ी. 2020 से 2025 के बीच जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में 100 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो गई थी. इसके अलावा इस नियम को बनाने के पीछे रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों में की गई सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को भी वजह बताया गया है. 

छात्रों ने क्यों उठाए सवाल 

छात्रों का कहना है कि नए नियमों में झूठी शिकायतों पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं है. इस वजह से किसी पर भी बिना किसी सबूत के झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं. इससे किसी भी छात्र को परेशानी होगी और उनका शिक्षण और करियर प्रभावित होगा. वहीं इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व को जरूरी नहीं बताया गया है. वहीं इक्विटी स्क्वाड को भी काफी अधिकार दे दिए गए हैं और 'भेदभाव' परिभाषा स्पष्ट नहीं की गई है. 

यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग का मानना है कि निगरानी व्यवस्था के बिना कैंपस में एक समान और सुरक्षित माहौल नहीं बन पाएगा. वहीं सामान्य वर्ग के छात्रों का आयोग से बिलकुल विपरीत दृष्टिकोण है. छात्रों का कहना है कि नया नियम एकतरफा हैं और इससे भेदभाव को और अधिक बढ़ावा मिलेगा.  बता दें कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत कई राज्यों में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. 

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