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हाइलाइट्स
प्रदेश में है 3500 सहकारी सोसायटी
आरटीआई के दायरे में आई सोसायटी
सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने दिये आदेश
MP RTI Act: सहकारी समितियां में हो रहे घोटालों पर नकेल कसने के लिए मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग द्वारा एक ऐतिहासिक आदेश दिया गया है।
प्रदेश में अनाज का उपार्जन और राशन दुकानों का संचालन करने वाली सभी सहकारी समितियां को तत्काल प्रभाव से आरटीआई अधिनियम के अधीन लाया गया है।
इससे खाद, बीज, उपार्जन के घोटाले (Cooperative Society Scam) पर अंकुश लगेगा।
RTI के दायरे में लाने से ये होगा फायदा
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सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि खाद्यान्न उपार्जन एवं पीडीएस का संचालन करने वाली सहकारी समितियों के सूचना का अधिकार अधिनियम (MP RTI Act) के अधीन आने से प्रदेश में खाद्यान्न उपार्जन एवं पीडीएस के संचालन में भ्रष्टाचार निरोधी, पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित होने के साथ इस व्यवस्था के लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों की जनता के प्रति जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
कच्चा चिट्ठा अब जनता के सामने होगा
किसानों द्वारा अक्सर खाद्यान्न उपार्जन और खाद, बीज की व्यवस्था में अनियमितताओं की शिकायत की जाती है, पर सहकारी समितियां की व्यवस्था पारदर्शी नहीं होने की वजह से किसानों की समस्याओं का निराकरण नहीं हो पाता है।
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सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि अब आरटीआई (MP RTI Act) में इन सरकारी समितियां का कच्चा चिट्ठा अब जनता के सामने होगा।
सहकारी समिति इस तरह से RTI से बचती थी
दरअसल आयोग के समक्ष कई शिकायतें दर्ज हुई थी जिसमें पीडीएस दुकानों पर काम करने वाले सेल्समैन ने अपने स्वयं के वेतन की जानकारी आरटीआई (MP RTI Act) में मांगी थी।
वही एक और शिकायत में आरटीआई आवेदक ने कहा कि राशन की दुकान एवं अनाज उपार्जन करने वाली सहकारी समितियां अक्सर आरटीआई में जानकारी नहीं देते हैं। यह कहते हैं कि आरटीआई अधिनियम उन पर लागू नहीं होता।
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सन 2005 जब से RTI एक्ट लागू हुआ है तब से सहकारी समितियां प्रदेश में सुप्रिम कोर्ट के थलापलम जजमेंट का हवाला देते हुए अपने आप को आरटीआई अधिनियम से बाहर बताते हुए जानकारी देने से मना कर देती हैं।
यहां तक जिले में उपायुक्त सहकारिता के पास भी RTI आवेदन दायर होने पर वे यह कहते हुए जानकारी उपलब्ध नहीं कराते थे कि उक्त सहकारी समिति ने आरटीआई अधिनियम से अपने आप को बाहर बताते हुए जानकारी देने से मना कर दिया है।
क्या कहता है RTI कानून
आरटीआई अधिनियम (MP RTI Act) के अधीन किसी भी संस्था को लाने के लिए यह जरूरी है कि कानूनी रूप से वह संस्था की भूमिका पब्लिक अथॉरिटी के रूप में स्थापित हो या फिर किसी कानून या नियम के तहत अगर शासन उस संस्था से जानकारी प्राप्त कर सकता है तो वो भी जानकारी RTI के अधीन होगी।
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संस्था को पब्लिक अथॉरिटी तभी कहा जा सकता है जब कोई संस्था शासन के नियंत्रण में हो या फिर शासन द्वारा अत्यंत रूप से वित्त पोषित हो। मध्य प्रदेश राज्य के नियम में पर्याप्त रूप से वित्तपोषित (sunstainally fiannced) को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि अगर किसी संस्था में शासन का ₹50000 का न्यूनतम परोक्ष या अपरोक्ष रूप से निवेश हो तो वो संस्था लोक प्राधिकारी होगी।
हाईकोर्ट के आदेश को बनाया आधार
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राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने औरंगाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले को आधार बनाते हुए सभी सहकारी समितियां को आरटीआई (MP RTI Act) के अधीन बताया है।
सिंह ने कहा कि औरंगाबाद हाईकोर्ट ने RTI में सभी कोऑपरेटिव सोसाइटी की जानकारी को देने के लिए रजिस्टार कोऑपरेटिव सोसाइटी को जवाबदेह माना है।
सहकारी समितियों की जानकारी के लिए यहां लगाए RTI
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सूचना आयुक्त राहुल सिंह नें सभी जिले में पदस्थ उपायुक्त सहकारिता को सरकारी समितियां की जानकारी देने के लिए लोक सूचना अधिकारी नियुक्त किया है।
सिंह ने आरटीआई (MP RTI Act) संयुक्त आयुक्त सहकारिता को प्रथम अपीलीय अधिकारी बनाया है। सिंह ने प्रमुख सचिव, मप्र शासन सहकारिता विभाग भोपाल को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।
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राशन दुकानों के सैलरी संबंधी जानकारी में भारी गड़बड़ी
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आयोग की जांच में विक्रेताओं के वेतन संबंधी जानकारी में चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं। रीवा जिले में कुल 459 विक्रेता कार्यरत हैं। किसी भी विक्रेता को प्रत्येक माह वेतन नहीं दिया जा रहा है।
5 विक्रेता जिन्हें लगभग 7-10 वर्ष से वेतन प्रदान नहीं किया जा रहा है। लगभग 70 से अधिक विक्रेता ऐसे हैं इन्हें 2 साल से अधिक समय से वेतन प्रदान नहीं किया जा रहा है।
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किसानों और RTI एक्टिविस्ट ने फ़ैसले का स्वागत किया
रीवा के RTI Activist शिवानंद द्विवेदी जिनकी अपील पर यह कार्रवाई हुई है ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब तक सहकारी समितियां किसानों को उनके केसीसी कर्ज, ब्याज अनुदान, उपार्जन राशन एवं अन्य खाद बीज आदि की जानकारी उपलब्ध नहीं कराती थी।
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स्वयं आरटीआई कानून (MP RTI Act) के दायरे के बाहर होना बताया करती थी। इस आदेश से न केवल मध्य प्रदेश में बल्कि पूरे भारतवर्ष में सहकारी समितियां को आरटीआई के दायरे में लाने में काफी हद तक मदद मिलेगी।
सेल्समैन के वेतन की जानकारी अब पब्लिक प्लेटफॉर्म पर
इसी आदेश में राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने राशन की दुकानों पर कार्य करने वाले सेल्समैन के वेतन संबंधी गड़बड़ी उजागर होने पर प्रदेश के सभी सेल्समैन की वेतन संबंधी जानकारी जिले के पोर्टल पर स्वतः प्रदर्शित करने के निर्देश भी जारी किए हैं।
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आयोग ने प्रमुख सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग भोपाल को आदेशित किया कि मध्यप्रदेश के समस्त जिला कलेक्टरों को आयोग के उक्त आदेश की प्रति उपलब्ध करायें और 3 माह के भीतर जिलों में राशन की दुकानों में कार्यरत सेल्समैनों के वेतन की जानकारी को वेबसाइट, पोर्टल पर अपलोड करवाना सुनिश्चित करें।
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