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JANNA JARURI HAI : गाड़ियां हो जाएंगी बेकार, 1 अप्रैल 2023 से नए टायर लगाना होगा अनिवार्य, जानें नया नियम

New Norms For Safer Tyre : गाड़ियां हो जाएंगी बेकार, 1 अप्रैल 2023 से नए टायर लगाना होगा अनिवार्य, जानें नया नियम new-norms-for-safer-tyre-if-you-want-to-drive-a-car-then-read-the-new-rules-otherwise-your-car-will-be-parked-in-the-parking-of-the-house-pds

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Bansal News
JANNA JARURI HAI : गाड़ियां हो जाएंगी बेकार, 1 अप्रैल 2023 से नए टायर लगाना होगा अनिवार्य, जानें नया नियम

नई दिल्ली। अगर आपके पास कार New Norms For Safer Tyre है तो ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। क्योंकि अब कारों में लगने वाले टायरों को लेकर भी नियम आ गया है। जिसमें अब आपकी कार में पुराने टायर लगे हैं तो अब आप उन्हें नहीं चला पाएंगे। दरअसल आए दिन होने वाले सड़क हादसों के लिए कई हद तक गाड़ियों में लगे टायर भी कारण बनते हैं। जिसके लिए एक Tyre Speed Ratings नया नियम आने वाला है। जी हां इसके jankari aapke kaam ki  लिए 1 अक्टूबर 2022 से नए डिजाइन के टायर मिलने लगेंगे। साथ ही 1 अप्रैल 2023 से इन्हें गाड़ियों में लगाना अनिवार्य हो जाएगा। आइए जन लेते हैं क्या है नया नियम।

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नया नियम क्या है?

देशभर में 1 अक्टूबर 2022 से नए डिजाइन के टायर मिलेंगे। वहीं 1 अप्रैल 2023 से सभी गाड़ियों में नए डिजाइन के टायर लगाना जरूरी होगा।

नए नियम से होगी टायरों की रेटिंग —
अभी तक टायरों में रेटिंग सिस्टम नहीं था। लेकिन पेट्रोल-डीजल की बचत के हिसाब से सरकार टायरों की स्टार रेटिंग का भी एक सिस्टम ला रही है। आपको बता दें अभी भारत में बिकने वाले टायर की क्वालिटी BIS, यानी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के द्वारा तय होती हैं। पर आपको बता दें इस नियम से ग्राहकों को टायर खरीदने के दौरान ऐसी जानकारी नहीं मिल पाती है, जिससे उनका फायदा हो।

क्या होता है रेटिंग सिस्टम —
रेटिंग सिस्टम से किसी चीज की गुणवत्ता तय होती है। मान लीजिए आप जब आप फ्रिज या AC खरीदने जाते हैं तो सबसे पहले रेटिंग देखते हैं। आपको बता दें इस रेटिंग से बहुत हद तक उस प्रोडक्ट की क्वालिटी और बिजली की खपत के बारे में पता चलता है। बिजली की खपत की रेटिंग ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी तय करता है। इतना ही नहीं जिस साल रेटिंग की गई होगी उसका साल भी उसमें मेंशन किया होता है।

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कार में मिलने से होगा फायदा —
इलेक्ट्रिन आइटम की तरह ही रेटिंग सिस्टम नए डिजाइन के टायरों पर भी होगा। जिससे ग्राहक खरीदने से पहले देख पाएंगे। पर इस सिस्टम को कैसे बनाएगा जाएगा या ये किस तरह से ग्राहकों की मदद करेगा। इसे लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

नई डिजाइन के टायरों को होंगे ये फायदे —

  • नई डिजाइन के टायर से सड़क पर अच्छी ग्रिप बनेगी।
  • पुरानी टायर के मुकाबले नए टायर की क्वालिटी अच्छी रहेगी।
  • विदेशों से आने वाले घटिया क्वालिटी के टायरों पर रोक लगेगी।
  • टायर की रेटिंग होने से उसकी क्वालिटी तय की जा सकेगी।

तीन तरह के होते हैं टायर —
आपको बता दें आमतौर पर मोटे तौर 3 कैटेगरी के टायर होते हैं C1, C2 और C3। अब इन्हीं इन तीनों कैटेगरी के टायरों के लिए ऑटोमोटिव इंडियन स्टैंडर्ड यानी AIS के नए नियम और पैरामीटर्स लागू होंगे। जिसमें अब रेटिंग की जा सकेगी।

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क्या होते हैं ये टायर —

  • C1 — इस कैटेगरी के टायर्स को पैसेंजर कार में लगाया जाता है।
  • C2 — इस कैटेगरी के टायर्स छोटी कमर्शियल गाड़ी में लगाए जाते हैं।
  • C3 — तीसरे टाइप यानि इस कैटेगरी के टायर हैवी कमर्शियल गाड़ी में होते हैं। जो गाड़ियों का वजन सहन कर सकते हैं।

नई डिजायन के टायरों में इन बातों का रखा जाएगा ध्यान —

AIS यानि आटोमोटिव इंडियन स्टेंडर्ट द्वारा नए टायरों को बनाने में मुख्य रूप से तीन बातों का ध्यान रखा जाएगा। जिसमें तीन प्रमुख बातें कॉमन हैं।

1 — रोलिंग रेजिस्टेंस :
जब भी कोई गोल चीज जमीन पर लुढ़कती है, तो उस पर जो घर्षण यानी फ्रिक्शन लगता है उसे रोलिंग रेजिस्टेंस कहते हैं। इस बिन्दु को ध्यान में रखने का मुख्य उद्देश्य चिकनी सतह या बारिश में गाड़ियों को फिसलने से बचाना हैं।

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कार के केस में जो एनर्जी गाड़ी को पुल करने के लिए लगती है, उसे रोलिंग रेजिस्टेंस कहा जाता है। अगर रोलिंग रेजिस्टेंस कम है तो टायर को ज्यादा ताकत नहीं लगानी पड़ती है, जिसकी वजह से पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी और माइलेज, यानी एवरेज बढ़ेगा।

नए डिजाइन के टायर बनाने के लिए कंपनियां रोलिंग रेजिस्टेंस, यानी टायर के शेप, साइज और उसके मटेरियल पर काम करेंगी, ताकि गाड़ी का रोलिंग रेजिस्टेंस कम हो सके।

वेट ग्रिप-

बारिश के दौरान या कभी भी अगर सड़क गीली रहती है तो गाड़ियों के टायर फिसलने लगते हैं और रोड एक्सीडेंट बढ़ जाते हैं। नए डिजाइन के टायर बनाने वाली कंपनियों को ध्यान रखना होगा कि गीली सड़क पर टायर की फिसलन का खतरा न हो।

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रोलिंग साउंड एमिशन्स-

गाड़ी चलाते वक्त कई बार टायर से कुछ आवाज आती है। इससे लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं कि कहीं गाड़ी खराब तो नहीं हो रही है। इस तरीके की आवाज से रोड में शोर भी बढ़ता है। इस शोर को कम करने पर भी ध्यान देना होगा। हमने अपनी खबर में AIS यानी ऑटोमोटिव इंडियन स्टैंडर्ड का जिक्र किया है, आखिर क्या है AIS जानते हैं? देश में बनने वाली गाड़ियों को इंडियन स्टैंडर्ड (IS) और AIS यानी ऑटोमोटिव इंडियन स्टैंडर्ड के नियमों को मानना पड़ता है। व्हीकल की डिजाइन, प्रोडक्शन, मेंटेनेंस और रिकवरी को AIS ही देखता है।

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