हाइलाइट्स
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29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस
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खेलों में हरियाणा और पंजाब आगे
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खेलों में MP-CG और UP पीछे क्यों ?
National Sports Day: हमारे देश में जब भी खेलों की बात होती है तो हरियाणा और पंजाब का नाम सबसे ऊपर आता है। इन राज्यों के खिलाड़ियों ने हॉकी, कुश्ती, कबड्डी, बॉक्सिंग और एथलेटिक्स में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश भारत को गौरवान्वित किया है। लेकिन मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य खेलों में अक्सर पीछे रह जाते हैं। आखिर इसकी वजह क्या है ?
स्पोर्ट्स कल्चर नहीं
हरियाणा और पंजाब में खेलना सिर्फ शौक नहीं, बल्कि परंपरा है। गांव-गांव में कुश्ती के अखाड़े, कबड्डी के मैदान और एथलेटिक्स ट्रैक युवाओं को अपनी ओर खींचते हैं। वहीं मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में खेलों को करियर की बजाय शौक या मनोरंजन माना जाता है।
फैसिलिटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी
हरियाणा और पंजाब में स्थानीय स्तर पर भी खिलाड़ियों को स्टेडियम, कोचिंग और उपकरण उपलब्ध होते हैं। वहीं मध्यप्रदेश और यूपी में कई जिलों में खेल मैदानों की भारी कमी है। आधुनिक जिम, ट्रेनिंग सेंटर और अनुभवी कोचों का अभाव खिलाड़ियों को पीछे कर देता है।
सरकारी नीतियां और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन
हरियाणा सरकार खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर जीतने पर बड़ी इनामी राशि, सरकारी नौकरी और सम्मान देती है। यही वजह है कि वहां के युवा पूरी मेहनत से खेलों पर ध्यान देते हैं। लेकिन यूपी, एमपी और छत्तीसगढ़ में योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन खिलाड़ियों तक कम ही फायदा पहुंचता है।
पोषण और फिटनेस का फर्क
हरियाणा और पंजाब के खिलाड़ियों की डाइट में दूध, दही, घी और प्रोटीनयुक्त भोजन शामिल रहता है। इससे उनकी शारीरिक क्षमता बेहतर होती है। दूसरी ओर एमपी और छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण इलाकों में बच्चों को अब भी कुपोषण की समस्या का सामना करना पड़ता है।
सामाजिक मानसिकता और परिवार का सपोर्ट
पंजाब और हरियाणा में माता-पिता बच्चों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। यहां पहलवानी और कबड्डी की पारिवारिक परंपरा भी देखने को मिलती है। जबकि यूपी, एमपी और CG में ज्यादातर परिवार पढ़ाई और नौकरी को ही सुरक्षित भविष्य मानते हैं।
हरियाणा और पंजाब से सीखने की जरूरत
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में अच्छे खिलाड़ियों की कमी नहीं है। बल्कि उन्हें स्पोर्ट्स कल्चर, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी प्रोत्साहन की कमी खलती है। अगर मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ भी हरियाणा और पंजाब जैसी खेल नीतियों को अपनाएं, तो भविष्य में उनके खिलाड़ी भी देश को गौरवान्वित कर सकते हैं।