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नकुल vs बंटी की टक्कर: एक उपचुनाव छोड़ 73 सालों से कांग्रेस का कब्जा, जानें छिंदवाड़ा सीट का समीकरण

Lok Sabha Chunav 2024: नकुल vs बंटी की टक्कर: एक उपचुनाव छोड़ 73 सालों से कांग्रेस का कब्जा, जानें छिंदवाड़ा लोकसभा सीट का जातीय समीकरण

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Preetam Manjhi
नकुल vs बंटी की टक्कर: एक उपचुनाव छोड़ 73 सालों से कांग्रेस का कब्जा, जानें छिंदवाड़ा सीट का समीकरण

हाइलाइट्स

  • छिंदवाड़ा लोकसभा सीट का जातीय समीकरण
  • नकुलनाथ और बंटी साहू की कांटे की टक्कर
  • एक उपचुनाव छोड़ 73 सालों से कांग्रेस का कब्जा
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Lok Sabha Chunav 2024: मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट (Lok Sabha Chunav 2024) पूरे प्रदेश में कांग्रेस की इकलौती सीट है। ये सीट एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की परंपरागत सीट है।

आपको बता दें कि कमलनाथ के परिवार का इस सीट पर लंबे समय से कब्जा रहा है। इस बार होने वाले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Chunav 2024) में भी कांग्रेस की तरफ से नकुलनाथ ताल ठोक रहे हैं।

वहीं नकुलनाथ को टक्कर देने के लिए बीजेपी से विवेक बंटी साहू है और बहुजन समाज पार्टी से उमाकांत बंदेवार है। इस तरह यहां 15 प्रत्याशी मैदान में हैं।

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2024 लोकसभा चुनाव में विवेक बंटी साहू vs नकुलनाथ

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साल 2019 में लगभग 38 हजार वोटों से चुनाव (Lok Sabha Chunav 2024) जीतने वाले कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ पर एक बार फिर से कांग्रेस ने भरोसा जताया है, वहीं बीजपी ने विवेक बंटी साहू को टिकट दिया है।

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आपको बता दें कि ये वही बंटी हैं, जिन्होंने 2018 और 2023 के विधानसभा चुनाव में कमलनाथ को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि दोनों बार कमलनाथ जीत गए थे, लेकिन वोटों का फासला बेहद कम था। विवेक साहू पार्टी के जिला अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

हालांकि कमलनाथ ने 2018 के चुनाव में 25 हजार और 2023 में 34 हजार वोटों से जीत हासिल की थी।

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इसके अलावा बाता करें तो बहुजन समाज पार्टी से उमाकांत बंदेवार टक्कर देंगे। इस तरह यहां 15 प्रत्याशी मैदान में हैं।

कांग्रेस प्रत्याशी नकुल नाथ के मजबूत पक्ष के कई कारण

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नकुल नाथ के बैकग्राउंड की बात करें तो उद्योगपति नकुल नाथ एक्सिडेंटल नेता हैं, उनके पिता कलमनाथ एमपी के मुख्यमंत्री बने तो मोदी लहर में उनका गढ़ (छिंदवाड़ा लोकसभा सीट) बचाने के लिए वे राजनीति में आए।

बता दें कि 2019 में नकुल नाथ ने पहली बार छिंदवाड़ा सीट से लोकसभा का चुनाव (Lok Sabha Chunav 2024) लड़ा था और 37 हजार वोट से जीत हासिल की थी।

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- कमलनाथ का गढ़

नकुल नाथ को कमलनाथ के बेटे और छिंदवाड़ा को कमलनाथ का गढ़ माना जाने के कारण पूरा लाभ मिलने की संभावना है।

- पिता का राजनीतिक रसूख

पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रा गांधी कमलनाथ को अपना तीसरा बेटा मानती थी, उन्होंने अपने बयान में कहा था कि कमलनाथ और इंद्रा गांधी के समर्थकों का मिलेगा साथ।

कमलनाथ छिंदवाड़ा से 9 बार सांसद रहे हैं और पूर्व मुख्यमंत्री भी रहे हैं। साथ ही नकुलनाथ की मॉ भी छिंदवाड़ा से सांसद रहीं हैं, जिसका लाभ नकुलनाथ को मिल सकता है।

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- कांग्रेस का ग्रामीण और ST वर्ग का बड़ा वोट बैंक

ग्रामीण और ST वर्ग वोट बैंक सामान्य रूप से कांग्रेस के पक्ष में ज्यादा रहता है। इससे यहां के ग्रामीणों के 75 फीसदी वोट कांग्रेस के खाते में जाते रहे हैं।

- व्यावसायिक जमीन छिंदवाड़ा

वैसे तो नाथों की मातृभूमि यूपी का कानपुर है, लेकिन व्यावसायिक जमीन छिंदवाड़ा है। छिंदवाड़ा से नाथ परिवार का 43 साल का मजबूत संबंध रह है।

बीजेपी प्रत्याशी विवेक बंटी साहू के मजबूत पक्ष के कई कारण

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लगातार विधानसभा चुनाव से बंटी साहू कमलनाथ को टक्कर देते आ रहे हैं। साल 2023 के विधानसभा चुनाव (Lok Sabha Chunav 2024) में भी कमलनाथ और बंटी साहू का कड़ा मुकाबला देखने को मिला था।

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हालांकि कमलनाथ ने विवेक बंटी साहू को कुछ वोटों से हराया था। बता दें कि बंटी साहू छिंदवाड़ा जिले में बीजेपी का बड़ा चेहरा माने जाते हैं, जो तीसरी बार 'नाथ' परिवार के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।

हालांकि बंटी को पिछले दो चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, ऐसे में तीसरी बार टिकट दिए जाने पर उनकी चर्चा सियासी गलियारों में जमकर हो रही है।

छिंदवाड़ा में BJP का बड़ा चेहरा हैं बंटी साहू

बंटी साहू 7 साल तक बीजेपी के युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष रहे हैं, इसके अलावा तीन बार से जिले में पार्टी जिला अध्यक्ष की कमान संभाल रहे हैं।

बंटी साहू की छिंदवाड़ा के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पकड़ अच्छी मानी जाती है, वे लगातार जनता के बीच सक्रिय रहने वाले नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाते आ रहे हैं।

हालांकि छिंदवाड़ा कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, लेकिन बंटी साहू ने पार्टी के संगठन को मजबूत बनाकर रखा है। यही वजह है कि बीजेपी उन्हें लगातार मौका दे रही है।

इसके साथ ही बंटी साहू बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के भी करीबी माने जाते हैं, ऐसे में होने वाले लोकसभआ चुनाव में यहां पूरा संगठन एक्टिव रहेगा।

आपको बता दें कि बीजेपी के दिग्गज नेता और मंत्री कैलाश विजवयर्गीय इस बार छिंदवाड़ा सीट के प्रभारी हैं, जो अपने राजनीतिक मैनेजमेंट में माहिर माने जाते हैं, ऐसे में उनका रोल भी इस बार अहम हो सकता है, यही वजह है कि बीजेपी इस बार छिंदवाड़ा में जीत को लेकर पूरा दम लगाती नजर आएगी।

पिछले लोकसभा चुनाव का समीकरण

छिंडवाड़ा लोकसभा सीट के अंदर 7 विधानसभा सीट आती हैं, इनमें से सिर्फ एक पर बीजेपी की है बाकी 6 पर कांग्रेस के विधायक अपनी गद्दी जमाए हुए हैं।

हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Chunav 2024) में इस सीट पर BJP के प्रत्याशी नत्थन शाह ने नकुलनाथ को कड़ी टक्कर दी थी। बता दें कि नकुलनाथ को 5.47 लाख वोट मिले थे, वहीं नत्थन शाह को 5.09 लाख वोट मिले थे। यानी नकुलनाथ की जीत का अंतर महज 37,536 था। अगर पिछले चुनाव को देखा जाए तो बीजेपी कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे रही है।

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73 सालों में सिर्फ एक बार खिला कमल

पूरे प्रदेश में लंबे समय से केसरिया लहरा रहा है। लेकिन छिंदवाड़ा ही एक ऐसी जगह है, जहां BJP हर एक कोशिश करके देख चुकी है, लेकिन फिर भी कमलनाथ के इस पारंपरिक गढ़ में सेंध नहीं लगा पाई है।

छिंडवाड़ा लोकसभा सीट (Lok Sabha Chunav 2024) जबसे कांग्रेस के अस्तित्व में आई है, तब से  सिर्फ एक साल को छोड़कर हमेशा कांग्रेस का राज इस सीट पर रहा है।

1997 में यहां से बीजेपी के सुंदर लाल पटवा जीते थे, लेकिन इसके एक साल बाद ही यह सीट फिर से कांग्रेस की मुट्ठी में आ गई।

बता दें कि कमलनाथ का परिवार यहां 11 बार सांसद रह चुका है। खुद कमलनाथ 9 बार, एक बार कमलनाथ की पत्नी अलका नाथ और अभी वर्तमान में कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ यहां से सांसद हैं।

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छिंदवाड़ा लोकसभा सीट का जातीय समीकरण

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, इस सीट पर करीब 11.1 फीसदी अनुसूचित जाति, 36.2 फीसदी अनुसूचित जनजाति, 4.7 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं।

अगर ग्रामीण की बात करें तो 75.3 फीसदी और शहर की बात करें तो 24.7 फीसदी मतदाता हैं।

हालांकि पिछले सारे चुनावों के परिणाम पर नजर डालें तो जाति कोई भी हो, लेकिन चुनाव का परिणाम कांग्रेस के पक्ष में ही रहा है।

ऐसे में इस बार का लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Chunav 2024) दिलचस्प है कि क्या कांग्रेस के इस अभेद किले को बीजेपी भेद पाएगी या फिर से मैदान कांग्रेस ही बाजी मार जाएगी।

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