MP OBC Reservation 2025 Supreme Court Hearing Update: मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27% आरक्षण देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में 4 जुलाई, शुक्रवार को अहम सुनवाई हुई, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने राज्य सरकार से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने के लिए शपथ-पत्र (एफिडेविट) मांगा है। विशेष रूप से यह पूछा गया है कि वर्तमान में रोके गए 13% पदों पर नियुक्तियों में क्या बाधा है, और क्या इन पदों पर आरक्षण के साथ नियुक्ति संभव है।
पहले लंबित कानूनी प्रोसेस पूरी होगी
शुक्रवार को केस की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट नंबर 12 में हुई। यह केस सीरियल नंबर 35 पर सूचीबद्ध था। वकीलों ने एक बार फिर दलील दी कि मध्यप्रदेश में ओबीसी की आबादी 51% से अधिक है, लिहाज़ा 27% आरक्षण न्यायोचित है। लेकिन अदालत ने तत्काल आरक्षण लागू करने के आग्रह पर कोई फैसला नहीं दिया और साफ किया कि पहले लंबित कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।
70 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई
एमपी (MP OBC SC News) में ओबीसी पर 14 फीसदी से 27 प्रतिशत तक आरक्षण को लेकर करीब 70 याचिकाएं लगी थी, जो पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में थीं, लेकिन अब यह सभी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर हो चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट इन पर आगे एक साथ सुनवाई करेगा।
10 मिनट तक चली सुनवाई
ओबीसी महासभा की कोर कमेटी के सदस्य एडवोकेट धर्मेंद्र कुशवाह ने जानकारी दी कि सुनवाई करीब 10 मिनट तक चली, जिसमें सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल उपस्थित हुए। उन्होंने 27 फीसदी आरक्षण लागू करने का विरोध किया।
अंतरिम राहत पर जताई आपत्ति
याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से यह मांग की गई थी कि जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, तत्काल प्रभाव से 27% आरक्षण को अंतरिम रूप से लागू किया जाए, ताकि वर्तमान में रुके हुए 13% पदों पर नियुक्ति की जा सके। लेकिन इस अंतरिम राहत पर भी सरकारी पक्ष ने आपत्ति जताई।
क्या है पूरा मामला ?
साल 2019 में कमलनाथ सरकार ने मध्यप्रदेश विधानसभा में एक कानून पारित कर OBC आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने का फैसला किया था। इस कदम से प्रदेश में कुल आरक्षण 63% हो गया था। हालांकि, इस पर न्यायिक अड़चनें आने के कारण अब तक इसे लागू नहीं किया जा सका है।
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