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MP Nursing College Scam: नर्सिंग स्टाफ, डॉक्टर सहित 70 लोगों को आरोप पत्र जारी, कड़ी कार्रवाई की योजना बना रही सरकार

MP Nursing College Scam: उच्च न्यायालय समिति ने पिछले साल रद्द की थी 66 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता। मामले में अब कार्रवाई आगे बढ़ी, कुछ पर गाज गिरी।

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sanjay warude
MP Nursing College Scam

हाइलाइट्स

  • एमपी नर्सिंग फर्जीवाड़ा में बड़ी कार्रवाई
  • हाईकोर्ट ने अनसूटेबल घोषित किए थे कॉलेज
  • 66 नर्सिंग कॉलेजों की रद्द की थी मान्यता
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MP Nursing College Scam: मध्यप्रदेश के नर्सिंग घोटाले के मामले में स्वास्थ्य विभाग (Health Department) ने 70 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र (Charge sheet) जारी किए हैं। जिसके साथ ही उनकी विभागीय जांच भी शुरू की गई हैं। ये आरोप पत्र जीएमसी (GMC) के 12 से ज्यादा नर्सिंग स्टाफ (Nursing staff), डॉक्टरों और प्रदेश के कुल 70 लोगों को भेजे गए हैं। जिनपर सरकार कड़ी कार्रवाई की योजना बना रही है। स्वास्थ्य विभाग ने ये कार्रवाई नर्सिंग सत्यापन टीम की रिपोर्ट के आधार पर की है। इसमें अधिकांश कॉलेजों को सूटेबल बताने के आरोप लगाए गए हैं।

राधिक नायर से छिना प्राचार्य का पद

नर्सिंग घोटाले (Nursing Scam) भोपाल गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) की प्राचार्य राधिका नायर को पद से हटा दिया है। उनके स्थान पर लीला नलवंशी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनके अलावा भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (Bhopal Gandhi Medical College ) में कई योग्य उम्मीदवार हैं, इनमें स्मिता टिक्की, रजनी नायर, निर्मला अब्राहम, रजनी पारे शामिल हैं।

प्राचार्य लीला की योग्यता पर उठे सवाल

नर्सिंग कॉलेज प्राचार्य के लिए 15 साल का अनुभव जरुरी है। इसमें 12 साल टीचिंग (Teaching) अनुभव, 5 साल नर्सिंग कॉलेज में टीचिंग अनुभव चाहिए। इसके अलावा एमएससी नर्सिंग (MSc Nursing) की डिग्री अनिवार्य है। लीला नलैवंशी के पास सिर्फ बीएससी नर्सिंग (BSc Nursing) की डिग्री है, जो नियमों के विपरीत है।

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क्या कहना हैं डीन का?

डीन डॉ. कविता एन सिंह ने कहा हैं कि लीला नलवंशी को तात्कालिक रूप से प्राचार्य (Principal) नियुक्त किया है। इस मामले की जांच पूरी होने पर नर्सिंग काउंसिल (Nursing Council) से परामर्श (Consultation) लेकर योग्य उम्मीदवार को प्राचार्य नियुक्त किया जाएगा।

ये है पूरा मामला

पिछले साल नर्सिंग कॉलेज सत्यापन (Nursing College Verification) टीम ने कई कॉलेजों को सूटेबल (Suitable) (योग्य) की रिपोर्ट दी थी। जांच में उच्च न्यायालय (High Court) की समिति ने इन कॉलेजों को अयोग्य घोषित कर दिया था। कई कॉलेजों के पास खुद की बिल्डिंग नहीं थी। प्रयोगशाला, अस्पताल जैसी सुविधाएं नहीं थीं। प्रदेश के 169 नर्सिंग कॉलेजों को सूटेबल घोषित किया था। इनमें भोपाल (Bhopal) के चार कॉलेज भी शामिल थे, लेकिन इनके पास उचित सुविधाएं नहीं थीं। न्यायालय ने इन कॉलेजों की जांच को लेकर सवाल उठाए थे। पुनः जांच के बाद 66 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता रद्द की गई।

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