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MP: अब महिलाओं के हाथ में होगी कमर्शियल वाहनों की स्टेयरिंग, परिवहन विभाग देगा निशुल्क ट्रेनिंग

MP: अब महिलाओं के हाथ में होगी कमर्शियल वाहनों की स्टेयरिंग, परिवहन विभाग देगा निशुल्क ट्रेनिंग MP: Now the steering of commercial vehicles will be in the hands of women, the transport department will give free training n

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Bansal Digital Desk
MP: अब महिलाओं के हाथ में होगी कमर्शियल वाहनों की स्टेयरिंग, परिवहन विभाग देगा निशुल्क ट्रेनिंग

भोपाल। मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक सराहनीय कदम उठाया है। विदेशों की तर्ज पर प्रदेश में अब महिलाएं भी कमर्शियल वाहन (बस) चलाएंगी। प्लानिंग के तहत सरकार अलग-अलग चरणों में महिलाओं को वाहन चलाने की ट्रेनिंग निशुल्क देगी और उन्हें रोजगार भी उपलब्ध कराएगी। परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत (Govind Singh Rajput) ने कहा कि प्रदेश सरकार के द्वारा महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी।

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शुरूआत में 300 महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी

इसके लिए परिवहन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। शुरुआत में बारह शहरों में 300 महिलाओं को कमर्शियल वाहन चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह ट्रेनिंग चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग शहरों में दी जाएगी। परिवहन विभाग ने क्षेत्रीय अधिकारियों को इस को लेकर दिशा निर्देश भी दे दिए हैं। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि वाहन चलाने की ट्रेनिंग को लेकर आदिवासी महिलाओं में उत्साह है। ज्यादातर आदिवासी महिलाओं ने ही ट्रेनिंग के लिए आवेदन किया है।

देश में कई महिलाएं कमर्शियल वाहन चलाती हैं

बतादें कि परिवहन विभाग इच्छुक महिलाओं को मुफ्त ट्रेनिंग के साथ-साथ उनके रहने और खाने की भी पूरी व्यवस्था करेगा। देश में कई ऐसे राज्य हैं जहां महिलाएं कमर्शियल वाहन चला रही हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर ओडिशा के भुवनेश्वर की रहने वाली एक महिला बस ड्राइवर का वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में मोनालिसा नामक एक महिला साड़ी पहन कर वॉल्वो जैसी भारी बस को ड्राइव करती दिख रही हैं। इस वीडियो को यू ट्यूब पर अब तक 12 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं।

प्रतीक्षा दास बी.टेक करने के बाद बस चलाती हैं

मोनालिसा के अलावा 24 साल की प्रतीक्षा दास मुंबई में बस चलाती हैं। मलाड के ठाकुर कॉलेज से अपनी मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने वाली प्रतीक्षा ने सोचा कि वह आरटीओ अधिकारी बनेंगी, यही वजह रही कि इन्होंने बस चलाना सीखा। दरअसल आरटीओ अधिकारी बनने के लिए इन्हें भारी वाहन चलाने के लाइसेंस की आवश्यकता थी, क्योंकि यह उस पद के लिए मानक है। इसी मानक को पूरा करने के लिए इन्होंने भारी वाहनों को चलाना सीखा।इन दोनों के अलावा देश में और भी कई महिलाएं हैं जो कमर्शियल वाहन चलाती हैं।

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