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बैतूल में दिखा 'दस' का दम: BJP ने दर्ज की लगातार 10वीं जीत, 3.78 लाख वोटों से चुनाव जीते दुर्गादास उईके

MP Lok Sabha Result 2024: बैतूल में दिखा 'दस' का दम: BJP ने दर्ज की लगातार 10वीं जीत, 3.78 लाख वोटों से चुनाव जीते दुर्गादास उईके

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Preetam Manjhi
बैतूल में दिखा 'दस' का दम: BJP ने दर्ज की लगातार 10वीं जीत, 3.78 लाख वोटों से चुनाव जीते दुर्गादास उईके

हाइलाइट्स

  • बैतूल में दिखा 'दस' का दम
  • BJP ने दर्ज की लगातार 10वीं जीत
  • 3.78 लाख वोटों से चुनाव जीते दुर्गादास उईके
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MP Lok Sabha Result 2024: लोकसभा चुनाव 2024 में बैतूल लोकसभा सीट पर फिर एक बार बीजेपी ने बाजी मार ली है। बीजेपी प्रत्याशी दुर्गादास उइके ने 3 लाख 79 हजार वोटों से जीत हासिल की है।

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बैतूल लोकसभा सीट इस बार के चुनाव में चर्चा का विषय बनी रही। इस सीट पर मध्यप्रदेश के दूसरे चरण में 26 अप्रैस को वोटिंग हुई थी। बैतूल लोकसभा सीट पर कुल 72.65% मतदान हुआ था।

बीजेपी प्रत्याशी

बैतूल लोकसभा सीट पर बीजेपी ने दुर्गादास उइके को चुनावी मैदान में उतारा था। डीडी उइके ने 2019 के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश के बैतूल से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की थी। इस बार भी दुर्गादास उइके ने 3.78 लाख वोटों से जीत हासिल की है।

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कांग्रेस प्रत्याशी

कांग्रेस ने इस बार लोकसभा चुनाव (MP Lok Sabha Result 2024) में रामू टेकाम को अपना उम्मीदवार बनाया था। रामू टेकाम ने 2019 का चुनाव भी लड़ा था। वे 2019 के चुनाव में हार गए थे।

बैतूल आदिवासी बहुल लोकसभा सीट है और टेकाम मध्यप्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके थे।

बैतूल लोकसभा सीट का इतिहास

बैतूल लोकसभा सीट के राजनीतिक इतिहास की बात की जाए तो , इस सीट को बैतूल, हरदा, और हरसूद लोकसभा सीट के नाम से जाना जाता है।

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बता दें कि इस लोकसभा सीट की भौगोलिक सीमा 3 बार बदल चुकी है। पहले बैतूल और छिंदवाड़ा जिले की कुछ हिस्सों को मिलाकर इसे संसदीय क्षेत्र बनाया गया था।

इसके बाद 1977 में हुए सीमांकन के बाद होशंगाबाद और हरदा जिले को जोड़ दिया गया था। बैतूल लोकसभा सीट 1951 के पहले चुनावों से ही अस्तित्व में रही है।

यहां के पहले सांसद कांग्रेस के भीकूलाल चांडक थे। 1957, 1962, 1967 और 1971 के चुनावों तक यहां कांग्रेस की मजबूत पकड़ रही।

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लेकिन इसके बाद 1977 के चुनावों में भारतीय लोकदल के सुभाष चंद्र अहूजा ने पहली बार यह सीट कांग्रेस से छीन ली थी।

1980 के चुनावों में कांग्रेस ने यहां जोरदार वापसी की और गुफरान ए आजम यहां के पहले अल्पसंख्यक सांसद बने।

1984 में पूर्व ओलंपियन अशलम शेरखान ने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी, लेकिन 1989 में पहली बार बीजेपी ने बैतूल में जोरदार एंट्री मारी।

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पार्टी के अल्पसंख्यक चेहरे आरिफ बेग ने अशलम शेरखान को हराकर बीजेपी को पहला चुनाव जिताया था।

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