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MP Law Colleges: एमपी के विधि कॉलेजों पर संकट के बादल, खतरे में संबद्धता, उच्च शिक्षा विभाग ने 3 दिन में मांगी रिपोर्ट

MP Law Colleges BCI Rules Violation:  मध्य प्रदेश के विधि शिक्षा संस्थानों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी शासकीय विश्वविद्यालयों से उन लॉ कॉलेजों की जानकारी मांगी है जो बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों का पालन नहीं कर रहे।

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Vikram Jain
MP Law Colleges: एमपी के विधि कॉलेजों पर संकट के बादल, खतरे में संबद्धता, उच्च शिक्षा विभाग ने 3 दिन में मांगी रिपोर्ट

हाइलाइट्स

  • एमपी में कई लॉ कॉलेज नहीं कर रहे BCI के नियमों का पालन।
  • उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों से मांगी लॉ कॉलेजों की सूची।
  • LLB और BA-LLB कॉलेजों की मान्यता पर मंडराया संकट।
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MP Law Colleges BCI Rules Violation: मध्य प्रदेश के कई विधि कॉलेजों की संबद्धता खतरे में है। उच्च शिक्षा विभाग ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों का पालन नहीं करने वाले कॉलेजों की सूची मांगी है। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों से तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। विश्वविद्यालयों को तीन दिन में रिपोर्ट सौंपनी होगी। नियमों की अनदेखी करने वाले कॉलेजों पर कार्रवाई हो सकती है। जानकारी के अनुसार प्रदेश के कई लॉ कॉलेज बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।

लॉ कॉलेजों की मान्यता पर मंडराया संकट

मध्य प्रदेश में शासकीय विश्वविद्यालयों से संबद्धता प्राप्त लॉ कॉलेजों की मान्यता पर खतरा मंडरा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त निशांत वरवड़े ने सभी विश्वविद्यालयों को पत्र भेजा है। इसमें कुलसचिवों से पूछा गया है कि उनके अधीन ऐसे कितने कॉलेज हैं जो एलएलबी और बीए एलएलबी को संकाय रूप में चला रहे हैं, लेकिन रूल्स ऑफ लीगल एजुकेशन के नियमों का पालन नहीं कर रहे।

तीन दिन में मांगी गई रिपोर्ट

आयुक्त ने विश्वविद्यालयों से तीन दिन के भीतर ऐसे कॉलेजों की सूची तैयार कर भेजने को कहा है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा समय-समय पर जानकारी मांगी जाती है, जिससे साफ हो कि विधि शिक्षा मानकों पर खरी उतर रही है या नहीं। खास तौर पर कॉलेजों का रुल्स ऑफ लीगल एजुकेशन के अनुरूप से होना अनिवार्य होता है। इसके चलते अब लॉ कॉलेजों को फिर से अपने समस्त जानकारी उच्च शिक्षा विभाग को देना होगा।

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विधि कॉलेजों के संचालन के लिए अनिवार्य नियम

बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा बनाए गए रूल्स ऑफ लीगल एजुकेशन के अनुसार ही किसी भी कॉलेज को कानूनी शिक्षा देने की अनुमति होती है। इनमें पाठ्यक्रम, शिक्षक, बुनियादी ढांचा, समय सारणी और प्रवेश प्रक्रिया के स्पष्ट दिशा-निर्देश शामिल हैं। कुछ मुख्य नियम और विनियम इस प्रकार हैं।

1. संबद्धता (Affiliation)

किसी भी विधि कॉलेज को संचालित करने से पहले, उसे एक मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त करनी अनिवार्य है। इसके लिए विश्वविद्यालय की निरीक्षण टीम कॉलेज का भौतिक और शैक्षणिक मूल्यांकन करती है। निरीक्षण की संतुष्टि के बाद संबंधित राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना आवश्यक होता है।

2. प्रवेश प्रक्रिया (Admission Criteria)

विधि पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए छात्रों को कुछ न्यूनतम पात्रता मानदंडों को पूरा करना होता है।

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  • बीए एलएलबी (5 वर्षीय पाठ्यक्रम) के लिए: मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं उत्तीर्ण होना चाहिए।
  • एलएलबी (3 वर्षीय पाठ्यक्रम) के लिए: किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री होना अनिवार्य है।

3. पाठ्यक्रम और समय सारणी (Curriculum & Timing)

विधि कॉलेजों को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार ही शिक्षण कार्य संचालित करना चाहिए।

  • हर सप्ताह कम से कम 30 घंटे का शिक्षण होना चाहिए।
  • प्रतिदिन कम से कम 5 घंटे की कक्षा और 30 मिनट का अवकाश शामिल होना चाहिए।
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4. शिक्षक नियुक्ति (Faculty Requirement)

कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने हेतु, कॉलेजों को योग्य और अनुभवी शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी। शिक्षक बार काउंसिल द्वारा मान्यता प्राप्त डिग्रीधारी होने चाहिए।

5. अधोसंरचना (Infrastructure)

विधि कॉलेजों में छात्रों की आवश्यकताओं के अनुसार पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए, जैसे:

  • पुस्तकालय (सभी प्रमुख विधिक पुस्तकों और जर्नल्स सहित)
  • व्याख्यान कक्ष, मूट कोर्ट हॉल, आईटी सुविधाएं, और अन्य आधुनिक संसाधन
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6. अध्ययन और कौशल विकास (Study & Skill Development)

विधि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान, मूट कोर्ट, क्लाइंट काउंसलिंग, लीगल एड क्लीनिक जैसे माध्यमों से वास्तविक अनुभव भी प्रदान किया जाना चाहिए। इससे छात्र कानून की बेहतर समझ और पेशेवर दक्षता हासिल कर सकें।

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