हाइलाइट्स
- ग्वालियर में 28 साल सेवा देने वाले कर्मचारी को मिला न्याय।
- हाईकोर्ट ने मृत कर्मचारी की बर्खास्तगी को बताया अवैध।
- परिवार को तीन माह में पेंशन और सेवा लाभ देने का आदेश।
Gwalior High Court Dismissed Employee Pension Judgment: ग्वालियर हाईकोर्ट ने एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जो सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए राहत लेकर आया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के दिवंगत कर्मचारी देवेंद्र सिंह परमार की बर्खास्तगी को अवैध माना जाए और उनके परिजनों को सेवा लाभ प्रदान किया जाए। ऐसा न करने पर सरकार को 6% वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करना होगा। परमार की नियुक्ति स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा नियमित की गई थी, इसके बावजूद उन्हें बिना विभागीय जांच के सेवा से हटाया गया था। अदालत ने दोनों पक्ष को सुनने के बाद फैसला सुनाया है।
1989 में हुई थी नियुक्ति, 28 साल दी सेवा
ग्वालियर हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के दिवंगत कर्मचारी की बर्खास्तगी को अवैध घोषित कर दिया है। दरअसल, देवेंद्र सिंह परमार की नियुक्ति 1989 में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में अस्थायी रूप से की गई थी। बाद में विभागीय स्क्रीनिंग कमेटी ने उनकी नियुक्ति को नियमित कर दिया था। उन्होंने लगभग 28 सालों तक ईमानदारी से सेवा दी।
2017-18 में हुई बर्खास्तगी, सामने आई ये वजह
विभाग ने 2017-18 में उन्हें दो आधारों पर देवेंद्र सिंह परमार पर बर्खास्त कर दिया था। पहला, कि उनकी नियुक्ति अधिकृत अधिकारी द्वारा नहीं की गई थी, और दूसरा, कि वे हिंदी टाइपिंग की पात्रता पूरी नहीं करते थे। बर्खास्तगी बिना किसी विभागीय जांच के की गई।
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कोर्ट ने माना बर्खास्तगी अवैध
परमार की 2019 में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी मुन्नीदेवी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने माना कि नियुक्ति को पहले ही स्क्रीनिंग कमेटी वैध ठहरा चुकी थी और सरकार ने भी उसे स्वीकार किया था। ऐसे में बिना जांच बर्खास्तगी अवैध है।
पेंशन और अन्य लाभ देने का आदेश
ग्वालियर हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि परमार की सेवा 1989 से लेकर 2019 तक मानी जाए और उनके परिवार को तीन माह में पेंशन व अन्य सेवा लाभ दिए जाएं। यदि तय समय में भुगतान नहीं होता है तो सरकार को 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।