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MP High Court: दावेदार की मौत हो गई, फिर गवाही कैसे होगी ? ग्वालियर कोर्ट ने कहा- सिविल जज को कानूनी ज्ञान की जरूरत

Madhya Pradesh High Court Gwalior Bench Civil Judge Case: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच की अदालत ने एक सीनियर डिवीजन सिविल जज वर्षा भलावी को लेकर सख्त टिप्पणी की है।

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sanjay warude
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Madhya Pradesh High Court Gwalior Bench Civil Judge Case: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच की अदालत ने एक सीनियर डिवीजन सिविल जज वर्षा भलावी को लेकर सख्त टिप्पणी की है।

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सिविल केस के एक मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब दावेदार की मौत हो चुकी है तो फिर गवाही कैसे होगी कोर्ट ने यह भी कहा कि सिविल जज को कानून का ज्ञान नहीं है। उन्हें कानूनी ट्रेनिंग की जरुरत है।

दरअसल, यह पूरा मामला ग्वालियर के ग्राम बिल्हेटी की एक जमीन से जुड़ा है। मुन्नीदेवी नामक महिला ने अपनी पैतृक संपत्ति में एक-तिहाई हिस्से की मांग को लेकर एक सिविल केस दायर किया था। केस की सुनवाई शुरू होने से ठीक पहले, 12 मई 2024 को मुन्नीदेवी का निधन हो गया था।

मौत से पहले बेटे के नाम की वसीयत

मुन्नीदेवी ने अपनी मृत्यु से कुछ दिन पहले, यानी 4 मई 2024 को एक वसीयत बनवाई थी, जिसमें उन्होंने अपने बेटे पवन को अपना एकमात्र उत्तराधिकारी घोषित किया था। इस वसीयत के आधार पर पवन ने कोर्ट में खुद को केस में पक्षकार बनाने के लिए आवेदन दिया था।

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सिविल जज ने खारिज किया आवेदन

दावेदार पवन के आवेदन को सिविल जज वर्षा भलावी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मृतक के अन्य वारिस भी हैं, जिनका उल्लेख आवेदन में नहीं किया गया गया है। जज ने 8 जनवरी 2025 को यह आदेश पारित किया था।

सिविल जज के फैसले पर कोर्ट हैरान

पवन ने अपने वकील अनिल श्रीवास्तव के जरिए हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। जब मामले की सुनवाई शुरू हुई तो हाईकोर्ट ने सिविल जज के फैसले पर हैरानी जताई और सिविल जज को लेकर एक आदेश जारी कर दिया।

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कोर्ट ने रद्द किया सिविल जज का आदेश

कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि जब वादी मुन्नीदेवी की मृत्यु हो गई, तो फिर गवाही कैसे होगी ? हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर वादी के प्रतिनिधि नहीं आते हैं, तो केस को खारिज कर देना चाहिए था। कोर्ट ने पवन को केस में पक्षकार बनाने का निर्देश दिए।

ट्रेनिंग सेंटर निदेशक को भेजा आदेश

हाईकोर्ट ने सिविल जज का आदेश रद्द कर दिया है और ​सिविल जज के रद्द आदेश की एक कॉपी प्रधान जिला न्यायाधीश, ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजने का निर्देश दिया है।

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