हाइलाइट्स
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में तलाक की अर्जी खारिज
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हाईकोर्ट ने पत्नी को बताया आदर्श हिंदू महिला
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हाईकोर्ट ने की महिला की तारीफ
MP High Court Divorce Case Ideal Wife: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एक तलाक की अर्जी खारिज कर दी। न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदी की बेंच ने एक पति की अपील को सुना जिसमें उसने निचली अदालत के तलाक से इनकार करने के आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने महिला को आदर्श भारतीय पत्नी बताते हुए उसकी खूब तारीफ की, क्योंकि वो 19 साल से पति के छोड़े जाने के बाद भी अपना पत्नी धर्म निभा रही थी और बूढ़े सास-ससुर की सेवा कर रही थी।
पति ने पत्नी पर लगाए आरोप
पति ने अपनी पत्नी पर आरोप लगाया कि पत्नी उसे पसंद नहीं करती। वो उस शराब पीने और दूसरी महिलाओं से संबंध होने का आरोप लगाती है। पत्नी गर्भावस्था में खुश नहीं थी और बच्चे के जन्म के बाद वो मायके चली गई थी। वहीं पत्नी ने पति के इन सभी आरोपों को झूठा बताया और कहा कि पति का एक महिला सहकर्मी से प्रेम प्रसंग था, जबकि वो हमेशा वैवाहिक दायित्व को निभाने के लिए तैयार रही। पत्नी ने कहा कि पति झूठ के आधार पर तलाक की मांग कर रहा है।
2006 से अलग रह रहे पति-पत्नी
दंपति की शादी नवंबर 1998 में मध्यप्रदेश के इंदौर में हुई थी। 3 साल बाद 2002 में उन्हें एक बेटा हुआ। पत्नी अपने ससुराल वालों के साथ संयुक्त परिवार में रहती है, जबकि उसका पति विशेष सशस्त्र बल में कॉन्स्टेबल है और भोपाल में रहता है। दोनों 2006 से अलग रह रहे हैं।
तलाक की याचिका खारिज
इंदौर बेंच के जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी ने क्रूरता के आधार पर पति की तलाक की याचिका खारिज कर दी और लोअर कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू मान्यता के अनुसार विवाह एक पवित्र, शाश्वत और अविभाज्य बंधन है। महिला का आचरण धर्म, सांस्कृतिक मूल्यों और वैवाहिक बंधन की पवित्रता में निहित है।
‘एक आदर्श भारतीय पत्नी’
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी ने अपने पत्नी धर्म को निभाया और हर उस जिम्मेदारी को पूरा किया, जो एक पत्नी, बहू और मां के रूप में उसे निभानी चाहिए थी। कोर्ट ने महिला को एक आदर्श भारतीय पत्नी बताते हुए उसकी तारीफ की।
हाईकोर्ट ने कहा कि 19 साल से पति के छोड़े जाने के बाद भी वो अपने पत्नी धर्म पर अडिग है। उसने अपनी वैवाहिक जीवन की निशानियों को भी नहीं छोड़ा है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एक आदर्श भारतीय पत्नी अपने पति द्वारा छोड़ दिए जाने के बाद भी शक्ति, गरिमा और सद्गुण का प्रतीक बनी रहती है।
कोर्ट ने कहा-महिला ने अपना कद बहुत ऊंचा कर लिया
MP हाईकोर्ट बेंच ने कहा कि पति की गैरमौजूदगी के बाद भी पत्नी अपने ससुराल वालों के प्रति समर्पित रही और उनकी देखभाल और सेवा उतने ही प्यार से करती रही, जैसे कि वह अपने पति की उपस्थिति में करती। ऐसा करके उसने अपना नैतिक कद बहुत मजबूत कर लिया। उसने खुद को एक आदर्श हिंदू महिला साबित किया।
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