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MP DR Case: एमपी के 4.50 लाख पेंशनर्स को DR देने से पहले क्यों ली जा रही CG से सहमति? HC का केंद्र, राज्य सरकार को नोटिस

MP DR Case High Court Notice 2025: मध्य प्रदेश में 1 नवंबर 2000 के बाद के करीब 4.50 लाख पेंशनर्स की महंगाई राहत (DR) का मामला गरमा गया है। इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

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sanjay warude
MP DR Case

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हाइलाइट्स

  • 19 साल से परेशान हो रहे पेंशनर्स
  • बकाया डीआर की कर रहे मांग
  • सरकार पर मनमानी का आरोप
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MP DR Case High Court Notice 2025: मध्य प्रदेश में 1 नवंबर 2000 के बाद के करीब 4.50 लाख पेंशनर्स (pensioners) की महंगाई राहत (DR) का मामला गरमा गया है। इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने कड़ा रुख अपनाया है।

हाई कोर्ट (High Court) ने गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs), केंद्र सरकार (Central Government), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के सामान्य प्रशासन (General Administration) और वित्त विभागों (Finance Departments) को नोटिस भेजा है। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh Government) से यह भी पूछा है कि महंगाई राहत देने से पहले उसकी सहमति क्यों ली जा रही है ?

Madhya Pradesh DR Case

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, मध्य प्रदेश पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना (Amod Saxena, State President of Madhya Pradesh Pensioners Welfare Association) और नर्मदापुरम अध्यक्ष दिनेश चतुर्वेदी (Narmadapuram President Dinesh Chaturvedi) ने अक्टूबर 2024 में हाई कोर्ट (High Court) में एक याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बंटवारे (sharing) के बाद के 4.50 लाख पेंशनर्स (pensioners) को महंगाई राहत (Dearness Relief) देने से पहले दोनों राज्यों के बीच सहमति लेने की प्रक्रिया को चुनौती दी है।

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8 सितंबर को अगली सुनवाई

संगठन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी (Patron of the organization Ganesh Dutt Joshi) और भोपाल अध्यक्ष सुरेश शर्मा (Bhopal President Suresh Sharma) का आरोप है कि प्रदेश के पेंशनर्स को महंगाई राहत (Dearness Relief) देने में भेदभाव किया जा रहा है और सरकार अपने ही आदेशों का पालन नहीं कर रही है। उन्होंने मांग की है कि सभी बकाया महंगाई राहत जल्द से जल्द जारी की जाए। इस मामले में वकील कपिल शर्मा ने पैरवी की है। 23 जुलाई 2025 को सुनवाई के बाद, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक जैन ने ये नोटिस जारी किए हैं। अब अगली सुनवाई 8 सितंबर 2025 को होगी।

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सवाल: इस सर्कुलर में क्या नहीं था ?

जवाब: मध्य प्रदेश वित्त विभाग के इस सर्कुलर में 1 नवंबर 2000 के बाद के मध्य प्रदेश के पेंशनर्स को शामिल नहीं किया गया था। इस सर्कुलर में कहीं भी छत्तीसगढ़ से सहमति लेने का कोई प्रावधान नहीं था। पेंशनर्स की महंगाई राहत का भी इसमें कोई जिक्र नहीं था।

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सवाल: पेंच कहां फंसा ?

जवाब:

  • साल 2005 तक पेंशनर्स को बिना किसी रुकावट के नियमित रूप से महंगाई राहत मिलती रही।
  • साल 2006 में मप्र के तत्कालीन मुख्य सचिव एपी श्रीवास्तव ने छत्तीसगढ़ की सहमति पर जोर देना शुरू किया।
  • तब से, मध्य प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ से सहमति लिए बिना महंगाई राहत देना बंद कर दिया है।
  • पेंशनर्स एसोसिएशन के सवालों पर भी मध्य प्रदेश सरकार अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई।

सवाल: किन पेंशनर्स को नुकसान हो रहा है ?

जवाब:

  • 1 नवंबर 2000 के बाद के मध्य प्रदेश के 4.50 लाख पेंशनर्स इस समस्या से जूझ रहे हैं।
  • हर महीने उन्हें कम से कम 1500 से 2000 रुपये और अधिकतम 6000 से 7000 रुपये का नुकसान हो रहा है।
  • साल 2006 से अब तक, हर पेंशनर्स को करीब 1.50 लाख से 2 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है।

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सवाल: कितनी मिल रही है महंगाई राहत ?

जवाब:

  • 1 जुलाई 2024 से 53% महंगाई राहत दी जानी थी।
  • लेकिन, पेंशनर्स को यह 53% महंगाई राहत 1 मार्च 2025 से मिलनी शुरू हुई है।
  • इस वजह से उन्हें सात महीने की महंगाई राहत का नुकसान हुआ है।

सवाल: कब-कब दी जाती है राहत ?

जवाब:

  • राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुसार, हर छह महीने में महंगाई राहत (DR) देने का प्रावधान है।
  • इसके तहत, हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को महंगाई राहत दी जानी चाहिए।
  • पहले यह हर तीन महीने (क्वाटरली) में दी जाती थी।
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