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Bhind Villagers Humanity: MP में मानवता की मिसाल, मासूम बच्ची के इलाज के लिए ग्रामीणों ने घर का राशन बेचकर जुटाए रुपए

मध्यप्रदेश के भिंड में लोगों ने इंसानियत और एकता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है। यहां हादसे में 5 साल की मासूम गंभीर रूप से घायल हुई, तो गांव वालों ने एकजुट होकर घर का राशन बेचा और बच्ची की जान बचाई।

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Vikram Jain
Bhind Villagers Humanity: MP में मानवता की मिसाल, मासूम बच्ची के इलाज के लिए ग्रामीणों ने घर का राशन बेचकर जुटाए रुपए

हाइलाइट्स

  • भिंड में ग्रामीणों ने जमा किए बच्ची के इलाज के लिए पैसे।
  • ग्रामीणों ने दिखाई एकता, राशन बेचकर जुटाए 30 हजार रुपए।
  • छत से गिरकर घायल हुई थी बच्ची, दिल्ली में चल रहा इलाज।
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MP Bhind Kavish Bhadauriya Villagers Humanity Story: मध्यप्रदेश के भिंड में 5 साल की बच्ची के इलाज के लिए ग्रामीणों ने एकता की अनोखी मिसाल पेश की। छत से गिरने के बाद मासूम को गंभीर चोटें आईं और दिल्ली में इलाज के लिए करीब 5 लाख रुपए की जरूरत थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर दोनों गांवों के ग्रामीणों ने मिलकर राशन बेचकर 30 हजार रुपए जुटाए, साथ ही सोशल मीडिया के जरिए एक लाख रुपए से अधिक ऑनलाइन सहयोग भी मिला। बच्ची का पहला ऑपरेशन हो चुका है और आगे का इलाज जारी है।

छत से गिरकर घायल हुई थी मासूम कविश

दरअसल, भिंड जिले के अछाई गांव के धर्मेंद्र भदौरिया की 5 साल की बेटी कविश भदौरिया कुछ दिन पहले घर की छत से गिर गई थी। इस हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हुई, सिर में गंभीर चोट लगने के कारण परिवार के लोग मासूम को ग्वालियर के अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां डॉक्टर ने बच्ची को दिल्ली रेफर कर दिया। इसके बाद उसे तुरंत दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि इलाज में लगभग 5 लाख रुपये तक का खर्च आएगा।

परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, इसके बाद सुनारपुरा और अछाई गांव के लोगों ने एकजुटता दिखाते हुए बच्ची के इलाज की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। सभी ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए परिवार की मदद करने का फैसला लिया।

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PDS राशन बेचकर जुटाए 30 हजार रुपए

दोनों गांवों की पंचायतों ने मिलकर बच्ची की जान बचाने के लिए रुपए जुटाने का निर्णय लिया। लोगों ने फैसला लिया कि सरकारी योजना के तहत मिलने वाला PDS (राशन) गेहूं और चावल बेचकर पैसे इकठ्ठा किए जाएं। ग्रामीणों ने 22 क्विंटल गेहूं और चावल जमा किया और इसे बेचकर 30,000 रुपए जमा किए। इस राशि को तुरंत बच्ची के पिता को इलाज के लिए दे दिया गया। यह राशि बच्ची के शुरुआती इलाज में काम आई।

दिल्ली में हुआ पहला ऑपरेशन

गुरुवार को डॉक्टरों ने कविश का पहला ब्रेन सर्जरी ऑपरेशन किया। डॉक्टरों के मुताबिक, “बच्ची अगले 24 घंटों में होश में आ जाएगी।” चार दिन बाद उसका दूसरा ऑपरेशन किया जाएगा। डॉक्टरों और परिजनों के अनुसार बच्ची की हालत में सुधार की उम्मीद है।

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सोशल मीडिया से मिली एक लाख रुपए की मदद

गांव के निवासी रिपुसूदन सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर लोगों से मदद मांगी। ग्रामीण की इस पहल से लगभग 1 लाख रुपए ऑनलाइन जुटाए गए। कई लोगों ने बच्ची की स्थिति जानकर तुरंत सहयोग दिया। गांव और सोशल मीडिया दोनों ने मिलकर इलाज की राह आसान की है।

मानवता की अनोखी मिसाल

ग्रामीणों का कहना है कि "बच्ची पूरे गांव की बेटी है", इसलिए जब पैसे की जरूरत पड़ी, तो हर घर मदद के लिए तैयार हो गया। सुनारपुरा और अछाई गांव का यह कदम पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

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