जानिए कैसे दो धुर विरोधी अजय सिंह और राजेश चौधरी बन गए पक्के दोस्त

राजनीति में दुश्मनी कब दोस्ती में बदल जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसी ही एक तस्वीर मध्यप्रदेश की सियासत से सामने आई है। जो इन दिनों सियासी गलियारों का चर्चा बनी हुई है। कांग्रेस के दो ऐसे नेताओं की मुलाकात हुई जो एक वक्त एक दूसरे के धुर विरोधी रहा करते थे। हम बात कर रहे है मध्य प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और चौधरी राकेश सिंह के बीच मुलाकात की। दोनों नेता भले ही कांग्रेस पार्टी में है लेकिन दोनों के बीच की दूरियां किसी से छुपी नही है। दोनों एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं। लेकिन जो तस्वीर सामने आई है उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि चौधरी राकेश सिंह और अजय सिंह के बीच अब पक्की दोस्ती हो चुकी है।

दरअसल, चौधरी राकेश सिंह और अजय सिंह के बीच मुलाकात हुई। इस दौरान अजय सिंह ने चौधरी राकेश सिंह का मुंह मीठा कराया। दोनों के बीच बंद कमरे में बातचीत भी हुई। दोनों की मुलाकात को प्रदेश की राजनीति में एक बड़े सियासी घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों की मुलाकात को 2023 के विधानसभा चुनावों से भी जोड़ा जाने लगा है। दोनों नेता अपने बीच हुए विवादों को भुलाकर एक होते नजर आ रहे है।

क्या थी दोनों के बीच की लड़ाई

अजय सिंह और चौधरी राकेश सिंह के बीच लड़ाई का एक पुराना किस्सा है। मामला 2013 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले का है। उस समय अजय सिंह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हुआ करते थे। तो वही चौधरी राकेश सिंह उपनेता प्रतिपक्ष थे। अजय सिंह ने शिवराज सरकार के खिलाफ विधानसभा सभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान किया, सबकुछ कांग्रेस की रणनीतिक के हिसाब से चल रहा था। जैसे ही अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से अनुमति मांगी गई तो चौधरी राकेश सिंह ने पाला बदलते हुए भाजपा के खेमें जा पहुंचे। विधायक के दलबदल की यह घटना प्रदेश की राजनीति की बड़ी घटना थी। इसके बाद दोनों के बीच अदावत शुरू हो गई। बाद में राकेश सिंह बीजेपी में शामिल हो गए। हालांकि बाद में वह फिर से कांग्रेस में आ गए। लेकिन दोनों के बीच मनमुटाव बना रहा।

जमी सियासी बर्फ पिघली

दोनों नेताओं के बीच जमी सियायी बर्फ अब पिघलने लगी है। 2023 के चुनाव से पहले दो धुरविरोधी एक हो गए हैं। बता दें कि अजय सिंह विंध्य से आते हैं, जबकि चौधरी राकेश सिंह चंबल से आते हैं। दोनों दिग्विजय सिंह सरकार में मंत्री रहे। दोंनों का एक साथ आना कांग्रेस के लिए खुशी की बात है। क्योंकि दोनों की अपने-अपने क्षेत्र में अच्छी पकड़ मानी जाती है। अब ऐसे में देखना होगा की 9 साल बाद बनी यह जुगल जोड़ी आने वाले दिनों में क्या कमाल दिखाती है।

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