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MP Govt Wheat Procurement: गेहूं की ऊंची कीमत के चुनावी वादे में कहीं फंस न जाए सरकार, केंद्र का नियम खड़ी करेगा मुसीबत, किसान भी नाराज!

MP Govt Wheat Procurement: गेहूं पर बोनस की घोषणा के बाद भी किसान क्यों है नाराज, वजह जानने बंसल न्यूज डिजिटल पर पढ़ें पूरी खबर

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Rahul Sharma
MP Govt Wheat Procurement: गेहूं की ऊंची कीमत के चुनावी वादे में कहीं फंस न जाए सरकार, केंद्र का नियम खड़ी करेगा मुसीबत, किसान भी नाराज!

   हाइलाइट्स

  • सरकार गेहूं पर देगी 125 रुपये का बोनस
  • किसान को एक क्विंटल पर मिलेंगे 2400 रुपये
  • किसान संगठन 2700 रुपये की मांग पर अड़े
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MP Govt Wheat Procurement: मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं की सरकारी खरीदी में 125 रुपये बोनस देने का ऐलान कर दिया है। हालांकि इससे किसान खुश नहीं है।

वहीं केंद्र का एक नियम सरकारी खरीद में बोनस देने के निर्णय के आड़े आएगा। अब ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि गेहूं की ऊंची कीमत के चुनावी वादे को पूरा करने के फेर में कहीं सरकार खुद न फंस जाए।

   एक क्विंटल पर 2400 रुपये मिलेंगे

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सरकारी गेहूं खरीद (MP Govt Wheat Procurement) में किसानों को अधिक दाम मिल सके, इसलिए 11 मार्च को कैबिनेट बैठक में 125 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया गया है।

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गेहूं का MSP यानी न्यूनतम समर्थम मूल्य 2275 रुपये है। इस पर सवा सौ रुपए बोनस दिया जाएगा। यानी किसान को एक क्विंटल गेहूं पर अब 2400 रुपये मिलेंगे।

   किसानों की नाराजगी की ये वजह

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गेहूं उपार्जन (MP Govt Wheat Procurement) में 125 रुपये बोनस की घोषणा के बाद भी कोई किसान संगठन इससे खुश नहीं है।

दरअलस बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में गेहूं पर 2700 रुपये देने का वादा किया था। किसान संगठनों की मांग है कि सरकार अपना वादा पूरा करे।

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   केंद्र का ये नियम भी खड़ी करेगा मुसीबत

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सरकारी अनाज की खरीदी (MP Govt Wheat Procurement) पर किसानों को मिलने वाला पैसा केंद्र सरकार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के माध्यम से देती है।

साल 2014 में केंद्र सरकार एक नियम लेकर आई। जिसके अनुसार वे राज्य जो सरकारी गेहूं और धान खरीदी पर अपनी ओर से बोनस दे रहे हैं, वहां केंद्र सरकार ने FCI को खरीदी करने से मना कर दिया था।

   MP में बोनस देने की है पुरानी हिस्ट्री

ऐसा नहीं है कि प्रदेश के किसानों को पहली बार बोनस मिल रहा है। सरकारी खरीद (MP Govt Wheat Procurement) पर सबसे पहले 1998 में 25 रुपये का बोनस दिया गया था।

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उसके बाद इस व्यवस्था को शिवराज सरकार ने 2008 से 2013 तक चलाया। 2014 में केंद्र का नियम आने के बाद ये व्यवस्था बंद हो गई।

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साल 2018 में एमपी सरकार ने किसानों को 2017 और 2018 का इकट्ठा दो साल का बोनस दे दिया।

नियमों का हवाला देकर कमलनाथ सरकार के समय वर्ष 2019 से ये फिर बंद हो गया जो 2023 तक बंद ही रहा। अब साल 2024 की खरीद पर फिर सरकार ने बोनस देने का ऐलान कर दिया है।

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   हर बार लोकसभा चुनाव से पहले बोनस

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15 साल की बात करें तो हर बार लोकसभा चुनाव से पहले गेहूं उपार्जन (MP Govt Wheat Procurement) पर किसानों को बोनस दिया जाता रहा है। 2014 में चुनाव थे, वर्ष 2013 में बोनस दिया गया।

2019 में लोकसभा चुनाव थे, 2018 में किसान को बोनस दिया गया। 2024 में फिर लोकसभा चुनाव है, इस बार 125 रुपये प्रति क्विंटल किसान को बोनस मिलेगा।

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  क्या चुनाव में होगा नुकसान?

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गेहूं उपार्जन (MP Govt Wheat Procurement) को लेकर सरकार की वादा खिलाफी पर किसान नाराज तो है, पर इस बार लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा असर अयोध्या राम मंदिर निर्माण का रहने वाला है।

ऐसे में ये कहना मुश्किल होगा कि किसान की नाराजगी का चुनाव पर कितना असर पड़ेगा।

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   किसान संगठन कर रहे आंदोलन की तैयारी

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सरकार ने भले ही 125 रुपये बोनस देने का ऐलान कर दिया हो, लेकिन लगभग सभी किसान संगठन इससे नाराज हैं। किसानों संगठनों की मांग 2700 रुपये प्रति क्विंटल की ही है।

सरकार को अपना वादा याद दिलाने कई संगठन आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

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