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Menstrual Suppression : कम उम्र में ही मेन्स्ट्रुअल सप्रेशन ट्रीटमेंट ले रही युवतियां, क्या है, कैसे काम करती, कौन अपना सकता है, जानें सब कुछ

Menstrual Suppression : कम उम्र में ही मेन्स्ट्रुअल सप्रेशन ट्रीटमेंट ले रही युवतियां, क्या है, कैसे काम करती, कौन अपना सकता है, जानें सब कुछ menstrual-suppression-girls-taking-menstrual-suppression-treatment-at-an-early-age-what-it-is-how-it-works-who-can-adopt-it-know-everything-pds

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Preeti Dwivedi
Menstrual Suppression : कम उम्र में ही मेन्स्ट्रुअल सप्रेशन ट्रीटमेंट ले रही युवतियां, क्या है, कैसे काम करती, कौन अपना सकता है, जानें सब कुछ

नई दिल्ली। Menstrual Suppression महिलाओं में हर महीने आने वाले पीरिड्स की प्रक्रिया एक आम बात है। health news लेकिन इसमें होने वाला असहनीय दर्द और हार्मोनल इंबेलेंस के lif style साइड इफेक्ट को कोई नहीं समझता। यही कारण हैं कि महिलाओं के साथ—साथ युवतियां भी पीरियड्स बंद करने का ट्रीटमेंट ले रही हैं। अब बहुत सी महिलाएं मेन्स्ट्रुअल सप्रेशन के जरिए पीरियड्स रोक रही हैं। सबसे पहले आर्मी में काम करने वाली महिला अफसरों के लिए इसकी जरूरत महसूस की गई।पर क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरूआत कैसे हुई, क्या इसके उपयोग के बाद भी मां बनने का सुख उठाया जा सकता है। जानते हैं इससे जुड़ी पूरी जानकारी।

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आखिर क्यों महिलाएं ले रही इसका सहारा —
आपको बता दें इस ट्रीटमेंट की जरूरत उन महिलाओं और युवतियों के लिए महसूस हुई जो शारीरिक औ मानसिक रूप से विकलांग हैं। वो इसलिए क्योंकि उनके द्वारा शरीर की केयर, साफ—सफाई और देखरेख नहीं की जा सकती है। दूसरे नंबर पर आती हैं आर्मी की महिलाएं। आर्मी की महिलाओं के साथ देश की रक्षा का सवाल आता है। चूंकि इस माहवारी के दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल चेंजेस होते हैं। कई महिलाओं को चिड़चिड़ेपन की शिकायत भी होती है। इसलिए इन महिलाओं द्वारा भी पीरियड्स को रोकने संबंधी ट्रीटमेंट कराया जा रहा है।

शरीर में होते हैं ये बदलाव —
आपको बता दे एक स्वस्थ महिला अपनी लाइफ के लगभग 40 साल हर महीने पीरियड्स में बिताती है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में रिप्रोडक्टिव हॉर्मोन्स ऊपर-नीचे होते हैं। इस दौरान होने वाला असहनीय दर्द को कोई समझ नहीं सकता। इसका सीधा असर उसकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। किसी को पेट-कमर में बहुत तेज दर्द होता है, तो कोई इस दौरान मूड स्विंग्स की समस्या झेलता है। यही कारण है कि कंडीशन में चाहे घर हो या आफिस कार्य करना मुश्किल होता है। समाज में इस दर्द को हल्के में लिया जाता है यही सबसे बड़ी वजह है कि अब महिलाएं मेन्स्ट्रुअल सप्रेशन की मदद से पीरियड्स को बंद करने की टेक्नीक अपना रही हैं।

क्या है तरीका —
आपको बात दें मेन्स्ट्रुअल सप्रेशन वो तरीका है, जिसकी सहयता से महिलाओं के हर महीने आने वाले पीरियड्स को या तो बंद ​कर दिया जाता है या इसमें ब्लीडिंग के फ्लो को कम कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में जिसमें गोलियों की मदद से पीरियड्स रोके जा सकते हैं। साथ ही फिर उनकी फ्रीक्वेंसी को भी कम कर सकते हैं। लेकिन आपको बता दें ये सभी तरीके डॉक्टर के निर्देशन में ही किए जाते हैं। पर इसके लिए जरूरी होता है कि इस ट्रीटमेंट का उपयोग करने वाली महिला या युवति को कम से कम एक पीरियड जरूर आया हो।

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कौन—कौन ले सकता है इस ट्रीटमेंट का लाभ —
आपको बता दे इस सब जानकारी के बाद आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर कौन—कौन सी महिलाएं इस ट्रीटमेंट का उपयोग कर सकती हैं। तो आपको बता दें पीरियड्स से गुजर रही कोई भी महिला सप्रेशन मैथड अपना सकती है। आपको बता दें सामान्य तौर पर उन लोगों जिन महिलाओं को बहुत हैवी ब्लीडिंग होती है या​ फिर जिन महिलाओं को असहनीय दर्द होता है ऐसी महिलाओं को डॉक्टस द्वारा इस ट्रीटमेंट को लेने की सलाह दी जाती है।

पीरियड्स रोकने वाले इस ट्रीटमेंट को सप्रेशन मैथड भी कहा जाता है। इसे लेने के पहले डॉक्टर द्वारा पेशेंट की पूरी जांच की जाती है। साथ ही ये भी जाना जाता है कि उसे पहले से कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है। देखा जाता है कि महिला में ऑर्गन संबंधी कोई समस्या तो नहीं है साथ ही ये भी देखा जाता है कि महिला को अन्य कोई समस्या तो नहीं है। यदि कोई गंभीर बीमारी है तो उसे टाल दिया जाता है। यदि नहीं होती तो उन्हें इस ट्रीटमेंट अपनाने के लिए कह दिया जाता है।

ट्रीटमेंट का क्या है तरीका —
आपको बता दें इस ट्रीटमेंट में सबसे पहले बर्थ—कंट्रोल पिल्स होती है। जिनकी सहायता से पीरियड्स को पूरी तरह से बंद न करके बल्कि उसका फ्लो कम कर दिया जाता है। इसमें होता ये है कि दर्द सहन किया जा सकता है। इसके बाद दूसरा तरीका आता है जिसके कहते हैं स्किन पैच। आपको बता दे इस तरीके में महिलाओं के पीरियड्स को एक निश्चित समय यानि 4 महीने के लिए बंद कर दिया जाता है। यानि हर 4 महीने में महिलाओं के पीरियड्स आते हैं। हालांकि इस ट्रीटमेंट का उपयोग विदेशों में होता है। इंडिया में इसका चलन नहीं है।

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