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Patanjali Biscuit Weight Controversy: उज्जैन में पतंजलि के बिस्कुट पैकेट को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। 10 रुपए में बिकने वाले दूध बिस्कुट के पैकेट पर 70 ग्राम वजन लिखा था, लेकिन जांच में उसका वास्तविक वजन सिर्फ 52 ग्राम पाया गया। इस गड़बड़ी की शिकायत एक महिला उपभोक्ता ने की थी, जिसके बाद नाप-तौल विभाग ने जांच की।
पतंजलि समेत 8 कंपनियों पर जुर्माना
जानकारी के अनुसार, बाद में विभाग ने नियम का उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई की। इस मामले में पतंजलि सहित कुल 8 कंपनियों पर 55 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। विभाग ने कहा कि उपभोक्ताओं को सही वजन और गुणवत्ता देना कंपनियों की जिम्मेदारी है और भविष्य में भी ऐसी शिकायतों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
जांच में पतंजलि बिस्किट में कम वजन मिला
नापतोल विभाग उज्जैन के सहायक नियंत्रक संजय पाटणकर ने बताया कि शिकायत पर कार्रवाई की गई। एक उपभोक्ता को पतंजलि दूध बिस्किट में 70 ग्राम वजन होना चाहिए था, लेकिन उन्हें 12-13 ग्राम वजन कम लगा। इसके बाद विभाग के स्टैंडर्ड इंट्रूमेंट पर जब बिस्किट की जांच की गई तो वास्तविक रूप से 15-17 ग्राम वजन कर निकला।इसके बाद बिस्किट बेचने वाले और निर्माता संस्थान पर केस किया गया। ये प्रकरण राजनामा योग्य रहते हैं।
नापतोल विभाग पीड़ित को नहीं देता कोई मुआवजा
पीड़ित उपभोक्ता को नहीं मिलत कोई मुआवजा संजय पाटणकर ने बताया के नाप तौल विभाग के नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि शिकायतकर्ता को कुछ दिया जाए। इसके लिए उसे विभाग द्वार दर्ज केस के आधार पर फोरम में जाने चाहिए, वहां से उसे क्षतिपूर्ति मिल सकती है।
50 हजार का जुर्माना लगाया
विभाग सिर्फ शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई करता है और जुर्माना वसूलता है। इस मामले में 50 हजार रुपए राजीनामा राशि (जुर्माना) आरोपित किया गया है। यदि दुकानदार या निर्माता कंपनी जुर्माना अदा नहीं करती तो न्यायालीन कार्रवाई होती है।
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