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एंबुलेंस बुलाने की जानकारी न होने के कारण सब्जी के ठेले पर पत्नी को ले गया पति, रास्ते में हुई मौत।
Man carries wife body on handcart in Sagar: मध्यप्रदेश के सागर जिले से शनिवार को एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच, एक गरीब शख्स को अपनी बीमार पत्नी के लिए एक एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई। एंबुलेंस बुलाने की प्रक्रिया से अनजान और आर्थिक तंगी से जूझ रहे पति ने अपनी पत्नी को सब्जी के ठेले पर लिटाया और अस्पताल की ओर दौड़ पड़ा, लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया और रास्ते में पत्नी ने दम तोड़ दिया। जिसके बाद वह उसी ठेले पर शव रखकर अकेले ही श्मशान घाट पहुंच गया। जिसके बाद स्थानीय लोगों ने मदद की और मिलकर महिला का अंतिम संस्कार किया।
एंबुलेंस न मिलने पर ठेले को बनाया वाहन
यह मार्मिक घटना सागर रेलवे स्टेशन क्षेत्र की है। यहाँ पिछले 12-13 वर्षों से किराए के कमरे में रहकर सब्जी बेचने वाले पवन साहू (मूल निवासी ललितपुर, यूपी) पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शनिवार सुबह पवन की पत्नी पार्वती की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई।
पवन के पास न तो निजी वाहन था और न ही उसे यह पता था कि सरकारी एंबुलेंस के लिए किसे फोन करना है। गरीबी और जानकारी के अभाव में पवन ने समय गंवाने के बजाय अपनी पत्नी को उसी सब्जी वाले ठेले पर लिटाया और बदहवास होकर अस्पताल की ओर भागने लगा। लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।
रास्ते में तोड़ा दम, मूकदर्शक बना रहा समाज
परेशान पवन साहू अपनी पत्नी को बचाने की उम्मीद में करीब 2 किलोमीटर तक ठेला खींचता रहा, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही पार्वती की सांसें थम गईं। पत्नी की मौत के बाद बेबस पवन उसी ठेले पर शव को लेकर वापस मुड़ा और श्मशान घाट की ओर चल दिया। इस दौरान रास्ते में सैकड़ों लोग गुजरते रहे, लेकिन किसी ने भी उस बुजुर्ग की मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया। जानकारी के अनुसार भीड़भाड़ वाले रास्ते में किसी ने भी बुजुर्ग की मदद नहीं की।
मजबूर पवन साहू ने अस्पताल से मुक्तिधाम तक की दो किलोमीटर की दूरी ठेले से तय की।
पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए भी संघर्ष
जब वह ठेले पर पत्नी का शव लेकर मोतीनगर स्थित नरयावली मुक्तिधाम पहुंचा, तो वहाँ मौजूद लोगों ने जब उससे ठेले पर शव लाने का कारण पूछा, तो पवन फूट-फूटकर रो पड़ा। उसने बताया कि उसे एंबुलेंस बुलाने का तरीका ही नहीं पता था। मौके पर मौजूद पार्षद प्रतिनिधि नरेश यादव और कुछ जागरूक नागरिकों ने जब उसकी व्यथा सुनी, तो उनका दिल पसीज गया। इसके बाद सभी लोगों ने मानवता दिखाते हुए मदद का हाथ बढ़ाया।
लोगों ने दिखाई मानवता, हुआ अंतिम संस्कार
स्थानीय लोगों ने तुरंत चंदा इकट्ठा किया और अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक लकड़ी व अन्य सामग्री का प्रबंध किया। नागरिकों के सहयोग से ही पार्वती का विधि-विधान से अंतिम संस्कार संपन्न हो सका। यह घटना सागर शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है और आधुनिक समाज की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। (Sagar Pawan Sahu Case)
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