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Singrauli Municipal Corporation Mayor vs Commissioner Dispute: मध्यप्रदेश की ऊर्जा राजधानी सिंगरौली के नगर निगम में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब परिषद की बैठक के दौरान महापौर रानी अग्रवाल और कमिश्नर सविता प्रधान के बीच की तीखी नोकझोंक सामने आ गई। फाइलों को दबाकर रखने और 'बाहरी हस्तक्षेप' के आरोपों ने सदन की कार्यवाही को हंगामे की भेंट चढ़ा दिया। शनिवार को इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं।
सिंगरौली में मेयर vs कमिश्नर
सिंगरौली नगर निगम में पिछले कई महीनों से भीतर ही भीतर सुलग रही विवाद की चिंगारी शुक्रवार को परिषद की बैठक में ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ी। आम आदमी पार्टी (AAP) से महापौर (Mayor) रानी अग्रवाल और निगम कमिश्नर (Commissioner) सविता प्रधान के बीच एजेंडा बिंदुओं पर चर्चा के दौरान जमकर जुबानी तीर चले। मामला इतना बढ़ गया कि कमिश्नर ने सार्वजनिक रूप से महापौर की कार्यक्षमता पर सवाल उठा दिए।
निर्णय लेने में अक्षमता के आरोप
निगम अध्यक्ष देवेश पांडे की मौजूदगी में कमिश्नर सविता प्रधान ने सदन को संबोधित करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महापौर फाइलों पर निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं, जिसके कारण नगर निगम के महत्वपूर्ण विकास कार्य ठप पड़े हैं। कमिश्नर ने यहाँ तक कह दिया कि फाइलें निगम कार्यालय की मर्यादा छोड़कर बाहर (महापौर के निवास) जा रही हैं, जिससे प्रशासनिक गोपनीयता और गति दोनों प्रभावित हो रही हैं। कमिश्नर के इस बयान के बाद सदन में गहमागहमी बढ़ गई।
कमिश्नर के तीखे हमले से सदन में मचा हड़कंप
कमिश्नर सविता प्रधान ने महिला सशक्तिकरण का मुद्दा उठाते हुए कहा, "संविधान ने महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया है ताकि वे खुद फैसले लें। लेकिन जब मैं 'पार्षद पति' या 'महापौर पति' जैसे शब्द सुनती हूं, तो मुझे बहुत दुख होता है।" उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कई महिला पार्षद सदन में पहली बार नजर आ रही हैं, जबकि उनके अधिकारों का उपयोग कोई और कर रहा है।
कमिश्नर ने महिला पार्षदों से कहा- वे अपने अधिकारों का खुद इस्तेमाल करें। उन्होंने हैरानी जताई कि 25 महिला पार्षदों में से कई तो सदन की बैठकों से गायब ही रहती हैं और आज पहली बार दिखी हैं।
महापौर ने कहा- बिना पढ़े नहीं होंगे साइन
कमिश्नर के आरोपों पर महापौर रानी अग्रवाल ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने अपनी सीट से खड़े होकर कहा कि वे किसी भी फाइल पर बिना सोचे-समझे हस्ताक्षर नहीं करेंगी। महापौर ने कहा, "डी-1 बंगला मेरा घर नहीं, मेरा कार्यालय है। फाइलों को गहराई से पढ़ना और समझना मेरा विशेषाधिकार है। यदि मुझे किसी फाइल में भ्रष्टाचार की बू आती है, तो उसे रोकना मेरी जिम्मेदारी है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमतः उन्हें तीन दिनों तक फाइल अपने पास रखने का अधिकार है।
फाइल ले जाने पर सवाल उठाना गलत
महापौर रानी अग्रवाल ने साफ कहा कि अगर किसी फाइल में उन्हें गड़बड़ी या भ्रष्टाचार का शक होगा, तो वे उसे जरूर रोकेंगी। उन्होंने पलटवार करते हुए पूछा कि जब अधिकारी फाइलें अपने साथ ले जा सकते हैं, तो मेरे फाइल ले जाने पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं? फाइल ले जाने पर सवाल उठाना सही नहीं है।
निगम अध्यक्ष देवेश पांडे ने की समझाइश
इस गहमागहमी के बीच सदन में भारी शोर-शराबा हुआ। नगर निगम अध्यक्ष देवेश पांडे ने बीच-बचाव करते हुए दोनों पक्षों को शांत कराया। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत महापौर को फाइल रखने का अधिकार है, लेकिन महीनों तक फाइलें लंबित रहने से शहर का विकास रुक जाता है। उल्लेखनीय है कि यह बैठक करीब 11 महीने बाद आयोजित की गई थी।
मेरी इरादा किसी को नीचा दिखाना नहीं
निगम कमिश्नर सविता प्रधान ने कहा कि "पार्षद पति" या "महापौर पति" जैसे शब्द सुनना दुखद है। उनका इरादा किसी को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि महिला जनप्रतिनिधियों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने जोर दिया कि महिलाओं को अपने अधिकारों का उपयोग खुद करना चाहिए और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
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