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Cyclone Ditwah: श्रीलंका के चक्रवाती तूफान में फंसा MP का कारोबारी, दंपत्ति ने भूखे-प्यासे कार में गुजारी खौफनाक रातें

श्रीलंका में आए तूफान दित्वाह के कहर के बीच ओरछा के बिजनेसमैन गिरीश प्रेमानी और उनकी पत्नी 2 दिन तक पहाड़ी लैंडस्लाइड और बाढ़ के बीच फंसे रहे। बारिश, अंधेरा और बिना नेटवर्क के हालात में दोनों ने कार में ही दो रातें गुजारीं।

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Vikram Jain
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श्रीलंका में तबाही का मंजर और ओरछा के कारोबारी गिरीश प्रेमानी।

Sri Lanka Cyclone Ditwah Orchha Businessman Story: श्रीलंका में आए चक्रवाती तूफान दित्वाह ने ऐसी तबाही मचाई कि हाहाकार मच गया। लगातार मूसलाधार बारिश, भीषण लैंडस्लाइड और बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जनहानि की है। शनिवार तक 123 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 130 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस तूफान का असर केवल श्रीलंका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दक्षिण भारत के तमिलनाडु और आसपास के राज्यों में भी इसका भारी प्रभाव देखने को मिल रहा है। श्रीलंका में अब भी स्थिति सामान्य नहीं है और कई भारतीय यात्री फंसे हुए हैं।

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चेन्नई की उड़ानें रद्द होने के कारण करीब 300 भारतीय यात्री कोलंबो एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं। इन्हीं यात्रियों में मध्यप्रदेश के ओरछा के बिजनेसमैन ग्रीस प्रेमानी और उनकी पत्नी ईशा प्रेमानी भी शामिल थे। वे 23 नवंबर को एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने श्रीलंका पहुंचे थे, लेकिन तूफान का प्रकोप उन्हें ऐसी जगह ले आया जहां जिंदगी और मौत के बीच की दूरी सिर्फ कुछ इंच बच गई थी। 26 नवंबर को रेस्क्यू टीम ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। दो दिनों तक पहाड़ी इलाके में फंसे रहने के बाद गिरीश ने जब अपनी आपबीती सुनाई तो रोंगटे खड़े हो गए।

तूफान में फंसे भारतीय दंपत्ति की कहानी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रीलंका में उठे चक्रवाती तूफान दित्वाह ने भारी तबाही मचाई है। तूफान के कारण कई भारतीय परिवार वहां फंस गए, जिनमें मध्यप्रदेश के ओरछा के कारोबारी गिरीश प्रेमानी और उनकी पत्नी ईशा प्रेमानी भी शामिल हैं। दोनों एक पारिवारिक शादी समारोह में हिस्सा लेने श्रीलंका गए थे।

गिरीश प्रेमानी के परिवार के कुछ सदस्य पहले से ही श्रीलंका में कारोबार करते हैं। इसी परिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गिरीश प्रेमानी और उनकी पत्नी के साथ 22 नवंबर को झांसी से ट्रेन दिल्ली रवाना हुए। अगले दिन, 23 नवंबर को दिल्ली से वाया चेन्नई कोलंबो की फ्लाइट पकड़ी। रात करीब आठ बजे उनकी फ्लाइट कोलंबो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरी।

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मध्यप्रदेश के ओरछा में प्रॉपर्टी बिजनेस करने वाले गिरीश फिलहाल झांसी में रहते हैं और शादी के कार्यक्रम के सिलसिले में श्रीलंका पहुंचे थे, लेकिन साइक्लोन दित्वाह की तबाही के बीच वे भी अन्य भारतीयों की तरह फंस गए। 

लैंडस्लाइड से रास्ता बंद, 48 घंटे पहाड़ों में गुजारे

खौफ से भरे उन पलों को याद करते हुए गिरीश प्रेमानी ने बताया कि दो दिन की लंबी यात्रा के बाद वे बेहद थक चुके थे, लेकिन परिवारिक कार्यक्रम में समय पर पहुंचने की जल्दी थी और उन्हें कोलंबो एयरपोर्ट से 35 किलोमीटर दूर कैंडी पहुंचना था। बाहर लगातार जोरदार बारिश हो रही थी और राजधानी के कई हिस्सों में पेड़ गिरने से भारी ट्रैफिक जाम था। हालत यह थी कि शहर से मात्र पांच किलोमीटर बाहर निकलने में ही डेढ़ से दो घंटे लग गए।

बारिश, अंधेरा और डर, फंसी कार

कैंडी वही इलाका था जहां साइक्लोन का सबसे ज्यादा असर था—तेज बारिश, भूस्खलन और बाढ़ ने शहर को लगभग ठप कर दिया था। कोलंबो से कैंडी पहुंचने के लिए पहाड़ी रास्ता पार करना पड़ता है। गिरीश बताते हैं—जैसे ही हमारी कार पहाड़ी से नीचे उतर रही थी, अचानक तेज बारिश के बीच लैंडस्लाइड शुरू हो गई।

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ड्राइवर ने घबराकर हमें तुरंत कार से बाहर निकलने को कहा। बारिश में भीगते हुए जैसे ही हम सड़क किनारे खड़े हुए, देखा कि पहाड़ से मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थर सड़क पर गिर रहे थे। चारों तरफ अंधेरा, पहाड़ का धंसना और तेज बारिश—दृश्य इतना भयावह था कि शरीर में सिहरन दौड़ गई।

गिरीश कहते हैं—“ऐसा मंजर मैंने सिर्फ वीडियो में देखा था, कभी सोचा नहीं था कि असल जिंदगी में इसका सामना करना पड़ेगा।” थोड़ी देर बाद लैंडस्लाइड थमी, लेकिन सड़क पूरी तरह बंद हो चुकी थी। उनके आसपास कई लोग और भी फंसे हुए थे, जो सभी स्थानीय निवासी थे और उतने ही डरे और असहाय दिखाई दे रहे थे।

कार में गुजारी दो रातें, 2 दिन भूखे-प्यासे बैठे रहे

भूख-प्यास से बेहाल गिरिश और पत्नी ने कार में ही रात बिताई। उनके शब्दों में—

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“हर सांस आखिरी लग रही थी… नेटवर्क नहीं था, किसी को बता भी नहीं सकते थे कि हम जिंदा हैं या नहीं।”

बारिश इतनी तेज थी कि पानी कांच पर हथौड़े की तरह गिर रहा था। खाने-पीने को कुछ नहीं था। मजबूरी में हाथ बाहर निकालकर बारिश का पानी पीना पड़ा।

हम लोग भीग चुके थे। ड्राइवर ने कहा, अब रास्ता कब खुलेगा, कुछ कह नहीं सकते। ये सुनते ही दिल धक से रह गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने बारिश, लैंडस्लाइड और अंधेरे के बीच कार में भूखे-प्यासे रहकर दो रातें निकाली, जो जीवन की सबसे भयावह घड़ियां थीं। प्रकृति के इस प्रकोप ने उन्हें मौत का ऐसा साया दिखाया जिसे वे जिंदगी भर भूल नहीं पाएंगे।

तीसरे दिन पहुंची रेस्क्यू टीम, डरावना था नजारा

लगातार बारिश से नदी का जलस्तर बढ़कर पुल पर 10 फीट तक पहुंच गया था। चौथे दिन यानी 26 नवंबर को रेस्क्यू टीम पहाड़ से मिट्टी हटाने में सफल हुई। ग्रीस और उनकी पत्नी को दोपहर 3 बजे के आसपास सुरक्षित कैंडी ले जाया गया। रास्ते में गिरे पेड़, टूटे घर और हजारों मृत मवेशियों का मंजर देखकर दोनों सदमे में आ गए।

ये मेरा दूसरा जन्म है…

उन्होंने आगे बताया कि कैंडी पहुंचने के बाद भी बारिश का दौर जारी रहा। और फ्लाइट्स रद्द हो गए हैं। वे सुरक्षित है। उन्होंने कहा— “ये मेरा और मेरे परिवार का दूसरा जीवन है। भगवान और हमारे रामराजा सरकार की कृपा से हम बच गए।”

बता दें कि श्रीलंका में तबाही मचाने के बाद, साइक्लोन दित्वाह का असर भारत के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के तटीय इलाकों में भी दिख रहा है। इन क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश हो रही है और अब तक तमिलनाडु से तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मौसम विभाग ने आने वाले चार दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है।

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