MPT 80 Lakh Kharidi Ghotala: MPT खरीदी घोटाले में प्रभारी प्रबंधक अरविंद शर्मा और क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल कुरूप सस्पेंड

मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (MPT) में 80 लाख की खरीदी घोटाले में प्रभारी प्रबंधक अरविंद शर्मा और क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल कुरूप को सस्पेंड कर दिया गया है।

MPT 80 lakh kharidi ghotala Regional Manager Anil Kurup  In charge Manager Arvind Sharma suspend

MPT खरीदी घोटाले में 2 सीनियर अधिकारी सस्पेंड

MPT 80 Lakh Kharidi Ghotala: मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (MPT) में करीब 80.82 लाख रुपये का खरीदी घोटाला (MPT kharidi ghotala) सामने आने के बाद 2 सीनियर अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लिया गया है। प्रभारी प्रबंधक अरविंद शर्मा और क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल कुरूप को सस्पेंड कर दिया गया है।

कंपनी के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं

मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के MD इलैया राजा टी के निर्देशों के बाद एक महीने बाद भी FIR नहीं हो पाई है। सामान सप्लाई करने वाली कंपनी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

बिना अनुमति के खरीदा सामान

विंड एंड वेव्ज रेस्टोरेंट और बोट क्लब में काम करने वाले क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल कुरूप और प्रभारी प्रबंधक अरविंद शर्मा ने बिना मुख्यालय की परमिशन के 5 लाख की सीमा की जगह करीब 80.82 लाख रुपये का सामान खरीद लिया। खरीदी के बिलों को कोटेशन के नाम पर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर मंजूर किया गया। जांच में ये भी खुलासा हुआ कि खरीदी गई 72 चीजों में से 40 चीजें सत्यापन में नहीं मिलीं जिससे निगम को 22.37 लाख रुपये का नुकसान हुआ। सामान पर कंपनी का लोगो, बारकोड और MRP भी नहीं होने से क्वालिटी पर भी सवाल खड़े हुए।

सालों से निगम में सप्लाई कर रही थी कंपनी

सूत्रों के मुताबिक सप्लायर कंपनी पिछले कई सालों से MPT के अलग-अलग विभागों में सामान सप्लाई कर रही है। हैरानी की बात ये है कि कंपनी मालिक ने 3 अलग-अलग कंपनियों के नाम से रजिस्ट्रेशन किया है और कोटेशन के आधार पर काम के लिए इन्हीं कंपनियों का उपयोग करता रहा। पते पर न तो दुकान है, न गोडाउन, जिससे सप्लाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। निगम के कर्मचारियों का कहना है कि अगर पुराने बिलों की जांच हो तो लाखों के बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है।

कैसे सामने आया घोटाला

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब MPT के एमडी इलैया राजा टी के पास 56 लाख रुपये का बिल आया। MD को गड़बड़ी का शक हुआ तो कमेटी बनाकर जांच कराई। जांच में अनियमितताएं मिलने पर अधिकारियों को सस्पेंड किया गया। वहीं सप्लायर कंपनी के खिलाफ FIR के निर्देश दिए गए।

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