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MP Promotion Policy 2025: मध्यप्रदेश के सरकारी विभागों में लाखों अधिकारी और कर्मचारियों के में लंबे समय से पेंडिंग प्रमोशन में आरक्षण मामले में मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को सुनवाई हुई।
मध्यप्रदेश की जबलपुर हाईकोर्ट चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर प्रमोशन पॉलिसी 2025 पर स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने इसमें पूछा हैं कि नई प्रमोशन पॉलिसी में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का कहां और कैसे पालन किया गया है ? कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार को यह बताना होगा कि पुरानी पॉलिसी की तुलना में नई पॉलिसी में कौन से सकारात्मक सुधार किए गए हैं। अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी।
RB राय केस में सरकार ने क्या कदम उठाए ?
सुनवाई में आगे कोर्ट ने पूछा कि आरबी राय बनाम राज्य सरकार मामले में जो विसंगतियां उजागर हुई थीं, उन्हें दूर करने के लिए सरकार ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं ?
अजाक्स और सपाक्स ने पूरी कीं अपनी दलिलें
मंगलवार को कोर्ट में दोनों पक्षों की जिरह हुई, जिसमें अनुसूचित जाति जन जाति अधिकारी कर्मचारी संघ यानी अजाक्स और सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्य एवं क्षत्रिय समाज यानी सपाक्स ने अपनी-अपनी दलीलें पूरी कीं।
आरक्षण के वर्तमान प्रारूप में तकनीकी खामियां
सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्य एवं क्षत्रिय समाज सपाक्स याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव ने कर्मचारियों के ग्रेडेशन से जुड़े आंकड़े पेश किए। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरक्षण के वर्तमान प्रारूप में कई तकनीकी खामियां हैं।
अजाक्स-प्रमोशन नियम 2025 असंवैधानिक
अनुसूचित जाति जन जाति अधिकारी कर्मचारी संघ अजाक्स के याचिकाकताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ केएस चौहान एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि प्रमोशन 2025 के नियम 11 (1,2,3) सहित अन्य नियम पूर्णतः असंवैधानिक है, क्योंकि यह नियम सबसे पहले आरक्षित वर्ग की ग्रेडेशन लिस्ट बनाने का प्रावधान करती है। आरक्षित वर्ग के कर्मचारी जो, मेरिट के आधार पर पदोन्नति हुए हैं, उनको भी आरक्षित वर्ग में गणना करने का नियम प्रावधान करता है।
मेरिट पर प्रमोशन से जुड़ा कोई प्रावधान नहीं
अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि एससी-एसटी वर्ग के लिए मेरिट पर प्रमोशन से संबंधित कोई भी प्रावधान नियमों में मौजूद नहीं है। भारत का संविधान एवं सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी के जजमेंट सहित कई फैसले हैं जो, स्पष्ट प्रावधान करते हैं कि, सबसे पहले अनारक्षित वर्ग में प्रमोशन होंगे।
SC गाइडलाइन के खिलाफ सरकार का नया नियम
आखिरी में आरक्षित वर्ग और जो कर्मचारी मेरिट के आधार पर अनारक्षित में चयनित होंगे, उनकी गणना आरक्षित वर्ग में किए जाने का उक्त नियमों मे प्रावधान है। सरकार का नया नियम पूर्ण रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के प्रतिकूल है।
कोर्ट ने कहा बड़ी गलती पर चैलेंज क्यों नहीं किया ?
हाई कोर्ट ने कहा कि जब नियमों में इतनी बड़ी गलती है तो, आपने इससे चैलेंज क्यों नहीं किया। इस पर अजाक्स संघ की ओर से कहा गया कि संघ नहीं चाहता है कि न्यायिक प्रक्रिया के कारण प्रमोशन बाधित हो।
अगला कदम, फैसला सुरक्षित होने की उम्मीद
कोर्ट ने महाधिवक्ता को निर्देश दिए हैं ​कि वे आगामी 3 फरवरी को होने वाली सुनवाई में आरबी राय मामले की कमियों और नई नीति के सुधारों पर विस्तृत चर्चा करेंगें। कानूनी गलियारों में चर्चा है कि सरकार के जवाब के बाद कोर्ट अपना फैसला सुरक्षित रख सकता है।
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