जबलपुर हाईकोर्ट: भोपाल निगमायुक्त संस्कृति जैन को सजा के मामले में HC ने लगाई रोक, अवमानना केस में दोषी ठहराई गई थीं

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने भोपाल नगर निगम की आयुक्त संस्कृति जैन को अवमानना का दोषी पाए जाने के आदेश पर रोक लगा दी।

Bhopal Municipal Commissioner Sanskriti Jain

Bhopal Municipal Commissioner Sanskriti Jain: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने भोपाल नगर निगम की आयुक्त संस्कृति जैन को अवमानना का दोषी पाए जाने के आदेश पर रोक लगा दी।

 दरअसल, शुक्रवार, 6 फरवरी को जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष सजा के प्रश्न पर सुनवाई होनी थी। निगमायुक्त को अपना पक्ष देखने हाजिर रहने कहा गया था। किन्तु इससे पूर्व ही युगलपीठ में आवेदन दायर कर निगमायुक्त जैन ने सजा पर रोक की मांग कर दी। 

सिंगल बेंच ने निगम कमिश्नर जैन को ठहराया था दोषी

गुरुवार को जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए नगर निगम, भोपाल की आयुक्त संस्कृति जैन को अवमानना का दोषी ठहराया था। कोर्ट ने साफ किया था कि नगर निगम द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियत प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी। लिहाजा, आयुक्त को सजा के सवाल पर अपना पक्ष रखना होगा। इस सिलसिले में शुक्रवार को सुबह 10.30 बजे से सुनवाई नियत की गई थी।

दरअसल, यह मामला मर्लिन बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि नगर निगम ने 18 नवंबर, 2025 को उसकी संपत्ति के सामने के हिस्से को नियमानुसार प्रक्रिया अपनाए बिना तोड़ दिया था।

नगर निगम की ओर से दलील दी गई  कि निर्माण अवैध था। 7 नवंबर, 2024 को दी गई अनुमति निरस्त की जा चुकी थी। 14 मई, 2025 को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।

हाईकोर्ट ने इसलिए ठहराया था दोषी

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट की 2025 में जारी गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को नैसर्गिक न्याय सिद्धांत अनुरूप न तो व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया, न ही सुनवाई की कोई कार्यवाही दर्ज की गई और न ही कोई अंतिम आदेश पारित किया गया। इसके स्थान पर सीधे तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी गई, जो वैधानिक नहीं है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि बिना शर्त माफी के साथ तोड़े गए हिस्से को बहाल किया जाता, तो मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता था। 

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भोपाल निगमायुक्त ने इस तरह किया बचाव

जिस पर नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि निर्माण को बहाल करना संभव नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना मानते हुए कड़ा रुख अपनाया। हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(बी) के तहत दोषी ठहराया है। इस मामले में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने शुक्रवार, 6 फरवरी को सजा के बिंदु पर सुनवाई निर्धारित की गई थी। किन्तु निगमायुक्त ने अपना बचाव सीजे की अध्यक्षता वाली डबल बेंच पहुंचकर कर लिया।

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