Jabalpur EOW Action: 226 करोड़ का टेंडर घोटाला, ईओडब्ल्यू ने देवबिल्ड इंडिया के संचालकों पर दर्ज किया केस

Jabalpur EOW Action: जबलपुर आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने 226 करोड़ रुपए के एक बड़े टेंडर घोटाले का खुलासा किया है। आरोप है कि कंपनी ने फर्जी परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट से टेंडर हासिल किया।

Jabalpur EOW Action

Jabalpur EOW Action: मध्यप्रदेश जबलपुर आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने 226 करोड़ रुपए के एक बड़े टेंडर घोटाले का खुलासा किया है। इस मामले में EOW की ओर से देवबिल्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Devbuild India Pvt Ltd) के प्रबंध संचालक समेत अन्य डायरेक्टर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है। (टॉप न्यूज)

(मध्यप्रदेश) EOW से मिली जानकारी के अनुसार, हाथीताल निवासी देवबिल्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड प्रबंध संचालक कैलाश शुक्ला ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर यह घोटाला करने का आरोप है। कैलाश शुक्ला ने नोएडा स्थित इनॉक्सविंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस लिमिटेड के नाम से एक कूटरचित परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट तैयार करवाया। आरोप है कि कंपनी ने फर्जी परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट का उपयोग कर मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (MPPTCL) से 226 करोड़ रुपये का टेंडर हासिल किया। (hindi news)

शिकायत पर प्रारंभिक जांच में हुआ खुलासा

इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर कंपनी ने हाईटेंशन लाइन और 220 केवी सब स्टेशन के निर्माण से जुड़े तीन बड़े टेंडर लिए। जिनमें —टीआर-36/16, टीआर-13/20 और टीआर-35/20—2 मार्च 2017 को पावर ट्रांसमिशन कंपनी से प्राप्त कर लिए थे। शिकायत मिलने पर EOW एसपी अनिल विश्वकर्मा ने जांच बैठाई। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

कंपनी का खंडन, दस्तावेज जारी नहीं किया

जांच में पता चला कि इनॉक्सविंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस लिमिटेड ने ऐसा कोई परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट जारी ही नहीं किया था। EOW की टीम ने नोएडा स्थित कंपनी के कॉर्पोरेट ऑफिस पहुंचकर पुष्टि की, जहां स्पष्ट रूप से बताया गया कि उनके द्वारा कोई दस्तावेज जारी नहीं हुआ है।

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इन अधिकारियों पर दर्ज की गई एफआईआर

EOW ने कैलाश कुमार शुक्ला (प्रबंध संचालक), सीमा शुक्ला और भानू शुक्ला (डायरेक्टर) के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 34, 420 (धोखाधड़ी), 465 (कूटरचना), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से कूटरचना), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग), और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत अपराध क्रमांक 156/2025 केस दर्ज किया है।

ईओडब्ल्यू अब साजिश का करेगी पर्दाफाश

EOW अब आगे की जांच में वित्तीय लेन-देन और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की व्यापक साजिश का पता लगा रही है। 226 करोड़ रुपये के इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद ऊर्जा और ट्रांसमिशन क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

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