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NEET PG NRI Quota MP HC: नीट पीजी मामले में एनआरआई कोटे को लेकर बुधवार, 25 फरवरी को हाईकोर्ट बेंच इंदौर ने स्टूडेंट्स के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है। साथ ही दो हफ्ते में चिकित्सा शिक्षा विभाग (Medical Education Department) से जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता डॉ.अभि शर्मा और अन्य छात्रों की ओर से एडवोकेट हेमेंद्र जैन ने पक्ष रखते हुए कहा, हाईकोर्ट ने दो हफ्ते के भीतर जिन मेडिकल कॉलेज में एनआरआई कोटे की सीटें खाली हैं और स्टूडेंट्स उपलब्ध हैं तो अगली सुनवाई से पहले वे सीटें छात्रों को अलॉट कर दी जाएं।
हाईकोर्ट ने NRI छात्रों के पक्ष में किया ऑर्डर
एडवोकेट जैन ने बताया कि हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रवेश के लिए एक या उससे अधिक कितने भी राउंड हों, लेकिन आखिरी राउंड (मॉप अप राउंड) या स्टे वेकेंसी राउंड में एनआरआई सीटें रिक्त हैं और छात्र उपलब्ध हैं तो उन छात्रों को ही सीटें अलॉट की जानी चाहिए।
जैन ने बताया कि हमारी दलील थी कि एमपी मेडिकल एजुकेशन रूल्स 2018-2019 के नियम 14 (क) (2) के अनुसार हर प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में 15 प्रतिशत एनआरआई कोटा है। एनआरआई स्टूडेंट नहीं होने पर खाली सीटें जनरल स्टूडेंट को नहीं दी जा सकती। ऐसे स्टूडेंट को लास्ट राउंड तक फॉलो करना है।
यह है पूरा मामला?
NEET PG काउंसलिंग 2026 में NRI कोटे की सीटों को लेकर विवाद सामने आया है। इसे लेकर NRI स्टूडेंट्स ने डायेरक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (DME) द्वारा चौथे मॉप-अप राउंड में बची हुई NRI सीटों को जनरल कोटे में परिवर्तित किए जाने के फैसले को चुनौती दी। एमपी हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई। इसमें सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें कोर्ट ने DME को निर्देश दिए हैं कि NRI को अंतिम राउंड तक मौका दें।
इसलिए NRI कैंडिडेट्स को परेशानी
मौजूदा रुल्स के अनुसार NRI कैंडिडेट फर्स्ट राउंड, सेकंड राउंड और मॉप-अप राउंड तक NRI कोटे में प्रवेश पाने की पात्रता रखते हैं। इसके बावजूद DME द्वारा चौथे मॉप-अप राउंड में शेष NRI सीटों को जनरल कोटे में बदल दिया गया, जिससे पात्र NRI छात्रों के संवैधानिक और वैधानिक अधिकार प्रभावित हुए।
सीनियर वकील अजय बागड़िया ने बताया कि सीटों को समय से पहले जनरल कोटे में परिवर्तित करना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का भी उल्लंघन है।
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