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इंदौर दूषित पानी केस में CM का एक्शन: इंदौर एडिशनल कमिश्नर को हटाया, कलेक्टर को नोटिस, प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण का प्रभार वापस

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 15 मौतों के बाद सीएम मोहन यादव ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की है। मामले में लापरवाह अपर आयुक्त को हटा दिया गया और अधीक्षण यंत्री से जल वितरण का प्रभार छीन लिया गया।

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Vikram Jain
indore water contamination case cm action

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 15 मौतों के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने की कार्रवाई।

indore water contamination case cm action: मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल के कारण हुई 15 मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। भागीरथपुरा मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा एक्शन लिया है। मामले में नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है। साथ ही एडिशनल कमिश्नर सिसोनिया को इंदौर से हटा दिया गया है।

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मामले में कलेक्टर को भी नोटिस जारी जवाब मांगा है। वहीं इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से पानी सप्लाई की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है।  जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करने और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेतावनी न मानने को मुख्यमंत्री ने बेहद गंभीर माना है। सीएम ने मुख्य सचिव और आला अफसरों के साथ आपात बैठक कर दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए है। इधर, शुक्रवार को देर शाम को इंदोर नगर निगम में 3 एडिशनल कमिश्नर नियुक्त किए गए हैं।

इंदौर जल कांड में मुख्यमंत्री का एक्शन

इंदौर के भागीरथपुरा में सीवेज मिश्रित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। सीएम ने अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पर भी चर्चा की। साथ ही निगम में खाली पड़े आवश्यक पदों को तत्काल भरने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने इंदौर नगर निगम के आला अफसरों के खिलाफ एक्शन लिया है।

सरकार ने एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को हटाकर कृषि विभाग भेज दिया है। उनके स्थान पर आकाश सिंह, प्रखर सिंह और आशीष पाठक के रूप में तीन नए IAS अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

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तीन नए IAS अधिकारियों की हुई नियुक्ति

नगर निगम की कार्यप्रणाली को पटरी पर लाने के लिए तीन नए अपर आयुक्तों की नियुक्ति की गई है। इनमें दो डायरेक्ट आईएएस अधिकारी हैं और एक प्रमोटी आईएएस शामिल हैं:

  • आकाश सिंह (IAS 2019): वर्तमान में जिला पंचायत सीईओ खरगोन के पद पर कार्यरत आकाश सिंह को इंदौर नगर निगम का अपर आयुक्त बनाया गया है।
  • प्रखर सिंह (IAS 2020): अलीराजपुर जिला पंचायत सीईओ के रूप में सेवाएं दे रहे प्रखर सिंह को भी इंदौर में अपर आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • आशिष पाठक (IAS 2020): इंदौर में ही उप परिवहन आयुक्त के पद पर तैनात आशीष पाठक अब नगर निगम में अपर आयुक्त का मोर्चा संभालेंगे।

सीएस की पसंद पर लगी मुहर

प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि इन नियुक्तियों में मुख्य सचिव अनुराग जैन की पसंद को तरजीह दी गई है। नई टीम से उम्मीद की जा रही है कि वे इंदौर में ठप पड़ी बुनियादी सुविधाओं और विशेषकर जल प्रदाय नेटवर्क में सुधार लाएंगे। शासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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Indore Contaminated Water Death

अधिकारियों पर गिरी गाज, प्रभार वापस

मुख्यमंत्री के निर्देश पर इंदौर के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया गया है। साथ ही, जल वितरण कार्य विभाग के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव से उनका प्रभार वापस ले लिया गया है। इसके अलावा, नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

शिकायतों के बाद भी अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान

भागीरथपुरा के निवासियों का आरोप है कि पिछले कई हफ्तों से गंदे पानी की सप्लाई हो रही थी। वार्डवासियों द्वारा बार-बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम के अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। जिसके बाद पेयजल की पाइपलाइन में सीवर का पानी मिल गया, जो 15 निर्दोष लोगों की मौत का कारण बना।

जांच में चौंकाने वाला खुलासा: 60 में से 59 सैंपल फेल

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट ने नगर निगम की बड़ी लापरवाही उजागर की है। रिपोर्ट के अनुसार, शहर के 60 स्थानों से लिए गए पानी के सैंपलों में से 59 सैंपल पीने योग्य नहीं पाए गए। इन सैंपलों में खतरनाक 'कोलीफॉर्म बैक्टीरिया' मिला है, जो उल्टी, दस्त और पेट की गंभीर बीमारियों के लिए जिम्मेदार है। बोर्ड ने नगर निगम को तीन बार पत्र लिखकर चेताया था, लेकिन कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए।

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इन इलाकों में स्थिति गंभीर

भागीरथपुरा के अलावा खातीपुरा, रामनगर, खजराना, गोविंद कॉलोनी, परदेशीपुरा, राजवाड़ा और जूनी इंदौर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी पानी की गुणवत्ता मानकों से बहुत नीचे मिली है।

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