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Mhow Contaminated water disease: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब महू से डराने वाली खबर सामने आई है। महू के पत्ती बाजार और मोती महल क्षेत्र में पिछले 15 दिनों से नलों के जरिए हो रही दूषित की सप्लाई से गंभीर बीमारी फैल रही है। यहाँ करीब 25 लोग गंभीर रूप से बीमार हैं, जिनमें बड़ी संख्या स्कूली बच्चों की है। प्रशासन ने इलाके में स्वास्थ्य इमरजेंसी जैसी मुस्तैदी दिखाते हुए सैंपलिंग शुरू कर दी है।
वहीं मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी सरकार को घेरते हुए कहा कि इंदौर के बाद अब महू की जनता दूषित पानी पीकर बीमार हो रही है, जो सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही का प्रमाण है। इधर, महू विधायक उषा ठाकुर ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर अधिकारियों को नालियों के भीतर से गुजरने वाली पाइपलाइन को तुरंत बाहर करने और मरीजों के बेहतर इलाज के कड़े निर्देश दिए हैं।
नलों का बदबूदार पानी पीने से फैली बीमारी
इंदौर के भागीरथपुरा के दूषित पानी कांड के बाद अब महू में भी पेयजल व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। नगर के चंदर मार्ग, मोती महल और पत्ती बाजार इलाके में घरों के नलों से मटमैला और बदबूदार पानी आ रहा है। रहवासियों का आरोप है कि नर्मदा जल की पाइपलाइन नालियों के बीच से गुजर रही है, जिसमें सीवेज का गंदा पानी मिल रहा है। इस दूषित जल के सेवन से अब तक 19 बच्चों सहित 25 लोग पीलिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं।
हालात इतने गंभीर हैं कि कई बच्चे अपनी प्री-बोर्ड परीक्षाएं तक नहीं दे पा रहे हैं। एक बुजुर्ग जगदीश चौहान को लिवर इंफेक्शन के चलते इंदौर रेफर करना पड़ा है, जबकि कई मासूम रेडक्रॉस अस्पताल में भर्ती हैं।
एसडीएम ने खुद पीकर देखा पानी
दूषित पानी सप्लाई होने की सूचना मिलते ही एसडीएम राकेश परमार और तहसीलदार विवेक सोनी मौके पर पहुंचे। जब रहवासियों ने पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए, तो एसडीएम ने खुद एक घर से पानी मंगवाकर पिया और उसकी खराब स्थिति को स्वीकार किया। उन्होंने तत्काल प्रभाव से पाइपलाइन की लीकेज जांचने और पानी के सैंपल लैब भेजने के निर्देश दिए।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा असर
पानी से फैली बीमारी का सबसे बुरा असर छात्रों पर पड़ा है। 12वीं की छात्रा अलीना 15 दिनों से बिस्तर पर है और अपनी परीक्षा नहीं दे सकी। उसके साथ ही यथार्थ, कृशु और आदर्श जैसे कई बच्चे अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
नालियों के बीच फंसी पाइपलाइन
क्षेत्र के रहवासियों ने जल प्रदाय व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नर्मदा जल की मुख्य पाइपलाइन कई स्थानों पर गंदी नालियों के बीच से होकर गुजर रही है। आशंका जताई जा रही है कि नालियों की गंदगी रिसकर पेयजल में मिल रही है, जिससे पूरा इलाका बीमारी की चपेट में आ गया है। हालांकि, तकनीकी तौर पर प्रशासन ने अभी तक किसी बड़े लीकेज की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन पानी की गुणवत्ता पर सवाल बरकरार हैं।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, घर-घर शुरू हुई सैंपलिंग
बीमारी फैलने की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। बीएमओ डॉ. योगेश सिंगारे के निर्देशन में मेडिकल टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों में दस्तक दी और घर-घर जाकर मरीजों की जांच शुरू की। गुरुवार शाम तक आठ बच्चों के ब्लड सैंपल लिए जा चुके हैं, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा गया है। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 21 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है।
दूषित पानी पर जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा
महू में दूषित पानी से फैली बीमारी को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की जनता गंदा पानी पीने को मजबूर है। पटवारी ने दूषित पानी को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
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पीड़ित परिवारों से मिलीं विधायक उषा ठाकुर
महू में दूषित पानी से बिगड़ते हालात देख विधायक उषा ठाकुर ने प्रभावित बस्तियों का दौरा किया। उन्होंने घर-घर जाकर बीमार बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात की और उनका ढांढस बंधाया। विधायक ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नागरिकों से अपील की कि वे स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए फिलहाल पानी को उबालकर ही उपयोग करें। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को दो टूक कहा कि यदि पेयजल पाइपलाइन नाली के भीतर पाई जाती है, तो उसे तत्काल वहां से हटाकर बाहर शिफ्ट किया जाए।
जल व्यवस्था और स्थायी समाधान का निर्देश
विधायक ने स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद के अधिकारियों की आपात बैठक ली। उन्होंने निर्देश दिए कि बीमारों को इलाज और दवाओं की कमी नहीं होनी चाहिए। साथ ही, दूषित पानी की सप्लाई तुरंत रोककर प्रभावित इलाकों में टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उषा ठाकुर ने आश्वस्त किया कि पूरी सप्लाई लाइन की तकनीकी जांच कराई जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने और क्षेत्रवासियों को इस समस्या का स्थायी समाधान मिल सके।
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